अरुणाचल के कृषि मंत्री गैब्रियल वांगसू ने पूर्वोत्तर के लिए स्थानीय और किसान-केंद्रित कृषि तकनीक विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने AI, ड्रोन, IoT, स्मार्ट सिंचाई और रिमोट सेंसिंग को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की जरूरत बताई।
निरजुली: अरुणाचल प्रदेश के कृषि एवं संबद्ध विभागों के मंत्री गैब्रियल डी. वांगसू ने पूर्वोत्तर भारत के लिए ऐसी कृषि तकनीक विकसित करने पर जोर दिया है, जो स्थानीय किसानों की वास्तविक जरूरतों और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि कृषि तकनीक की सफलता केवल उसकी आधुनिकता या जटिलता से नहीं, बल्कि इस बात से तय होनी चाहिए कि वह खेत में किसानों के लिए कितनी उपयोगी, किफायती और आसानी से उपलब्ध है।
वांगसू ने यह बात नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NERIST), निरजुली में EARITA 2026 के समापन समारोह में कही। दो दिवसीय सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, सेंसर, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकों पर चर्चा हुई।
बड़े और मशीनीकृत खेतों के मॉडल पूर्वोत्तर में सीधे लागू नहीं
वांगसू ने कहा कि पूर्वोत्तर के कृषि क्षेत्र की परिस्थितियां देश के उन हिस्सों से अलग हैं, जहां बड़े भूखंडों और व्यापक मशीनीकरण के आधार पर कृषि मॉडल विकसित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में छोटे जोत वाले किसान, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्र और पारंपरिक खेती की पद्धतियां मौजूद हैं।
ऐसे में बाहर विकसित तकनीकी मॉडल को बिना स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदले लागू करना प्रभावी नहीं हो सकता। मंत्री ने किफायती, अनुकूलनीय और किसानों के लिए उपयोग में आसान तकनीक विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर को केवल कृषि तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय अपनी भौगोलिक, जलवायु और कृषि परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
AI, ड्रोन और IoT से कृषि में बदलाव की संभावना
EARITA 2026 में कृषि क्षेत्र में तकनीक के विभिन्न उपयोगों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, छात्रों, नवाचारकर्ताओं और अन्य विशेषज्ञों ने AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेंसर, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी संभावनाओं पर विचार किया।
वांगसू ने कहा कि इन तकनीकों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब इन्हें प्रयोगशालाओं और शोध परियोजनाओं से निकालकर किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने शोध संस्थानों से वास्तविक परिस्थितियों में तकनीकों का परीक्षण करने और किसानों से सीधे फीडबैक लेने का आह्वान किया।
उनके अनुसार, किसानों को केवल किसी नई तकनीक के बारे में बताया जाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें तकनीक को देखना, समझना और उसका इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि वे यह भी बता सकें कि उसमें किस तरह सुधार किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन से कृषि पर बढ़ रही चुनौतियां
कृषि नवाचार के साथ जलवायु और पर्यावरणीय चुनौतियों को जोड़ते हुए वांगसू ने कहा कि पूर्वोत्तर में बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों का सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ रहा है।
उन्होंने ग्लेशियरों के पीछे हटने, मिट्टी के कटाव और बारिश के बदलते पैटर्न जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। इन बदलावों का संबंध जल सुरक्षा, मिट्टी की गुणवत्ता, कृषि उत्पादकता और खेती की दीर्घकालिक स्थिरता से है।
मंत्री ने ऐसे समाधान विकसित करने की जरूरत बताई जो सीमित जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद कर सकें। उन्होंने स्मार्ट सिंचाई, रिमोट सेंसिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित जल प्रबंधन प्रणालियों को इस दिशा में उपयोगी तकनीकों के रूप में रेखांकित किया।
किसानों की मेहनत और जोखिम कम करने पर जोर
वांगसू ने कृषि में मशीनीकरण को केवल उत्पादन बढ़ाने के नजरिये से देखने के बजाय किसानों की मेहनत और कार्यस्थल की सुरक्षा से जोड़ने की बात कही।
उन्होंने कहा कि कृषि तकनीक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों के शारीरिक श्रम और कठिन परिस्थितियों में काम करने की परेशानी को कम करना होना चाहिए। खेती को सुरक्षित और सम्मानजनक पेशा बनाने में उपयुक्त मशीनरी और तकनीकी उपकरणों की भूमिका हो सकती है।
विशेष रूप से पहाड़ी और कठिन भूभाग वाले पूर्वोत्तर में ऐसी तकनीक की जरूरत है जिसे छोटे खेतों और स्थानीय परिस्थितियों में व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल किया जा सके।
