SC/ST Compensation: मोदी सरकार बढ़ा सकती है मुआवजा राशि, सामाजिक न्याय मंत्रालय ने भेजा प्रस्ताव

SC/ST Compensation: मोदी सरकार SC/ST अत्याचार मामलों में मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने पर विचार कर रही है। सामाजिक न्याय मंत्रालय ने इस संबंध में प्रस्ताव भेजा

केंद्र सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उत्पीड़न से जुड़े मामलों में मिलने वाली मुआवजा राशि में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। 

नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत मुआवजे में करीब 40 फीसदी तक वृद्धि की जा सकती है। केंद्र सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए मुआवजे की मौजूदा राशि में संशोधन जरूरी हो गया है।

इसके साथ ही सरकार SC/ST (Prevention of Atrocities) Act को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्यों को विशेष आर्थिक सहायता देने पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव में SC/ST के लिए विशेष पुलिस थाने स्थापित करने के लिए राज्यों को एकमुश्त 5 लाख रुपये तक का अनुदान देने की बात सामने आई है।

85 हजार से 8.25 लाख तक मिलता है मुआवजा

वर्तमान व्यवस्था में अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर SC/ST समुदाय के पीड़ितों को 85,000 रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होने के बाद इस राशि में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। प्रस्ताव से जुड़े लोगों के मुताबिक न्यूनतम मुआवजा राशि को बढ़ाकर करीब 1 लाख रुपये किया जा सकता है, जबकि गंभीर मामलों में अधिकतम सहायता 12 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, प्रस्तावित राशि पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

सामाजिक न्याय मंत्रालय ने भेजा प्रस्ताव

मुआवजे में बढ़ोतरी का प्रस्ताव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से तैयार किया गया है। मंत्रालय ने CPI में हुई वृद्धि को इसका प्रमुख आधार माना है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय की व्यय समिति के पास भेजा गया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह लगभग एक दशक बाद मुआवजा राशि में बड़ा संशोधन होगा। इससे पहले 2016 में SC/ST उत्पीड़न के मामलों में मिलने वाली सहायता राशि में बदलाव किया गया था।

SC/ST थानों के लिए राज्यों को मिल सकता है अनुदान

सरकार सिर्फ मुआवजे की राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। SC/ST अत्याचार निवारण कानून को जमीनी स्तर पर मजबूत तरीके से लागू करने के लिए राज्यों में विशेष पुलिस थाने और अदालतों की व्यवस्था को भी बढ़ावा देने की योजना है। प्रस्ताव के तहत ऐसे विशेष थाने स्थापित करने के लिए राज्यों को एक बार 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा सकती है। 

इसके बाद थानों के नियमित संचालन और अन्य खर्च की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी। कानून में SC/ST मामलों के लिए विशेष थाने स्थापित करने का प्रावधान मौजूद है, लेकिन देश के सभी राज्यों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है।

देश में 181 विशेष SC/ST थाने

संसद में उपलब्ध कराए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में कुल 181 विशेष SC/ST पुलिस थाने काम कर रहे हैं। इनमें मध्य प्रदेश में 51, बिहार में 40, कर्नाटक में 33, छत्तीसगढ़ में 27 और झारखंड में 24 विशेष थाने बताए गए हैं। केरल और पुडुचेरी में तीन-तीन ऐसे थाने संचालित हैं। इस आंकड़े से यह भी सामने आता है कि कई ऐसे राज्यों में विशेष पुलिस व्यवस्था का अभाव है, जहां SC/ST समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न के मामले बड़ी संख्या में दर्ज होते हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान का उदाहरण विशेष रूप से चर्चा में रहा है।

संसद की समिति ने जताई थी चिंता

संसद की सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति ने भी राज्यों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंता जाहिर की थी। समिति के अनुसार केंद्र की ओर से सहायता उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कई राज्यों में SC/ST अत्याचार निवारण कानून को लागू करने के लिए पर्याप्त संस्थागत व्यवस्था नहीं बनाई गई है। विशेष थानों और अदालतों की संख्या बढ़ने से मामलों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

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