तेलंगाना के नलगोंडा में स्कूल प्रिंसिपल रूपा रेड्डी की हत्या का पुलिस ने आठ दिन में खुलासा किया। पुलिस ने दो 16 वर्षीय छात्रों को आरोपी बनाया है। जांच में करेंसी नोटों से मिले वित्तीय सुरागों ने कथित तौर पर पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद की।
नलगोंडा: तेलंगाना के नलगोंडा जिले में स्कूल प्रिंसिपल की हत्या के मामले को पुलिस ने आठ दिन के भीतर सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, 48 वर्षीय प्रिंसिपल कल्लू रूपा रेड्डी की हत्या के आरोप में उसी स्कूल में पढ़ने वाले 16 साल के दो छात्रों को पकड़ा गया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि दोनों छात्रों के मन में प्रिंसिपल के प्रति नाराजगी थी और उन्होंने कथित तौर पर पैसे लूटने के इरादे से वारदात को अंजाम दिया। नलगोंडा के पुलिस अधीक्षक शरत चंद्र पवार ने बुधवार को जिला पुलिस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले के खुलासे की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान मिले सुरागों में करेंसी नोट भी महत्वपूर्ण साबित हुए और इन्हीं के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
11 अगस्त को घर में मिली थी प्रिंसिपल की लाश
पुलिस के अनुसार, कोंडामल्लेपल्ली स्थित नागार्जुन ग्रामर कॉन्सेप्ट स्कूल की प्रिंसिपल रूपा रेड्डी 11 अगस्त को अपने घर में मृत मिली थीं। घटना के समय उनके पति राजेंद्र रेड्डी हैदराबाद में थे, जहां वे रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े काम के सिलसिले में रुके हुए थे।
रूपा रेड्डी और उनके पति के कोंडामल्लेपल्ली और हैदराबाद में दो घर हैं। उनका बेटा हैदराबाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। तीन दिन की छुट्टी शुरू होने के कारण परिवार के सदस्य 8 अगस्त को हैदराबाद गए थे। बाद में रूपा रेड्डी 11 अगस्त की सुबह कोंडामल्लेपल्ली लौट आई थीं।
उन्होंने उसी दिन दोपहर में स्कूल में काम किया और शाम को अपने घर वापस आईं। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान दोनों आरोपी छात्र उनके घर के आसपास पहुंच गए थे।
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया को लेकर डांट से नाराज थे छात्र
पुलिस जांच के अनुसार, दोनों आरोपी छात्र उसी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ते थे और हॉस्टल में रहते थे। दोनों नलगोंडा जिले के अलग-अलग गांवों से आते हैं।
पुलिस का कहना है कि रूपा रेड्डी ने दोनों छात्रों को मोबाइल फोन के कथित गलत इस्तेमाल और सोशल मीडिया के जरिए जल्दी पैसा कमाने की कोशिश को लेकर पहले अनुशासित किया था। उन्होंने दोनों के माता-पिता को स्कूल बुलाकर छात्रों को उनके सामने डांटा था।
पुलिस के मुताबिक, इस घटना के बाद दोनों छात्रों के मन में प्रिंसिपल के प्रति नाराजगी बढ़ गई। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों को कथित तौर पर जानकारी थी कि रूपा रेड्डी घर में बड़ी रकम रखती थीं।
पुलिस का दावा है कि वारदात से करीब एक सप्ताह पहले दोनों ने कथित तौर पर प्रिंसिपल की हत्या करने की योजना बनाई थी।
छुट्टी के दिन बनाई गई हत्या की योजना
पुलिस के अनुसार, 11 अगस्त को रूपा रेड्डी के घर लौटने के बाद दोनों आरोपी शाम करीब 4 बजे उनके घर के आसपास पहुंचे। एक छात्र ने कथित तौर पर स्थानीय दुकान से खरीदी हुई हुडी, टी-शर्ट, पैंट और मास्क पहन रखा था।
इसके बाद दोनों ने कोंडामल्लेपल्ली की एक दुकान से कथित तौर पर चाकू और दस्ताने खरीदे। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने वारदात को अंजाम देने के लिए अपनी भूमिका पहले से तय कर रखी थी।
एक छात्र घर के पीछे से रसोई की तरफ पहुंचा, जबकि दूसरा कुछ दूरी पर स्थित पानी की टंकी के पास रुक गया। पुलिस के अनुसार, घर में दाखिल हुए छात्र को रूपा रेड्डी ने देख लिया था। इसके बाद दोनों के बीच कथित तौर पर संघर्ष हुआ।