डिजिटल डिवाइड से बचाने के लिए कम बैंडविड्थ वाली तकनीक
मंत्री ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल डिवाइड की चुनौती को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI आधारित तकनीकों का फायदा केवल बड़े किसानों या बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
छोटे किसानों के लिए कम बैंडविड्थ पर काम करने वाले समाधान और एज-AI जैसी तकनीकें विकसित करने की आवश्यकता बताई गई। इससे उन इलाकों में भी डिजिटल कृषि उपकरणों का इस्तेमाल संभव हो सकता है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है।

वांगसू ने मशीन-विजन आधारित ग्रेडिंग, उत्पाद की शेल्फ-लाइफ का अनुमान लगाने वाली तकनीक और बेहतर ड्राइंग तकनीकों जैसी संभावनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसी तकनीकें फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने में मदद कर सकती हैं।
किसान सिर्फ उत्पादक नहीं, उद्यमी भी बनें
वांगसू ने कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता को भी तकनीकी विकास से जोड़ने की बात कही। उनका कहना है कि भविष्य के किसान की भूमिका केवल कृषि उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, भंडारण और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से किसान अपने उत्पादों को अधिक मूल्य वाले बाजारों तक पहुंचा सकते हैं। इससे किसानों के लिए प्रोसेसर, उद्यमी और वैल्यू क्रिएटर के रूप में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं।
यह दृष्टिकोण विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हो सकता है जहां परिवहन, बाजार तक पहुंच और भंडारण जैसी चुनौतियों के कारण किसानों को अपने उत्पादों का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संयोजन पर जोर
वांगसू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के लिए कृषि का भविष्य स्थानीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के संयोजन में देखा जाना चाहिए।
पूर्वोत्तर में अलग-अलग समुदायों के बीच लंबे समय से चली आ रही कृषि परंपराएं और स्थानीय परिस्थितियों की समझ मौजूद है। मंत्री ने संकेत दिया कि आधुनिक तकनीक विकसित करते समय इस स्थानीय ज्ञान और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने युवा शोधकर्ताओं और छात्रों को भी कृषि को नवाचार के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया। AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेंसर, डेटा, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में शोध और उद्यमिता की संभावनाओं पर उन्होंने जोर दिया।
प्रयोगशाला से खेत तक तकनीक पहुंचाने की अपील
मंत्री ने NERIST और अन्य शोध संस्थानों से आग्रह किया कि EARITA 2026 में सामने आए विचार केवल सम्मेलन, शोध पत्र या प्रोटोटाइप तक सीमित न रहें।
उन्होंने वास्तविक खेतों में तकनीक का परीक्षण, प्रदर्शन और उपयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इसके लिए शोध संस्थानों, उद्योग, कृषि विभाग और किसानों के बीच सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।
वांगसू ने कहा कि किसानों को नई तकनीक के विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि तकनीक को वास्तविक जरूरतों के आधार पर बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने NERIST की बहुविषयक विशेषज्ञता का उल्लेख करते हुए पूर्वोत्तर के लिए उपयुक्त कृषि तकनीक विकसित और परीक्षण करने में संस्थान की संभावित भूमिका को रेखांकित किया।
NERIST में विशेषज्ञों की मौजूदगी
EARITA 2026 के समापन समारोह में NERIST के निदेशक प्रोफेसर नरेंद्रनाथ एस. सहित वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और छात्र मौजूद रहे। सम्मेलन का आयोजन NERIST के कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने किया था।
दो दिवसीय आयोजन का मुख्य फोकस कृषि में AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेंसर, IoT और अन्य डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर रहा। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि तकनीकी नवाचार को स्थानीय कृषि परिस्थितियों और किसानों की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ना जरूरी है।
पूर्वोत्तर के लिए स्थानीय और किसान-केंद्रित कृषि तकनीक विकसित करने की वांगसू की अपील ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, कठिन भूगोल, छोटे कृषि जोत और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियों के बीच कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए तकनीकी समाधानों पर जोर बढ़ रहा है। इस दिशा में शोध को खेतों तक पहुंचाना और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करना आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।











