ममता बनर्जी को बाहर करो, हम INDIA गठबंधन में आ जाएंगे'; ऋतब्रत गुट ने रखी शर्त, TMC विधायक ने किया पलटवार

ऋतब्रत बनर्जी समर्थक गुट ने ममता बनर्जी को INDIA गठबंधन से बाहर करने पर साथ आने की बात कही। TMC विधायक कुणाल घोष ने बयान पर पलटवार किया।
ममता बनर्जी को बाहर करो, हम INDIA गठबंधन में आ जाएंगे'; ऋतब्रत गुट ने रखी शर्त, TMC विधायक ने किया पलटवार
Photo Credit / Attribution: Google

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच INDIA गठबंधन को लेकर भी एक नया राजनीतिक बयान सामने आया है। ऋतब्रत बनर्जी समर्थक धड़े ने INDIA गठबंधन में शामिल होने को लेकर एक शर्त रखी है। गणतांत्रिक तृणमूल यानी डीटीसी के नेता और विधानसभा में विपक्ष के सचेतक अखरुज्जमान ने कहा है कि यदि कांग्रेस ममता बनर्जी को INDIA गठबंधन से बाहर कर देती है, तो उनका गुट इस गठबंधन में शामिल होने पर विचार कर सकता है। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में पहले से जारी तृणमूल के अंदरूनी विवाद और विपक्षी दलों के बीच संबंधों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

अखरुज्जमान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस दो प्रमुख धड़ों में बंटी हुई है। एक तरफ ममता बनर्जी समर्थित गुट है, जबकि दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी धड़ा अपने को पार्टी की वास्तविक राजनीतिक संरचना का प्रतिनिधि बताता रहा है। दोनों पक्षों के बीच संगठन, नेतृत्व और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद चल चुका है। सितंबर में चुनाव आयोग के समक्ष दोनों धड़ों ने वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न पेश किए थे।

ऋतब्रत समर्थक धड़े की ओर से INDIA गठबंधन को लेकर दिया गया बयान सीधे तौर पर ममता बनर्जी के साथ गठबंधन के सवाल से जुड़ा है। अखरुज्जमान ने ममता बनर्जी की भाजपा विरोधी राजनीति को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि ममता का राजनीतिक अतीत भाजपा के साथ समर्थन के उदाहरणों से जुड़ा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में ममता INDIA गठबंधन में हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर फिर एनडीए का समर्थन कर सकती हैं। ये आरोप अखरुज्जमान की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें ऋतब्रत गुट के राजनीतिक रुख के तौर पर देखा जाना चाहिए।

अखरुज्जमान ने इसी आधार पर कांग्रेस के सामने शर्त रखी कि अगर ममता बनर्जी को INDIA गठबंधन से अलग किया जाता है तो उनका गुट गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो सकता है। इस बयान का मतलब यह है कि ऋतब्रत समर्थक धड़ा विपक्षी गठबंधन के साथ अपने संबंधों को ममता बनर्जी से अलग करके देख रहा है। हालांकि यह बयान किसी औपचारिक गठबंधन समझौते की घोषणा नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक शर्त और प्रस्ताव के रूप में सामने आया है।

इस बयान पर ममता समर्थक तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। ममता-तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने अखरुज्जमान के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और इसी संघर्ष के कारण अखरुज्जमान तथा उनके समर्थक विधायक बन सके। कुणाल घोष ने ऋतब्रत गुट पर भी सवाल उठाते हुए उसे भाजपा समर्थित विरोधी धड़ा बताया। यह आरोप भी कुणाल घोष की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद पिछले कई महीनों से राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी और खुद को पार्टी की मूल राजनीतिक पहचान से जोड़ने की कोशिश की। दूसरी तरफ ममता समर्थक गुट ने बागी धड़े के दावों को स्वीकार नहीं किया।

दोनों धड़ों के बीच विवाद का असर चुनावी राजनीति पर भी दिखाई दिया है। सितंबर में चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न मांगे थे। ऋतब्रत बनर्जी समर्थक गुट ने 'राष्ट्रवादी तृणमूल कांग्रेस' और 'लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस' जैसे नाम प्रस्तावित किए थे। वहीं ममता समर्थक गुट ने अपने अलग नामों और प्रतीकों की सूची आयोग को दी थी।

