इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की अफवाह सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। सरकार ने इसे फेक न्यूज़ बताया। एक वीडियो में कथित ‘छठी उंगली’ दिखने के बाद AI वीडियो को लेकर इंटरनेट पर नई बहस शुरू हो गई।
World News: इज़रायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को सोशल मीडिया पर उस समय हलचल मच गई जब इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या से जुड़ी खबरें तेजी से वायरल होने लगीं। कई पोस्ट में दावा किया गया कि नेतन्याहू को मार दिया गया है और इज़रायल की सरकार इस जानकारी को छिपा रही है। इन अफवाहों के फैलते ही लोगों के बीच भ्रम और चर्चा तेज हो गई।
हालांकि इज़रायल सरकार ने इन सभी दावों को तुरंत खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO ने साफ कहा कि यह पूरी तरह फेक न्यूज़ है और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बावजूद इंटरनेट पर बहस खत्म नहीं हुई और एक वीडियो को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी सफाई
तुर्की की अनादोलू एजेंसी ने जब इस मामले पर सवाल पूछा तो नेतन्याहू के कार्यालय ने स्पष्ट जवाब दिया। पीएमओ की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। प्रधानमंत्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने सरकारी कामकाज में व्यस्त हैं।
सरकार की इस प्रतिक्रिया के बाद भी सोशल मीडिया पर अफवाहें थमने का नाम नहीं ले रही थीं। कई यूज़र्स ने नेतन्याहू के हालिया वीडियो को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए और दावा किया कि वीडियो में कुछ अजीब चीजें दिखाई दे रही हैं।
वीडियो में दिखी ‘छठी उंगली’ ने बढ़ाया सस्पेंस
दरअसल हाल ही में बेंजामिन नेतन्याहू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इज़रायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर अपनी बात रखते हुए दिखाई दे रहे थे।
वीडियो सामने आने के कुछ ही समय बाद कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने दावा किया कि जब नेतन्याहू भाषण के दौरान अपना दायां हाथ उठाते हैं तो उनके हाथ में छह उंगलियां दिखाई देती हैं। वीडियो के करीब 35वें सेकंड पर छोटी उंगली के पास मांस का एक अतिरिक्त हिस्सा दिखाई देता है।
कुछ यूज़र्स ने इसे छठी उंगली बताते हुए कहा कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से बने वीडियो में होने वाली सामान्य गलती हो सकती है। इस तरह की गलती को कई लोग “AI फिंगर ग्लिच” कहते हैं जो अक्सर AI से बनी तस्वीरों या वीडियो में देखने को मिलती है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह वीडियो असली है या फिर इसे AI तकनीक की मदद से बनाया गया है।
अमेरिकी कंजर्वेटिव कमेंटेटर कैंडिस ओवेन्स ने भी इस मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाए। उन्होंने नेतन्याहू को उनके निकनेम “बीबी” से संबोधित करते हुए लिखा कि आखिर बीबी कहां हैं और उनका कार्यालय AI से बना वीडियो क्यों जारी कर रहा है।

उन्होंने यह भी पूछा कि अगर वीडियो असली है तो फिर उसे पोस्ट करने के बाद डिलीट क्यों किया गया। उनके इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर कई तरह की अटकलें लगने लगीं।
वीडियो के बैकग्राउंड पर भी उठे सवाल
कुछ यूज़र्स ने वीडियो के बैकग्राउंड में दिखाई दे रही चीजों पर भी सवाल उठाए। कई लोगों का कहना था कि वीडियो में पर्दे लगातार हिलते हुए दिखाई दे रहे हैं जबकि पीछे लगे इज़रायल के दो झंडे लगभग स्थिर नजर आ रहे हैं।
कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि पर्दा पूरे वीडियो में एक ही तरह से हिल रहा है, जैसे कि वह किसी लूप में चल रहा हो। उनके अनुसार यह भी इस बात का संकेत हो सकता है कि वीडियो को एडिट किया गया है या फिर यह पूरी तरह डिजिटल तरीके से बनाया गया है।
हालांकि कई अन्य यूज़र्स ने इन दावों को गलत बताया। उनका कहना था कि आजकल कई सरकारी वीडियो और न्यूज़ ब्रॉडकास्ट में वर्चुअल बैकग्राउंड का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से कभी-कभी वीडियो में ऐसी विसंगतियां दिखाई दे सकती हैं।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच फैली अफवाहें
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इज़रायल, अमेरिका और ईरान के बीच हाल के दिनों में टकराव काफी तेज हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इस ऑपरेशन के बाद क्षेत्र की स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच खुला टकराव देखने को मिला।
बताया जा रहा है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़रायल और उसके कुछ सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
ईरान का आरोप और बढ़ता संघर्ष
ईरान का आरोप है कि कुछ पड़ोसी देश अमेरिकी सेना को अपने यहां सैन्य ठिकाने उपलब्ध करा रहे हैं। इसी वजह से ईरान ने उन क्षेत्रों को भी निशाना बनाया जहां उसे अमेरिकी सैन्य गतिविधियां दिखाई दीं। इस टकराव के कारण पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद होने से बढ़ी चिंता
तनाव के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है।
आमतौर पर इस रास्ते से हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। इसके अलावा वैश्विक LNG व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा भी इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई है।











