निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते समय कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। व्रत की शुद्धता बनाए रखने के लिए सात प्रमुख नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु निर्जल उपवास रखते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत के दौरान कुछ ऐसे कार्य हैं जिनसे बचना आवश्यक माना गया है, ताकि व्रत की पवित्रता बनी रहे और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
निर्जला एकादशी पर किन बातों का रखें विशेष ध्यान

निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु निर्जल व्रत रखकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है, जिससे व्रत की मर्यादा बनी रहती है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है।
निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष स्थान है। इसे वर्ष की सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।
किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
धार्मिक परंपराओं के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य कारणों से निर्जल व्रत नहीं रख सकता, तो उसे अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करना चाहिए। इस दिन चावल और अन्य अनाज के सेवन से भी बचने की परंपरा है। साथ ही मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह दिन सात्विक जीवनशैली और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है।
इसी प्रकार निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना भी उचित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता है कि पूजा के लिए आवश्यक तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेने चाहिए। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। इसलिए क्रोध करना, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या विवाद में पड़ना धार्मिक दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता।
वस्त्रों के चयन को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचने और पीले, सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि ये रंग सकारात्मकता, शुद्धता और भगवान विष्णु की आराधना से जुड़े हुए हैं।
श्रद्धा और संयम के साथ करें पूजा
निर्जला एकादशी केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, भक्ति और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने का भी अवसर माना जाता है। यदि किसी कारण से व्रत रखना संभव न हो, तो भी प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, सच्ची आस्था और सदाचार के साथ किया गया पूजन ही सबसे अधिक फलदायी माना जाता है। वहीं स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर निर्जल उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना भी आवश्यक है, ताकि धार्मिक आस्था और स्वास्थ्य दोनों का संतुलन बना रहे।









