नेपाल में भारी बारिश से तबाही, मुस्तांग में पहाड़ नदी में गिरा; 24 घंटे में 21 मौतें

नेपाल में भारी बारिश से बाढ़ और भूस्खलन का कहर जारी है। मुस्तांग में पहाड़ का हिस्सा नदी में गिरा, जबकि 24 घंटे में 272 हादसों में 21 लोगों की मौत हुई।

नेपाल में भारी बारिश के बीच बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए हैं। मुस्तांग में पहाड़ का बड़ा हिस्सा कालीगंडकी नदी में गिरने से 14 लोगों की मौत हुई। 24 घंटे में देशभर में 272 आपदा संबंधी घटनाएं दर्ज हुईं।

काठमांडू: नेपाल में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। मुस्तांग जिले में रविवार को बारिश के बीच पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर कालीगंडकी नदी में जा गिरा। इस घटना में 14 लोगों की मौत हुई है। घटना के वीडियो में चट्टानों, मिट्टी और मलबे का बड़ा हिस्सा कुछ ही सेकंड में ढलान से नीचे आता दिखाई दे रहा है। भूस्खलन के बाद बड़ी मात्रा में मलबा नदी में जमा हो गया, जिससे कुछ समय के लिए कालीगंडकी नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ। दूसरी ओर, बढ़ते बाढ़ के पानी ने नारायण नदी के किनारे बंधे एक क्रूज शिप को भी बहा दिया। रस्सी टूटने के बाद जहाज करीब 100 मीटर तक नदी के तेज बहाव में बहा और फिर एक पुल के पिलर से टकरा गया।

24 घंटे में 272 आपदा संबंधी घटनाएं

नेपाल में भारी बारिश के कारण स्थिति कई क्षेत्रों में गंभीर बनी हुई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में देश के अलग-अलग जिलों में बाढ़, भूस्खलन और भारी बारिश से जुड़ी 272 घटनाएं दर्ज की गईं।

इन घटनाओं में कुल 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4 लोग लापता हैं। इसके अलावा 26 लोग घायल हुए हैं।

आंकड़ों के अनुसार, इन घटनाओं में सबसे अधिक 97 भूस्खलन की घटनाएं शामिल हैं। भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में 19 लोगों की मौत, 4 लोगों के लापता होने और 4 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि लगातार बारिश के बीच नेपाल के कई पहाड़ी और नदी किनारे वाले इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ का जोखिम बढ़ गया है।

मुस्तांग में पहाड़ का हिस्सा कालीगंडकी नदी में गिरा

मुस्तांग जिले में रविवार को भारी बारिश के दौरान पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूट गया। चट्टानों और मिट्टी का भारी मलबा ढलान से नीचे आया और सीधे कालीगंडकी नदी में जा गिरा।

घटना से जुड़े वायरल वीडियो में मलबे को तेजी से नदी की ओर आते देखा जा सकता है। कुछ ही सेकंड में बड़ी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें नदी के हिस्से में फैल गईं।

इस घटना में 14 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान मिट्टी के कमजोर होने से भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सड़कों, पुलों और नदी किनारे स्थित बस्तियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

बाढ़ में बहा क्रूज शिप, पुल के पिलर से टकराया

भारी बारिश का असर नेपाल की नदियों के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। नारायण नदी में पानी बढ़ने के बाद नदी के किनारे बंधा एक क्रूज शिप अपनी जगह से छूट गया।

बताया गया कि बाढ़ के पानी के दबाव के कारण जहाज को बांधने वाली रस्सी टूट गई। इसके बाद क्रूज शिप लगभग 100 मीटर तक नदी के बहाव के साथ बहता चला गया।

बहते हुए जहाज की टक्कर एक पुल के पिलर से हुई। घटना ने नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के खतरे को सामने ला दिया है। बाढ़ के दौरान नदी किनारे मौजूद बड़े ढांचों, नावों और अन्य जल परिवहन साधनों को भी नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

चितवन में दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर

चितवन जिले में भी रविवार सुबह बाढ़ का खतरा बढ़ गया। यहां नारायणी नदी और रिउ नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया।

देवघाट में नारायणी नदी का जलस्तर 9.23 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 9 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर पहुंच चुका था।

इसी तरह रिउ नदी का जलस्तर 3.92 मीटर तक पहुंच गया। इस नदी के लिए खतरे का निशान 3.8 मीटर निर्धारित है।

नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ का जोखिम बढ़ गया है। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता जरूरी हो गई है।

भारी बारिश से सड़कें भी प्रभावित

चितवन जिले में लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और मिट्टी धंसने की घटनाएं हुई हैं। इसके चलते कई सड़क मार्ग बाधित हुए हैं।

भूस्खलन के कारण सड़कों पर मलबा जमा होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं के कारण सड़क संपर्क टूटने का खतरा भी बना रहता है।

नेपाल के कर्णाली प्रांत में भी भूस्खलन के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। सड़क पर मलबा आने से वाहनों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हुई है।

एक महीने में दूसरी बड़ी बाढ़ की स्थिति

नेपाल करीब एक महीने के भीतर दूसरी बार गंभीर बाढ़ की स्थिति का सामना कर रहा है। इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई थी।

दी गई जानकारी के मुताबिक, उस घटना में 1,453 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए गए हैं।

पिछली बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और पुनर्वास की चुनौतियां बनी हुई थीं। ऐसे समय में दोबारा भारी बारिश और बाढ़ की घटनाओं ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए जोखिम और बढ़ा दिया है।

पहाड़ी इलाकों में बढ़ा भूस्खलन का खतरा

नेपाल का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और पर्वतीय भूभाग में आता है। मानसून के दौरान लंबे समय तक होने वाली भारी बारिश से पहाड़ी ढलानों में मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है।

मुस्तांग में पहाड़ का हिस्सा टूटकर नदी में गिरने और चितवन समेत अन्य इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं इसी जोखिम को दिखाती हैं। लगातार बारिश के दौरान सड़क मार्ग, पुल और नदी किनारे बसे क्षेत्रों पर विशेष सावधानी की जरूरत होती है।

प्रशासन के सामने राहत और बचाव की चुनौती

24 घंटे में 272 आपदा संबंधी घटनाओं के सामने आने के बाद राहत और बचाव एजेंसियों के सामने कई क्षेत्रों में एक साथ काम करने की चुनौती है। भूस्खलन प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने से राहत दलों और जरूरी सामान की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ का जोखिम भी बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को जलस्तर, मौसम और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।

नेपाल में जारी बारिश के बीच मुस्तांग, चितवन और कर्णाली समेत कई क्षेत्रों से सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि बाढ़ और भूस्खलन का खतरा अभी टला नहीं है। राहत और बचाव अभियान के साथ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क और जनसुरक्षा बहाल करना भी बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

Leave a comment