पुडुचेरी की एनआर कांग्रेस ने तमिलनाडु में विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व में पार्टी 2029 लोकसभा चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने, नए नेताओं को जोड़ने और राज्य में राजनीतिक आधार बढ़ाने की रणनीति बना रही है।
चेन्नई: पुडुचेरी की सत्तारूढ़ ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) ने पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली पार्टी अब केंद्र शासित प्रदेश से बाहर अपना संगठन खड़ा करने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी का यह विस्तार अभियान 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, एनआर कांग्रेस लंबे समय से पुडुचेरी की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही है, लेकिन अब पार्टी तमिलनाडु में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए संगठन निर्माण, नए नेताओं को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
तमिलनाडु में नए नेताओं से संपर्क अभियान
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एनआर कांग्रेस नेतृत्व ने तमिलनाडु में अलग इकाई शुरू करने का सैद्धांतिक फैसला कर लिया है। आने वाले महीनों में संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रभावशाली चेहरों से संपर्क कर रहे हैं।
इसी कड़ी में पीएमके के संस्थापक डॉ. एस. रामदास की बेटी और पूर्व पीएमके कार्यकारी अध्यक्ष गांधीमति पारासुरमन ने पुडुचेरी में मुख्यमंत्री एन. रंगासामी से मुलाकात की। इस दौरान उनके बेटे और पूर्व पीएमके यूथ विंग अध्यक्ष मुगुंदन पारासुरमन भी मौजूद रहे।
हालांकि इस मुलाकात को औपचारिक तौर पर शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे एनआर कांग्रेस के तमिलनाडु विस्तार अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तमिलनाडु के कई राजनीतिक चेहरे एनआर कांग्रेस के साथ जुड़ने में रुचि दिखा रहे हैं।
पीएमके और कांग्रेस के नेताओं की बढ़ती दिलचस्पी
एनआर कांग्रेस के विस्तार अभियान के तहत कई दलों के नेताओं से बातचीत चल रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि पीएमके, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के कुछ नेता और पदाधिकारी एनआर कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। इससे पहले पूर्व पीएमके विधायक अरुल मुरुगन और उनके समर्थकों ने भी पुडुचेरी में मुख्यमंत्री रंगासामी से मुलाकात की थी। यह बैठक एक निजी होटल में हुई थी, जिसमें पूर्व मंत्री के. लक्ष्मीनारायणन भी शामिल हुए थे। बैठक में तमिलनाडु में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और ऐसे नेताओं की पहचान करने पर चर्चा हुई, जो राज्य में एनआर कांग्रेस के विस्तार की जिम्मेदारी संभाल सकें।
चेन्नई में बड़े कार्यक्रम से शुरुआत
तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने के लिए एनआर कांग्रेस 9 अगस्त को चेन्नई के तेनामपेट स्थित कामराजर अरंगम में एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करेगी। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस मंच से पार्टी तमिलनाडु के लिए अपनी राजनीतिक सोच और भविष्य की रणनीति का संकेत दे सकती है। हालांकि पार्टी की तमिलनाडु इकाई का औपचारिक गठन बाद में किए जाने की संभावना है, लेकिन यह कार्यक्रम राज्य में एनआर कांग्रेस के विस्तार अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
रंगासामी की छवि को बनाया जाएगा आधार
एनआर कांग्रेस के नेता मानते हैं कि एन. रंगासामी की प्रशासनिक छवि पार्टी के विस्तार अभियान का मुख्य आधार होगी। रंगासामी पांच बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनकी राजनीति को पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज के विचारों से जोड़कर पेश किया जाता है। पार्टी की रणनीति है कि तमिलनाडु में कामराज की विरासत और रंगासामी के शासन मॉडल को केंद्र में रखकर लोगों तक पहुंच बनाई जाए। कांग्रेस, डीएमके, एआईएडीएमके और अन्य क्षेत्रीय दलों के मजबूत राजनीतिक आधार वाले तमिलनाडु में एनआर कांग्रेस के लिए नई जगह बनाना बड़ी चुनौती होगी।
2029 लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जमीन तैयार करने की कवायद
तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश कर एनआर कांग्रेस दक्षिण भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में मजबूत संगठन तैयार करना है। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी राज्य में अपना जनाधार विकसित करना चाहती है। इसके लिए स्थानीय नेताओं को जोड़ने, कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने और जनता के बीच अपनी पहचान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एनआर कांग्रेस का तमिलनाडु विस्तार दक्षिण भारतीय राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। हालांकि पार्टी के सामने संगठन निर्माण और मजबूत क्षेत्रीय दलों के बीच अपनी जगह बनाने की चुनौती रहेगी।










