नोएडा हिंडन डूब क्षेत्र में बिजली चोरी का पहला केस अवैध कनेक्शन से करोड़ों की वसूली का आरोप

नोएडा हिंडन डूब क्षेत्र में बिजली चोरी का पहला केस दर्ज हुआ। 3 जेई, TG-2 और 6 लाइनमैन समेत 23 नामजद हैं। अवैध कनेक्शन से करोड़ों की वसूली का आरोप।
नोएडा हिंडन डूब क्षेत्र में बिजली चोरी का पहला केस अवैध कनेक्शन से करोड़ों की वसूली का आरोप
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नोएडा के हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनधिकृत गतिविधियों को लेकर कार्रवाई का दायरा अब बिजली व्यवस्था तक पहुंच गया है। इस इलाके में बिजली चोरी से जुड़ा पहला मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में बिजली विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों समेत कुल 23 लोगों को नामजद किया गया है। नामजद लोगों में तीन जूनियर इंजीनियर यानी जेई, एक टीजी-2 कर्मचारी और छह लाइनमैन भी शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि हिंडन डूब क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर बनाए गए अवैध ठिकानों और निर्माणों तक बिजली पहुंचाने के लिए अनधिकृत कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा था और इस पूरी व्यवस्था के जरिए लंबे समय से बड़ी रकम की वसूली की जा रही थी।

हिंडन नदी के डूब क्षेत्र को लेकर नोएडा में लंबे समय से अवैध निर्माण, जमीन पर कब्जे और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों का मुद्दा सामने आता रहा है। हाल ही में नोएडा प्राधिकरण ने भी हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बड़ी जमीन को कब्जामुक्त कराया है। इससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन और प्राधिकरण की नजर अब इस पूरे क्षेत्र में चल रही अनधिकृत गतिविधियों पर है।

बिजली चोरी के इस मामले ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि सामान्य तौर पर किसी क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली कनेक्शन दिए जाने के लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क की भूमिका की जांच की जाती है। इस मामले में विभागीय कर्मचारियों के नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा केवल बिजली चोरी करने वालों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि कथित अवैध कनेक्शनों को किस स्तर पर मंजूरी, सुविधा या संरक्षण मिला और लंबे समय तक यह व्यवस्था कैसे चलती रही।

बताया जा रहा है कि हिंडन डूब क्षेत्र में कई ऐसे निर्माण और आवासीय गतिविधियां सामने आती रही हैं, जिन पर वैधता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराना अपने आप में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन जाता है। अगर किसी निर्माण या परिसर की वैधता संदिग्ध है और वहां बाकायदा बिजली का कनेक्शन संचालित हो रहा है, तो जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि कनेक्शन किस दस्तावेज के आधार पर दिया गया और संबंधित अधिकारियों ने स्थल का सत्यापन किस तरह किया था।

इस मामले में तीन जेई के नाम शामिल होना भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जूनियर इंजीनियर का काम बिजली व्यवस्था से जुड़े तकनीकी निरीक्षण और स्थानीय स्तर की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण होता है। इसी तरह टीजी-2 और लाइनमैन स्तर के कर्मचारियों की भूमिका भी कनेक्शन, लाइन और मीटर से जुड़े कामों में सामने आ सकती है। इसलिए पुलिस या संबंधित विभाग की जांच में यह देखा जा सकता है कि नामजद कर्मचारियों ने कथित तौर पर किस तरह की भूमिका निभाई और किन इलाकों या उपभोक्ताओं से उनका संपर्क था।

मामले में छह लाइनमैन के नाम सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि बड़े पैमाने पर अवैध कनेक्शन चल रहे थे तो उन्हें नियमित निरीक्षण के दौरान क्यों नहीं पकड़ा गया। बिजली चोरी के मामलों में आमतौर पर लाइन से छेड़छाड़, मीटर में गड़बड़ी, सीधे तार जोड़कर बिजली लेने या स्वीकृत कनेक्शन से अलग तरीके से बिजली इस्तेमाल करने जैसी स्थितियों की जांच की जाती है। हिंडन डूब क्षेत्र के इस मामले में भी कथित कनेक्शनों की तकनीकी जांच और उनसे जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

सबसे गंभीर आरोप अवैध कनेक्शनों के जरिए करोड़ों रुपये की वसूली से जुड़ा है। इस तरह के आरोप की वास्तविकता का निर्धारण जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि कितने कनेक्शन दिए गए, कितने परिसरों तक बिजली पहुंची, कितने समय तक यह व्यवस्था चली और कथित रूप से कितनी रकम की वसूली हुई। यदि बड़ी संख्या में कनेक्शन पाए जाते हैं तो प्रत्येक कनेक्शन की अलग-अलग जांच भी की जा सकती है।

