नीरव मोदी बैंक फ्रॉड केस में नया मोड़, ब्रिटेन ने दिल्ली हाई कोर्ट से मांगी मदद, जानिए पूरा मामला

नीरव मोदी बैंक फ्रॉड केस में ब्रिटेन की अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट से औपचारिक सहयोग मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने को कहा सभी पक्षों को नोटिस

नीरव मोदी बैंक फ्रॉड मामले में ब्रिटेन की अदालत ने आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए भारत से मदद मांगी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप को कहा है और सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।

Nirav Modi News: भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एक अहम अंतरराष्ट्रीय मोड़ सामने आया है। ब्रिटेन की अदालत ने इस केस में आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से औपचारिक मदद मांगी है। यह मामला भारत और ब्रिटेन के बीच न्यायिक सहयोग (Judicial Cooperation) का उदाहरण बनता जा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस अपील को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने को कहा है और सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।

बैंक फ्रॉड केस का अंतरराष्ट्रीय दायरा

नीरव मोदी पर भारत में हजारों करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड (Bank Fraud) का आरोप है। यह मामला केवल भारतीय अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन की अदालतों में भी इससे जुड़ी कानूनी कार्यवाही चल रही है। इसी क्रम में बैंक ऑफ इंग्लैंड एंड वेल्स (Bank of England and Wales) की अदालत को बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) के एक अधिकारी का बयान दर्ज करना है।

इस गवाही को कानूनी रूप से मान्य बनाने के लिए ब्रिटेन की अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट को पत्र लिखकर सहयोग मांगा है। यह सहयोग इसलिए जरूरी है क्योंकि संबंधित अधिकारी भारत में तैनात हैं और बिना भारतीय न्यायपालिका व केंद्र सरकार की अनुमति के बयान दर्ज नहीं किया जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट का रुख

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की भूमिका के बिना इस तरह की अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहायता संभव नहीं है। न्यायमूर्ति हरि शंकर की पीठ ने कहा कि यह एक असामान्य स्थिति है, क्योंकि इससे पहले ऐसा उदाहरण सामने नहीं आया, जहां किसी विदेशी अदालत की अपील पर सभी पक्षों को नोटिस दिए बिना कार्रवाई की गई हो।

कोर्ट ने नीरव मोदी समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह की कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत रहे।

ब्रिटेन की अदालत क्यों चाहती है भारतीय मदद

ब्रिटेन की अदालत में चल रहे केस में नीरव मोदी से जुड़े बैंकिंग लेनदेन और कथित धोखाधड़ी की जांच की जा रही है। इस जांच में बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी की गवाही अहम मानी जा रही है, क्योंकि वही अधिकारी संबंधित खातों और लेनदेन से जुड़े तथ्य स्पष्ट कर सकते हैं।

चूंकि यह अधिकारी भारत में हैं, इसलिए उनकी गवाही रिकॉर्ड करने के लिए भारतीय न्यायिक प्रणाली का सहयोग जरूरी है। इसी कारण ब्रिटेन की अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

1970 हेग कन्वेंशन की भूमिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला 1970 के हेग कन्वेंशन (Hague Convention 1970) के तहत सामने आया है। इस कन्वेंशन के अंतर्गत दीवानी और वाणिज्यिक मामलों (Civil and Commercial Matters) में एक देश की अदालत दूसरे देश से सबूत जुटाने के लिए औपचारिक अनुरोध कर सकती है।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) ने इसी कन्वेंशन के तहत ब्रिटेन की अदालत का पत्र दिल्ली हाईकोर्ट को भेजा है। इसका उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए सबूत जुटाने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के मामलों में केंद्र सरकार की अनुमति और सहयोग बेहद जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग केवल अदालतों के स्तर पर नहीं, बल्कि सरकार से सरकार (Government to Government) के बीच तालमेल से ही संभव होता है। कोर्ट ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इस अनुरोध पर किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए और क्या भारत इस मामले में औपचारिक सहयोग देगा।

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