नालंदा जिले में खेत से घर लौट रहे एक किसान की करंट लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि रास्ते में झूल रहा बिजली का तार किसान के सिर से सट गया, जिसके बाद वह करंट की चपेट में आ गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने किसान को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंचे और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
परिजनों के मुताबिक किसान खेत में कृषि कार्य पूरा करने के बाद वापस घर लौट रहा था। रास्ते में बिजली का तार काफी नीचे झूल रहा था। किसान जैसे ही उसके नीचे से गुजरा, उसका सिर तार के संपर्क में आ गया। बिजली का करंट लगते ही वह मौके पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने घटना देखी तो तुरंत मदद के लिए दौड़े।
हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया। किसान की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल और उसके बाद अस्पताल पहुंच गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। खेती पर निर्भर परिवार के लिए अचानक हुई इस मौत से आर्थिक संकट की चिंता भी बढ़ गई है।
मृतक के चाचा ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लंबे समय से बिजली का तार झूल रहा था और इसकी स्थिति को लेकर विभाग को जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद तार को ठीक नहीं कराया गया। अगर समय रहते तार को ठीक कर दिया जाता तो किसान की जान बच सकती थी।
परिजनों का आरोप है कि बिजली के तार का इतना नीचे झूलना ग्रामीणों के लिए लगातार खतरा बना हुआ था। खेतों की ओर जाने वाले रास्ते से किसान और मजदूर रोजाना गुजरते हैं। ऐसे रास्ते पर बिजली का तार नीचे लटकता रहे तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। परिवार ने बिजली विभाग से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और परिजनों से घटना की जानकारी ली। मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस हादसे के कारणों की भी जांच कर रही है।
बिजली का करंट लगने के बाद किसान को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने तत्काल प्रयास किया। हालांकि बिजली की चपेट में आने के बाद उसकी स्थिति गंभीर हो चुकी थी। ग्रामीणों के मुताबिक हादसे के समय वहां मौजूद लोगों में भी डर का माहौल बन गया था, क्योंकि बिजली का तार जमीन के काफी नजदीक झूल रहा था।
ग्रामीणों ने भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि गांवों में कई जगह बिजली के तार पुराने और जर्जर हो चुके हैं। कई स्थानों पर तार पोल से नीचे झूलते दिखाई देते हैं। बरसात के मौसम में ऐसी स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है, क्योंकि जमीन और आसपास का क्षेत्र गीला रहता है।
किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए अक्सर बिजली के खंभों और तारों के नीचे से गुजरना पड़ता है। खेतों के आसपास बिजली के तारों की ऊंचाई कम होने पर ट्रैक्टर, कृषि उपकरण या पैदल चलने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते मरम्मत और तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर करना बेहद जरूरी होता है।
परिजनों का कहना है कि मृतक परिवार की खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। वह कृषि कार्य के साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी संभालता था। उसकी अचानक मौत से घर के लोगों के सामने भविष्य को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग भी की है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में बिजली विभाग की लापरवाही सामने आती है तो पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही जिस स्थान पर हादसा हुआ है, वहां बिजली व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो।
बरसात के मौसम में बिजली के तारों से जुड़े हादसों का खतरा बढ़ जाता है। तेज हवा और बारिश के कारण कई बार बिजली के तार टूट जाते हैं या नीचे झूलने लगते हैं। ऐसे में बिजली विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि खराब तारों और खंभों की नियमित जांच कर उन्हें समय पर ठीक किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद भी अगर झूलते तार को तत्काल ठीक नहीं किया गया तो भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति की जान खतरे में पड़ सकती है। इसलिए स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से घटनास्थल की जांच कराने और सभी कमजोर तारों को दुरुस्त कराने की मांग की है।
बिजली विभाग की ओर से घटना को लेकर आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी जांच के बाद सामने आएगी। यदि विभागीय स्तर पर लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों या अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रहे हैं।
इस हादसे ने ग्रामीण इलाकों में बिजली के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। बिजली की सुविधा लोगों के लिए जरूरी है, लेकिन अगर तारों और पोल की नियमित देखरेख नहीं की जाए तो यही व्यवस्था जानलेवा बन सकती है। खासकर खेतों और ग्रामीण रास्तों के आसपास लगे बिजली के तारों की ऊंचाई और स्थिति की नियमित निगरानी जरूरी है।
परिवार के लोगों ने बताया कि किसान सामान्य रूप से खेत से काम खत्म कर लौट रहा था। उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि रास्ते में झूलता बिजली का तार उसकी जान ले लेगा। एक सामान्य दिन अचानक परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दुखद दिन बन गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। इसके साथ ही मृतक के परिवार को सरकारी सहायता और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है।
घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। किसान की मौत से उसके परिवार और परिचितों में गहरा दुख है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बिजली विभाग को सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही जर्जर और झूलते तारों की पहचान कर उन्हें ठीक करना चाहिए।
कुल मिलाकर, नालंदा में खेत से लौट रहे किसान की झूलते बिजली तार की चपेट में आने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि किसान का सिर नीचे लटक रहे तार से सट गया था, जिसके बाद उसे करंट लग गया। परिजनों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतक के चाचा ने कहा कि अगर तार को समय रहते ठीक कर दिया जाता तो यह हादसा टल सकता था। पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और क्षेत्र में झूलते बिजली तारों को तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की है।