इस पूरे मामले में बिजली विभाग के रिकॉर्ड की जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी। कनेक्शन आवेदन, उपभोक्ता संख्या, मीटर का विवरण, लोड, कनेक्शन की तारीख, निरीक्षण रिपोर्ट और बिलिंग रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित परिसरों को बिजली किस आधार पर दी गई थी। इसके साथ ही यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है कि जिन स्थानों पर बिजली कनेक्शन दिए गए, वहां मौजूद निर्माण वैध थे या नहीं।

हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण का मुद्दा पहले से प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में रहा है। हाल की कार्रवाई में नोएडा प्राधिकरण ने करीब 27,800 वर्गमीटर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की जानकारी दी है और दोबारा अवैध निर्माण होने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। ऐसे में बिजली चोरी का मामला सामने आने से डूब क्षेत्र में चल रही गतिविधियों की निगरानी और कड़ी होने की संभावना है।

मामले में 23 लोगों के नाम सामने आने से यह जांच केवल बिजली चोरी तक सीमित नहीं रह सकती। अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी कर्मचारी ने जानबूझकर नियमों को दरकिनार करते हुए अवैध कनेक्शन उपलब्ध कराया, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई अलग से हो सकती है। वहीं जिन लोगों ने कथित रूप से बिजली चोरी की या अवैध कनेक्शन का इस्तेमाल किया, उनकी भूमिका भी अलग से निर्धारित की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद उन लोगों में भी चिंता बढ़ सकती है, जिन्होंने हिंडन डूब क्षेत्र में जमीन या निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में निवेश किया है। डूब क्षेत्र में किसी निर्माण की वैधता केवल बिजली कनेक्शन होने से साबित नहीं होती। संबंधित निर्माण के लिए भूमि उपयोग, निर्माण अनुमति और अन्य जरूरी स्वीकृतियों की स्थिति अलग से देखी जाती है। इसलिए बिजली कनेक्शन मिलने को वैध निर्माण की अंतिम पुष्टि मानना उचित नहीं होगा।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना होगी कि कथित अवैध बिजली कनेक्शनों का नेटवर्क कितना बड़ा था। यदि एक स्थान पर इस तरह के कनेक्शन पाए गए हैं तो आसपास के इलाकों में भी निरीक्षण किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मामला किसी एक इलाके या कुछ परिसरों तक सीमित था या फिर डूब क्षेत्र के कई हिस्सों में इसी तरह की व्यवस्था चल रही थी।

जांच के दौरान बिजली चोरी से हुए संभावित राजस्व नुकसान का आकलन भी किया जा सकता है। इसके लिए कनेक्शन की अवधि, अनुमानित बिजली खपत और लागू दरों के आधार पर विभागीय स्तर पर गणना की जाती है। यदि किसी उपभोक्ता या परिसर ने निर्धारित क्षमता से अधिक बिजली का इस्तेमाल किया है तो उस पहलू की भी जांच की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा पहलू यह भी है कि हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और बिजली चोरी की जांच अब एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई दे रही है। किसी भी अनधिकृत बस्ती या निर्माण क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के स्रोत की जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि वह क्षेत्र किस तरह विकसित हुआ और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड में उसकी क्या स्थिति दर्ज है।

मामले में नामजद किए गए कर्मचारियों के खिलाफ आरोप अभी जांच का विषय हैं। केवल एफआईआर में नाम दर्ज होने से किसी व्यक्ति पर आरोप साबित नहीं हो जाता। पुलिस और संबंधित विभाग को उपलब्ध दस्तावेजों, बिजली कनेक्शन के रिकॉर्ड, तकनीकी निरीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका निर्धारित करनी होगी। इसी आधार पर आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय होगी।

हिंडन डूब क्षेत्र में हाल की प्राधिकरण कार्रवाई के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण को लेकर सख्ती का संकेत दिया है। अब बिजली चोरी के मामले ने इस क्षेत्र की निगरानी को एक और नया आयाम दे दिया है। यदि जांच में बड़े पैमाने पर अनधिकृत कनेक्शन या विभागीय मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं तो आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं तथा अन्य क्षेत्रों में भी जांच बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल इस मामले में पुलिस और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अवैध कनेक्शन का नेटवर्क कितना बड़ा था, कितनी रकम की वसूली हुई और नामजद 23 लोगों में से किन-किन की भूमिका किस स्तर तक थी।

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