चुनाव आयोग से जुड़ा यह विवाद केवल नाम और चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दोनों धड़ों के बीच संगठन पर नियंत्रण के सवाल को भी महत्वपूर्ण बना दिया। आयोग ने मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतरिम स्थिति में दोनों पक्षों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी और उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम तथा चिह्न आवंटित किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ममता समर्थक धड़े को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न मिला, जबकि ऋतब्रत बनर्जी समर्थक धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न दिया गया।

बंगाल की मौजूदा राजनीति में INDIA गठबंधन का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के बीच संबंध पहले से ही जटिल रहे हैं। अक्टूबर में होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों और रणनीति पर अलग-अलग रुख सामने आया। दोनों पक्षों ने कुछ मामलों में बातचीत और रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की, लेकिन कई मुद्दों पर अलग-अलग चुनाव लड़ने की स्थिति भी बनी रही।

नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे हैं। कांग्रेस ने दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित किए, जबकि ममता समर्थक तृणमूल गुट ने भी उम्मीदवार मैदान में उतारे। दूसरी ओर ऋतब्रत समर्थक धड़े ने भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखी। ऐसे में बंगाल में विपक्षी राजनीति के भीतर एकजुटता और अलग-अलग धड़ों की रणनीति को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में अखरुज्जमान का INDIA गठबंधन को लेकर दिया गया बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक यह किसी औपचारिक गठबंधन में शामिल होने की घोषणा नहीं है। उन्होंने केवल यह कहा है कि यदि ममता बनर्जी को गठबंधन से बाहर किया जाता है तो उनका गुट INDIA गठबंधन में शामिल हो सकता है। यानी फिलहाल यह एक सशर्त राजनीतिक प्रस्ताव है, न कि गठबंधन में शामिल होने का अंतिम फैसला।

इस घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी की INDIA गठबंधन में मौजूदगी को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं। 1 अक्टूबर को INDIA गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी की भागीदारी की रिपोर्ट सामने आई थी। बैठक में विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ राजनीतिक एकजुटता सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। ऐसे में ऋतब्रत गुट की ओर से ममता को गठबंधन से बाहर करने की शर्त रखना मौजूदा विपक्षी समीकरणों के भीतर एक अलग राजनीतिक रुख को सामने लाता है।

इसी बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी ममता बनर्जी को कांग्रेस में वापस आने का सार्वजनिक न्योता दिया है। उन्होंने ममता बनर्जी और तृणमूल के विधायकों-सांसदों के साथ कांग्रेस में लौटने की बात कही। ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। चौधरी के प्रस्ताव पर तृणमूल सांसद सौगत राय ने कहा कि तृणमूल एक अलग राजनीतिक दल है और यदि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आता है तो उस पर पार्टी में चर्चा की जा सकती है।

इन बयानों से साफ है कि पश्चिम बंगाल में विपक्षी राजनीति के समीकरणों को लेकर कई स्तरों पर बातचीत और दावे चल रहे हैं। एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी समर्थक धड़ा संगठन और राजनीतिक प्रभाव को लेकर अपनी अलग स्थिति पेश कर रहा है। कांग्रेस भी बंगाल में अपने राजनीतिक समीकरणों को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत करती दिखाई दे रही है।

ऋतब्रत गुट की ओर से रखी गई शर्त आने वाले दिनों में बंगाल की विपक्षी राजनीति में चर्चा का विषय बनी रह सकती है। हालांकि इसका वास्तविक राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस और अन्य INDIA गठबंधन दल इस प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और तृणमूल कांग्रेस के दोनों धड़ों के बीच संगठनात्मक विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल अखरुज्जमान का बयान एक सशर्त प्रस्ताव के रूप में सामने आया है, जबकि ममता समर्थक तृणमूल की ओर से इसे खारिज करते हुए पलटवार किया गया है।

Leave a comment