नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता दलदल में फंसे रहे, मगर मदद नहीं आई और उनकी मौत हो गई। उसी समय प्रयागराज में तालाब में विमान गिरा, ग्रामीणों ने तुरंत कूदकर पायलटों को बचाया। इंसानियत अब भी गांव में जिंदा है।
Uttar Pradesh: 16 जनवरी की रात नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता ग्रांड विटारा कार से गुरुग्राम से लौट रहे थे। अचानक घने कोहरे और खराब सड़क की वजह से कार कंट्रोल खो बैठी और पानी भरे दलदल में जा गिरी। युवराज दो घंटे तक पानी में फंसे रहे। वह मदद के लिए चिल्लाते, रोते और गुहार लगाते रहे।
लेकिन वहां मौजूद आम लोग, पुलिस और आपात सेवा अधिकारी किसी भी तरह से मदद के लिए आगे नहीं आए। दो घंटे तक संघर्ष करने के बाद, युवराज की जान चली गई। इस घटना ने शहर में इंसानियत पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया। लोग केवल देखते रहे और कोई भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं था।
ग्रामीणों ने बचाई जान

इसके कुछ ही दिनों बाद 22 जनवरी को प्रयागराज के एक गांव में एक ट्रेनी एयरक्राफ्ट तालाब में जा गिरा। विमान में दो पायलट फंसे हुए थे। तालाब के पास पहुंचे ग्रामीणों ने तुरंत किसी से मदद की उम्मीद किए बिना तालाब में कूदकर पायलटों को बाहर निकाला। उन्होंने उन्हें सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया।
इस घटना ने साफ कर दिया कि गांव के लोग साहस और इंसानियत में आगे हैं। प्रशासन या सरकारी मदद का इंतजार करने की बजाय ग्रामीण खुद जोखिम उठाकर दूसरों की जान बचाते हैं।
गांव में इंसानियत का फर्क
नोएडा और प्रयागराज की ये दो घटनाएं शहर और गांव के लोगों के व्यवहार में फर्क दिखाती हैं। शहर में लोग अक्सर खुद की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं और जोखिम उठाने से डरते हैं। वहीं गांव में लोग बिना देरी किए दूसरों की मदद के लिए आगे बढ़ जाते हैं।
विशेषकर ग्रामीण इलाके में जोखिम उठाने की हिम्मत और इंसानियत जिंदा रहती है। यदि नोएडा का हादसा किसी गांव में हुआ होता, तो शायद इंजीनियर की जान बच जाती।