पुलिस के मुताबिक चाकू से हमला कर लूटे पैसे
पुलिस ने दावा किया कि आरोपी छात्र ने चाकू से रूपा रेड्डी पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, वारदात के दौरान उन पर कई बार चाकू से वार किए गए। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर उनके बेडरूम से करीब 2.50 लाख रुपये लेकर वहां से निकल गए।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में घर और घटनास्थल से मिलने वाले सुरागों के साथ-साथ आसपास की गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
करेंसी नोटों ने खोला जांच का अहम रास्ता
इस हत्याकांड की जांच में करेंसी नोट पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग साबित हुए। पुलिस ने कथित तौर पर लूटी गई रकम से जुड़े नोटों की गतिविधियों और उनसे जुड़े सुरागों पर ध्यान केंद्रित किया।
जांच के दौरान सामने आए वित्तीय सुरागों ने पुलिस को उन लोगों तक पहुंचने में मदद की, जिनके पास घटना के बाद कथित तौर पर रकम पहुंची थी। इसी क्रम में पुलिस ने दोनों नाबालिग छात्रों की भूमिका की जांच की और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों की कथित भूमिका सामने आई। हालांकि, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत में साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
आठ दिन में मामले का खुलासा
पुलिस ने दावा किया कि 11 अगस्त को हुई हत्या का खुलासा आठ दिनों के भीतर कर लिया गया। पुलिस अधीक्षक शरत चंद्र पवार ने जांच टीम के प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि मामले में तकनीकी और अन्य सुरागों को जोड़कर आरोपियों तक पहुंचा गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात की पूरी योजना कैसे बनाई गई और घटना से पहले दोनों छात्रों ने किन-किन गतिविधियों को अंजाम दिया था।
मामले में बरामद सामग्री और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके।
नाबालिग आरोपियों के कारण मामला संवेदनशील
दोनों आरोपी 16 वर्ष के बताए जा रहे हैं। इसलिए मामला किशोर न्याय कानून के तहत संवेदनशील है। पुलिस की जांच के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत होगी।
इस घटना ने स्कूलों में छात्रों के व्यवहार, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर भी चर्चा पैदा कर दी है। हालांकि, पुलिस द्वारा बताए गए हत्या के कारणों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि मामले में अदालत के समक्ष साक्ष्यों की जांच होना बाकी है।
स्कूलों में अनुशासन और डिजिटल व्यवहार पर सवाल
घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि स्कूलों में छात्रों के डिजिटल व्यवहार और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आज छात्रों के जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार व्यवहार की जरूरत भी बढ़ी है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद पैदा हुई कथित नाराजगी और पैसे की लालसा ने गंभीर अपराध का रूप ले लिया। हालांकि, इन दावों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होने वाले साक्ष्यों से ही होगी।
जांच में आगे क्या होगा?
पुलिस अब वारदात से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इसमें हत्या की कथित योजना, घटनास्थल तक दोनों छात्रों के पहुंचने, चाकू और अन्य सामान की खरीद, लूटे गए पैसों की गतिविधि तथा दोनों आरोपियों के बीच कथित संपर्क शामिल हैं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या दोनों छात्रों ने कथित तौर पर अकेले ही वारदात को अंजाम दिया।
नलगोंडा पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि गंभीर अपराधों की जांच में छोटे वित्तीय सुराग भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।









