NATO पर टिप्पणी को लेकर ट्रंप घिरे, ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर ने माफी की मांग की

Donald Trump NATO Comment Controversy: नाटो पर टिप्पणी को लेकर ट्रंप घिर गए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ..

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की NATO को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अफगानिस्तान युद्ध के दौरान NATO सहयोगी देशों की सेनाओं के योगदान को “कमतर” बताने वाली ट्रंप की बातों को अपमानजनक और असंवेदनशील करार देते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। 

World News: ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो देशों की सेनाओं को लेकर की गई घिनौनी और अपमानजनक टिप्पणी पर माफी मांगने की अपील की है। स्टार्मर ने कहा कि ट्रंप का यह दावा पूरी तरह झूठा है कि नाटो सेनाएं युद्ध के दौरान फ्रंटलाइन से दूर रहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए ट्रंप को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। 

उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वे इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि जरूरत पड़ने पर नाटो देश अमेरिका की मदद के लिए आगे आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को कभी नाटो की जरूरत नहीं पड़ी और न ही उसने उनसे कुछ मांगा, जबकि नाटो देशों ने अफगानिस्तान में सैनिक भेजे तो सही, लेकिन वे फ्रंटलाइन से कुछ दूरी पर ही रहे।

क्या है पूरा विवाद

हाल ही में स्विट्जरलैंड के दावोस में एक इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें यकीन नहीं है कि NATO कभी जरूरत पड़ने पर अमेरिका की मदद करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अफगानिस्तान में NATO देशों की सेनाएं फ्रंटलाइन से “पीछे” रहीं। ट्रंप के इस बयान ने खासतौर पर ब्रिटेन में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की, जहां अफगानिस्तान युद्ध में बड़ी संख्या में सैनिकों ने सेवा दी और बलिदान दिया।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप की टिप्पणी को “घिनौनी और अपमानजनक” बताते हुए कहा कि यह उन सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति अन्याय है जिन्होंने अफगानिस्तान में अपनी जान गंवाई। उन्होंने अफगानिस्तान में शहीद हुए 457 ब्रिटिश सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी बहादुरी और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। स्टार्मर ने स्पष्ट कहा कि अगर उन्होंने खुद ऐसी टिप्पणी की होती, तो वे बिना देर किए माफी मांगते।

9/11 के बाद ब्रिटेन का योगदान

स्टार्मर ने यह भी याद दिलाया कि 9/11 आतंकी हमलों के बाद ब्रिटेन अमेरिका के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़ा रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने अफगानिस्तान में कई अहम सैन्य अभियानों में प्रमुख भूमिका निभाई, खासकर हेलमंद प्रांत में। 2001 के बाद करीब 1.5 लाख से अधिक ब्रिटिश सैनिकों ने अफगानिस्तान में सेवा दी, जो अमेरिका के बाद सबसे बड़ा योगदान माना जाता है।

ट्रंप की टिप्पणी से न सिर्फ राजनीतिक हलकों में, बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों में भी नाराजगी देखी जा रही है। अफगानिस्तान में तैनात रह चुके पूर्व सैन्य अधिकारियों और शहीदों के परिजनों ने इसे उनके बलिदान का अपमान बताया है। कई पूर्व सैनिकों ने कहा कि NATO सहयोगियों के योगदान को नजरअंदाज करना ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है।

इस विवाद में ट्रंप के अतीत का भी जिक्र हुआ है। आलोचकों ने याद दिलाया कि ट्रंप वियतनाम युद्ध के दौरान ड्राफ्ट से छूट पाने में सफल रहे थे। स्टार्मर समर्थकों का कहना है कि युद्ध सेवा से बचे व्यक्ति द्वारा सहयोगी सेनाओं पर सवाल उठाना और भी ज्यादा विडंबनापूर्ण है।

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