नेपाल-तिब्बत बाढ़: 2,500 लोग लापता, 586 शव बरामद; सैकड़ों भारतीय फंसे, सुरंग में रेस्क्यू के लिए भारत ने भेजी टीम

नेपाल-तिब्बत में भीषण बाढ़ के बाद करीब 2500 से ज्यादा लोग लापता हैं और 586 शव मिल चुके हैं। सैकड़ों भारतीय फंसे हैं। भारत ने राहत और सुरंग बचाव टीम भेजी।

नेपाल-तिब्बत में 26 अगस्त की भीषण बाढ़ के बाद करीब 2,500 लोग लापता हैं और 586 शव बरामद हुए हैं। सैकड़ों भारतीय प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हैं। भारत ने राहत सामग्री, मेडिकल स्टाफ और सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल भेजी है।

काठमांडू: नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे इलाकों में 26 अगस्त को आई अचानक और भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 तक पहुंच गई है, जबकि अब तक 586 शव बरामद किए जा चुके हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और प्रभावित इलाकों में सुरक्षाकर्मी, चिकित्सा दल तथा विशेषज्ञ टीमें तैनात की गई हैं।

आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों के साथ नेपाल-चीन सीमा से जुड़े क्षेत्रों में देखने को मिला है। तेज पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, रेत, बजरी और बड़े पत्थर लेकर आया, जिससे सड़कें, पुल और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था टूटने के कारण बचाव दलों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत के सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में मौजूद कई भारतीय नागरिकों को लेकर अभी चिंता बनी हुई है। स्रोत में बताया गया है कि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक नेपाल और तिब्बत के प्रभावित इलाकों में फंसे हुए हैं। वहीं, चीन की तरफ भारत-नेपाल सीमा के पास फंसे कुछ भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर काठमांडू पहुंचाया गया है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार को 53 भारतीय नागरिक काठमांडू पहुंचे। इनमें महाराष्ट्र के 37 लोग भी शामिल थे, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय तिब्बत में फंस गए थे। महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, करीब 395 नागरिक उस समय भी फंसे हुए थे। इनमें से 325 लोगों से संपर्क हो चुका था और उन्हें सुरक्षित बताया गया।

इससे पहले भारत और नेपाल के संयुक्त राहत अभियान के तहत 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जबकि त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 मजदूरों को भी सुरक्षित निकाला गया है।

सुरंग में फंसे लोगों के लिए भारत की विशेष टीम

बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चिंताओं में से एक जलविद्युत परियोजना के इलाके में सुरंग में लोगों के फंसे होने की आशंका है। इसी को देखते हुए भारत ने विशेष बचाव दल नेपाल भेजा है। भारतीय टीम का उद्देश्य सुरंग में फंसे लोगों की स्थिति का आकलन करना और स्थानीय बचाव एजेंसियों के साथ मिलकर उन्हें बाहर निकालने में सहायता करना है।

भारतीय वायुसेना के तीसरे विमान से 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम नेपाल पहुंची। टीम में डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मचारी और सुरंग बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, भारतीय दल मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान में सहायता कर रहा है।

भारत ने नेपाल को केवल मानव संसाधन ही नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में आपातकालीन राहत सामग्री भी भेजी है। अब तक 57.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। शुक्रवार रात 10 टन राहत सामग्री की एक और खेप काठमांडू पहुंची। इसके साथ 11 सदस्यीय डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की टीम भी भेजी गई।

नेपाल में पुल बहने से संपर्क व्यवस्था प्रभावित

बाढ़ की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में बड़ी संख्या में पुल बह गए हैं। पुलों के टूटने से लोगों और वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में सहायता मांगी है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन पुलों की जरूरत का आकलन राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। भारत ने भी जरूरत पड़ने पर बेली ब्रिज सहित हर जरूरी सहायता देने की बात कही है।

भूस्खलन से बनी दो झीलों ने बढ़ाई चिंता

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन के कारण दो नई झीलें बनने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों की नजर इन दोनों जलाशयों पर बनी हुई है, क्योंकि इनमें से एक से पानी बाहर निकल रहा है, जबकि दूसरी झील में लगातार जलस्तर बढ़ रहा है।

दोनों झीलें नेपाल-चीन सीमा के पास उस क्षेत्र में बनी हैं, जहां बुधवार को भीषण बाढ़ आई थी। बाढ़ का पानी अपने साथ मलबा और बड़ी चट्टानें लेकर नीचे की ओर बहा था। अधिकारियों को आशंका है कि यदि दूसरी झील का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो इससे दोबारा बाढ़ या भूस्खलन का खतरा पैदा हो सकता है।

स्थिति पर नजर रखने के लिए फिलहाल सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निचले इलाकों में कैमरे और सेंसर लगाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि पानी के स्तर में अचानक होने वाले बदलाव का तुरंत पता लगाया जा सके।

चीन और नेपाल में भी राहत अभियान जारी

आपदा के बाद नेपाल और चीन दोनों तरफ बचाव अभियान चलाया जा रहा है। चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की आधिकारिक संख्या सात हो गई है और 554 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल को शोक संदेश भेजकर आपदा में जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि चीन लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह को संदेश भेजा है।

हजारों सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे

नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया है। करीब 13,295 सुरक्षाकर्मियों को रेस्क्यू और राहत कार्यों में लगाया गया है। इनमें नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं। सरकार के अनुसार, अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

बचाव अभियान में हेलिकॉप्टरों के जरिए एयरलिफ्ट, प्रभावित गांवों को खाली कराना, मलबे में खोज अभियान और घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है। ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों और दुर्गम स्थानों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हवाई अभियान को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

लापता लोगों की तलाश बनी सबसे बड़ी चुनौती

आपदा के बाद सबसे बड़ी चुनौती हजारों लापता लोगों का पता लगाना है। नेपाल में अलग-अलग एजेंसियों की ओर से मौत और लापता लोगों के अलग-अलग आंकड़े सामने आने की वजह से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राहत एवं बचाव अभियान जारी होने के कारण आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।

तिब्बत में स्थिति और अधिक जटिल है, क्योंकि प्रभावित इलाकों तक बाहरी पहुंच सीमित है। ऐसे में वहां हुए नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन बना हुआ है। अधिकारियों और राहत एजेंसियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचेंगे, स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

बाढ़ के बाद फिर आपदा का खतरा

नेपाल-तिब्बत सीमा पर बनी भूस्खलन की झीलों ने राहत एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। यदि किसी झील का बांधनुमा हिस्सा टूटता है या जलस्तर अचानक बढ़ता है, तो नीचे की ओर बसे क्षेत्रों में तेज पानी पहुंच सकता है। इसी खतरे को देखते हुए अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है और राहत कार्यों को सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस बीच भारत, नेपाल और चीन की एजेंसियां प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी राहत पहुंचाने में जुटी हैं। भारत की मेडिकल और सुरंग बचाव टीम की तैनाती से उन स्थानों पर राहत अभियान को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जहां स्थानीय स्तर पर पहुंचना मुश्किल है।

नेपाल और तिब्बत में आई यह आपदा हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और तेज जलप्रवाह के गंभीर खतरे को सामने लाती है। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, फंसे नागरिकों का सुरक्षित रेस्क्यू, घायलों को इलाज और प्रभावित इलाकों में संपर्क व्यवस्था बहाल करना है।

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