नरवर किले से 450 साल पुरानी तोप चोरी मामले में नया खुलासा, पांचना बांध विवाद से जुड़ रहा जांच का एंगल|

शिवपुरी के नरवर किले से चोरी हुई 450 साल पुरानी तोप मामले में पुलिस पांचना बांध विवाद के एंगल से जांच कर रही है। राजस्थान से दो आरोपित गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित नरवर किले से चोरी हुई 450 साल पुरानी तोप मामले में पुलिस पांचना बांध विवाद के एंगल से जांच कर रही है। राजस्थान से दो आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नरवर किले से 16वीं शताब्दी की करीब 450 साल पुरानी और 3.5 टन वजनी तोप की चोरी के मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस अब इस संभावना की पड़ताल कर रही है कि इस ऐतिहासिक तोप की चोरी कबाड़ या एंटीक कारोबार के लिए नहीं, बल्कि राजस्थान के लंबे समय से चले आ रहे पांचना बांध विवाद से जुड़े किसी उद्देश्य के लिए की गई थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

450 साल पुरानी तोप चोरी मामले में जांच का नया एंगल

शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से 16वीं शताब्दी की प्राचीन तोप चोरी होने के मामले में पुलिस कई पहलुओं से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में जहां चोरी के पीछे एंटीक तस्करी या कबाड़ कारोबार की आशंका जताई जा रही थी, वहीं अब पांचना बांध विवाद से जुड़े संभावित एंगल की भी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है और सभी संभावित कारणों की पड़ताल की जा रही है।

जांच अधिकारियों के अनुसार चोरी की गई तोप करीब 3.5 टन वजनी है, जिसे किले से हटाना आसान नहीं था। इसी कारण पुलिस का मानना है कि इस घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया होगा।

राजस्थान से दो आरोपित गिरफ्तार

इस मामले में शिवपुरी पुलिस ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमन कुमार मीणा और टिम्मु राम मीणा के रूप में हुई है। दोनों राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड के आधार पर एक बोलेरो पिकअप वाहन को ट्रैक किया, जिसके बाद दोनों आरोपितों तक पहुंच बनाई गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरी घटना में करीब 20 लोगों के शामिल होने की आशंका है। अन्य संदिग्धों की तलाश के लिए राजस्थान में लगातार छापेमारी की जा रही है।

पांचना बांध विवाद से जोड़कर हो रही जांच

पुलिस की जांच में सामने आया है कि तोप चोरी की पहली कोशिश 3 और 4 जुलाई की रात की गई थी। यह समय राजस्थान में पांचना बांध के पानी को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले का था। पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद आरोपित 15 और 16 जुलाई की रात दोबारा आए और तोप चोरी कर ले गए। यह घटना भी पांचना बांध विवाद से जुड़ी एक अहम बैठक से कुछ दिन पहले हुई थी।

इसी क्रम को देखते हुए पुलिस इस संभावना की जांच कर रही है कि कहीं इस चोरी का संबंध नहर के पानी को लेकर चल रहे विवाद से तो नहीं है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

तोप की स्थिति और उद्देश्य की भी हो रही जांच

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चोरी की गई ऐतिहासिक तोप तकनीकी रूप से उपयोग योग्य थी या नहीं। पुलिस यह जानना चाहती है कि आरोपितों का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहर को चोरी करना था या उसके पीछे कोई अन्य योजना थी।

साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपितों ने पहले से किले की रेकी की थी और चोरी के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था। इतनी भारी तोप को किले से बाहर निकालना बिना पूर्व योजना के संभव नहीं माना जा रहा है।

बाकी आरोपितों और तोप की तलाश जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है। उनसे मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। चोरी हुई तोप की बरामदगी के लिए भी कई टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, सभी आरोपितों की गिरफ्तारी और विस्तृत पूछताछ के बाद ही इस पूरे मामले का वास्तविक मकसद सामने आ सकेगा। फिलहाल पुलिस किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही है और पांचना बांध विवाद, ऐतिहासिक धरोहर की तस्करी तथा अन्य संभावित कारणों सहित सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस इस मामले में आधिकारिक रूप से किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।

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