ओडिशा बाढ़: 96 सर्पदंश के मामले दर्ज, त्वरित इलाज और एंटी-स्नेक वेनम से टली जनहानि

ओडिशा में बाढ़ के बीच 96 सर्पदंश के मामले सामने आए, लेकिन समय पर इलाज और एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होने से कोई मौत नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने राहत कार्य तेज किए।

ओडिशा में बाढ़ के बीच अब तक 96 सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की त्वरित चिकित्सा व्यवस्था, एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता और मेडिकल टीमों की सक्रियता के कारण किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है।

भुवनेश्वर: ओडिशा में जारी बाढ़ ने जहां हजारों लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, वहीं अब सर्पदंश के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई बाढ़ प्रभावित जिलों में पानी भरने के कारण सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर निकल रहे हैं। इसी वजह से अब तक 96 सर्पदंश के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि समय पर चिकित्सा सुविधा, प्रशिक्षित मेडिकल टीमों की तैनाती और पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होने के कारण अब तक किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे त्वरित चिकित्सा व्यवस्था की बड़ी सफलता बताया है।

स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. बसंत प्रधान ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मेडिकल टीमें लगातार गांवों और राहत शिविरों का दौरा कर रही हैं ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सर्पदंश के मरीजों को तत्काल प्राथमिक उपचार और जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम दिया जा रहा है। यही कारण है कि गंभीर मामलों में भी जान बचाने में सफलता मिली है।

बाढ़ में क्यों बढ़ते हैं सर्पदंश के मामले?

विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के दौरान सांपों के बिल पानी से भर जाते हैं। ऐसे में वे सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश में घरों, खेतों, सड़कों और राहत शिविरों के आसपास पहुंच जाते हैं। पानी में चलने या मलबा हटाने के दौरान लोगों का सामना सांपों से होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह खतरा और अधिक रहता है क्योंकि वहां खेत, झाड़ियां और जलभराव वाले इलाके अधिक होते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से पानी में उतरते समय सावधानी बरतने और रात के समय टॉर्च का उपयोग करने की अपील की है।

गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

बाढ़ के दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित न होने देने के लिए प्रशासन ने विशेष अभियान चलाया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक 481 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

इनमें से 332 महिलाओं की सफल प्रसूति कराई जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूति सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी हैं। इससे बाढ़ के बीच भी माताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी।

डायरिया के मामलों पर भी नजर

सर्पदंश के अलावा बाढ़ के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अब तक 195 डायरिया के मामले सामने आए हैं। सभी मरीजों का इलाज उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जा रहा है और अधिकांश मरीजों की हालत स्थिर है।

अधिकारियों का कहना है कि दूषित पानी और खराब स्वच्छता व्यवस्था के कारण बाढ़ के बाद डायरिया, हैजा और अन्य संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए राहत शिविरों और प्रभावित गांवों में साफ पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

21 हजार से अधिक लोगों को मिली स्वास्थ्य सेवाएं

बाढ़ प्रभावित जिलों में लगाए गए मेडिकल कैंप और आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से अब तक 21,334 लोगों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। इन शिविरों में सामान्य स्वास्थ्य जांच, दवाइयों का वितरण, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच और आपातकालीन उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मेडिकल कैंप तब तक जारी रहेंगे, जब तक प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती।

दवाइयों और एंटी-स्नेक वेनम का पर्याप्त भंडार

संभावित स्वास्थ्य संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडार पहले से तैयार रखा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रभावित जिलों में ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस), एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी), एंटीबायोटिक दवाएं और अन्य जरूरी दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मरीज को उपचार के लिए दवा की कमी का सामना न करना पड़े।

राहत और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार नजर

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मेडिकल टीमें, एंबुलेंस सेवाएं और राहत कर्मी प्रभावित इलाकों में चौबीसों घंटे सक्रिय हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि जलस्तर बढ़ता है या स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियां सामने आती हैं तो अतिरिक्त मेडिकल टीमों और संसाधनों को भी तुरंत तैनात किया जाएगा।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी से चलें, रात के समय बिना रोशनी के बाहर न निकलें, किसी भी सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें और सर्पदंश होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। साथ ही केवल स्वच्छ पानी का सेवन करें और डायरिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लें।

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