Zoho में 2026 की सैलरी बढ़ोतरी पर रोक, AI की बढ़ती लागत के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

Zoho ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती लागत के बीच 2026 में सालाना सैलरी बढ़ोतरी रोक दी है। श्रीधर वेम्बू ने बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की बात कही।

Zoho ने बढ़ती AI इंफ्रास्ट्रक्चर लागत और सॉफ्टवेयर बाजार में अनिश्चितता के बीच 2026 में कर्मचारियों की सालाना सैलरी बढ़ोतरी रोक दी है। सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने कहा कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने और खर्च नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।

Tech: सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho ने बढ़ते खर्च और कारोबारी अनिश्चितता के कारण वर्ष 2026 में कर्मचारियों की नियमित वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। कंपनी के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू के अनुसार, सर्वर की कीमतें चार गुना बढ़ने और AI के इस्तेमाल में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ा है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने मार्केटिंग बजट घटाया है और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी से बचने का प्रयास कर रही है।

Zoho में 2026 की सालाना वेतन वृद्धि पर रोक

सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho ने बढ़ती परिचालन लागत के बीच 2026 में कर्मचारियों की नियमित सालाना वेतन वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है। कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने 12 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।

वेम्बू के मुताबिक, सॉफ्टवेयर उद्योग का कारोबारी भविष्य फिलहाल अनिश्चित है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों को कंप्यूटिंग क्षमता, सर्वर और डेटा सेंटर पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं, जिससे AI से जुड़े कामकाज को संचालित करना महंगा हो गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने खर्च पर नियंत्रण रखने के लिए मार्केटिंग बजट कम किया है। कर्मचारियों को नियमित वेतन वृद्धि नहीं मिलने के फैसले की जानकारी देते हुए वेम्बू ने इस स्थिति से बच नहीं पाने पर खेद जताया।

बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि Zoho बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी से बचने के लिए प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, कंपनी ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की कुल संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है।

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, Zoho के दुनियाभर में 19,000 से अधिक कर्मचारी हैं। वेम्बू ने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि कंपनी अपने कारोबारी मॉडल में बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रही है। आने वाले तीन से पांच साल इस बदलाव के परिणाम तय करने में अहम होंगे।

AI आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ कंपनियों को अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ रहा है, जबकि पारंपरिक सॉफ्टवेयर कारोबार के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

वेम्बू ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को भी कारोबारी चुनौतियों में शामिल किया। हालांकि, कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश की बात कही है, लेकिन भविष्य में रोजगार की स्थिति को लेकर कोई निश्चित आश्वासन नहीं दिया गया है।

AI के दौर में टेक कंपनियों पर बढ़ रहा लागत का दबाव

Zoho का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टेक्नोलॉजी उद्योग में AI के कारण कारोबार और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा तेज है। कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रही हैं और साथ ही अपने पारंपरिक सॉफ्टवेयर उत्पादों, सेवाओं तथा खर्च की रणनीतियों की समीक्षा कर रही हैं।

रिपोर्ट में उल्लेखित TrueUp के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक टेक कंपनियों में छंटनी से करीब 1,93,698 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या 2,45,953 से अधिक बताई गई थी। ये आंकड़े संबंधित ट्रैकर के अनुमान हैं और समय के साथ बदल सकते हैं।

अन्य बड़ी टेक कंपनियों ने भी लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाने या पुनर्गठन जैसे कदम उठाए हैं। इनमें Amazon, Oracle, Cognizant और Tata Consultancy Services (TCS) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

भारतीय IT उद्योग पर भी AI के प्रभाव को लेकर चर्चा हो रही है। कंपनियां सेवाओं की कीमत तय करने, ग्राहकों की बदलती जरूरतों और AI आधारित उत्पादकता के अनुरूप अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं।

Zoho के मामले में वेतन वृद्धि रोकने का फैसला बताता है कि AI का बढ़ता इस्तेमाल केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर कंपनियों के बजट, कर्मचारियों के वेतन और भर्ती योजनाओं पर भी पड़ सकता है। कंपनी की आगे की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर लागत और बदलते सॉफ्टवेयर बाजार के बीच अपने कारोबार को किस तरह ढालती है।

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