देश के कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से हालात बिगड़े हैं। ओडिशा में 312 छात्र स्कूल में फंसे हैं। यूपी के 20 शहर जलभराव से प्रभावित हैं। हिमाचल में मानसून के दौरान 187 लोगों की मौत हो चुकी है।
भुवनेश्वर: देश के कई हिस्सों में मानसून ने एक बार फिर गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। ओडिशा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़, जलभराव और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में 312 स्कूली छात्र और 10 शिक्षक पिछले दो दिनों से बाढ़ के पानी के बीच स्कूल की इमारत में फंसे हुए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के 20 शहरों में तेज बारिश के कारण सड़कें और रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों से मरने वालों की संख्या 187 पहुंच गई है।
ओडिशा में स्कूल की इमारत में फंसे 312 छात्र
केंद्रपाड़ा जिले के कुलसाही गांव स्थित सरकारी एससी-एसटी आवासीय आश्रम स्कूल में ब्राह्मणी नदी का पानी घुसने के बाद स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़ के कारण स्कूल का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब गया है, जबकि पूरी इमारत करीब 10 फीट गहरे पानी से घिरी हुई है।
स्कूल में मौजूद 312 छात्रों और 10 शिक्षकों को सुरक्षा के लिहाज से पहली मंजिल पर पहुंचाया गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सभी छात्र फिलहाल सुरक्षित हैं। हालांकि, तेज बहाव के कारण राहत और बचाव दल के लिए स्कूल तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है। पानी का बहाव इतना तेज है कि नावों के जरिए भी वहां पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
स्कूल प्रशासन ने छात्रों और शिक्षकों के लिए करीब एक सप्ताह तक भोजन की व्यवस्था की है। इसके बावजूद लंबे समय तक राहत दल के नहीं पहुंचने से अभिभावकों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। प्रशासन की प्राथमिकता छात्रों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचना और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराना है।
ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ का संकट
केंद्रपाड़ा के अलावा बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जिलों में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बैतरणी, ब्राह्मणी, सालंदी, जलका और बुधबलंगा नदियों में जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में पानी फैल गया है।
बाढ़ का असर सड़क और परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा है। केंद्रपाड़ा में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 का करीब 100 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर धंस गया है। यह मार्ग पारादीप पोर्ट को जाजपुर से जोड़ता है। सड़क के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ है और प्रशासन के सामने राहत कार्य तेजी से पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश के 20 शहरों में भारी बारिश
उत्तर प्रदेश में भी सोमवार को कई इलाकों में तेज और रुक-रुककर बारिश जारी रही। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत करीब 20 शहरों में जलभराव की स्थिति सामने आई है। राज्य के सभी 75 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 46 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
कानपुर और उन्नाव में 500 से अधिक घरों में बारिश और बाढ़ का पानी घुसने की जानकारी सामने आई है। कई निचले इलाकों में सड़कों पर पानी भरने के कारण सामान्य यातायात प्रभावित हुआ। कुछ स्थानों पर लोगों को आवाजाही के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा।
संभल में सरकारी अस्पताल के बाहर भी करीब एक फीट पानी जमा हो गया। इससे मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राजधानी लखनऊ में भी तेज बारिश के बाद कई सड़कें और गलियां जलमग्न हो गईं।
बिहार में सभी जिलों के लिए बारिश और आंधी का अलर्ट
बिहार में मौसम विभाग ने सोमवार को सभी जिलों में बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। राज्य के 19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और बाकी 19 जिलों में यलो अलर्ट बताया गया है। इस दौरान हवा की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
पिछले 24 घंटे में ज्यादातर इलाकों में मौसम सामान्य रहा, लेकिन पटना, गया और समस्तीपुर में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान रहे। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी मानसून सक्रिय
मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिर तेज हुई हैं। सोमवार को 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सीधी, मऊगंज और डिंडौरी में कुछ स्थानों पर अगले 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

भोपाल और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 17 से 19 अगस्त के बीच तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। वहीं छत्तीसगढ़ में भी मानसून सक्रिय है। अगले तीन दिनों तक उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश जारी रहने का अनुमान है। रायपुर में देर रात से हुई तेज बारिश के कारण सुंदर नगर और महादेवघाट रोड समेत कई इलाकों में जलभराव हुआ।
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भी बारिश की संभावना
राजस्थान में सोमवार को कई इलाकों में बादल छाए रहने की संभावना है, जबकि 18 अगस्त से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। आठ जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटे में चित्तौड़गढ़ में 31 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो राज्य में सबसे अधिक रही।
पंजाब और चंडीगढ़ में भी 17 और 18 अगस्त को कुछ इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी है। अमृतसर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि चंडीगढ़ में अब तक सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हरियाणा में पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
उत्तराखंड में देहरादून और टिहरी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के अन्य जिलों में यलो अलर्ट है। नैनीताल में 30.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में भारी बारिश के कारण सड़क का एक हिस्सा नदी में बह गया, जिससे स्थानीय आवागमन प्रभावित हुआ।
हिमाचल प्रदेश में मानसून से 187 मौतें
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश, बाढ़, भूस्खलन, डूबने, बिजली गिरने और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण भारी नुकसान हुआ है। 30 जून से 16 अगस्त के बीच राज्य में कुल 187 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
इनमें 79 मौतें प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी घटनाओं में हुईं, जबकि 107 लोगों की जान सड़क हादसों में गई। इस अवधि में 294 लोग घायल हुए हैं और 31 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राज्य में मानसून से संबंधित कुल आर्थिक नुकसान करीब 973 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
दिल्ली और कोलकाता में भी मौसम का असर
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में अभी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। शहर में मिस्ट सिस्टम बना हुआ है, जिसके कारण वातावरण प्रभावित है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को भारी बारिश हुई और सोमवार के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार 18 अगस्त को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमालय से सटे पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड में भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। 19 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में यलो अलर्ट जारी रहेगा।
देशभर में लगातार सक्रिय मानसून के बीच प्रशासन के सामने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज करने की चुनौती है। नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।











