ओडिशा में बाढ़ का कहर: 6 जिलों के 1,381 गांव प्रभावित, 9.4 लाख लोग संकट में; CM ने घोषित की 1,000 करोड़ की मदद

ओडिशा में बाढ़ से 6 जिलों के 1,381 गांव प्रभावित हुए हैं। करीब 9.4 लाख लोग संकट में हैं। CM मोहन माझी ने 1,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की।

ओडिशा में बाढ़ से छह जिलों के 1,381 गांव और करीब 9.4 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राहत के लिए 1,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है। NDRF और ODRAF टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं।

भुवनेश्वर: ओडिशा में लगातार जारी बाढ़ ने राज्य के छह जिलों में व्यापक असर डाला है। करीब 9.4 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्थिति की समीक्षा के बाद प्रभावित लोगों और किसानों के लिए 1,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है।

छह जिलों में बाढ़ से भारी नुकसान

ओडिशा में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को राज्य में बाढ़ की स्थिति और उससे हुए नुकसान की समीक्षा की। समीक्षा के बाद उन्होंने बताया कि राज्य के छह जिलों के 74 ब्लॉक और 1,381 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में करीब 9.4 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं।

राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित आबादी तक राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत केंद्रों में उनके रहने तथा भोजन की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने 1,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का किया ऐलान

भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रभावित लोगों के लिए 1,000 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की। सरकार का कहना है कि इस पैकेज का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित परिवारों, किसानों, मछुआरों, पशुपालकों और अन्य लोगों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

राहत पैकेज के तहत प्रभावित परिवारों को मुफ्त चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। जिन किसानों की फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें कृषि इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। धान और अन्य फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा किसानों को बीज से जुड़ी सहायता देने की योजना भी बनाई गई है। बाढ़ के कारण खेती को हुए नुकसान को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए मुफ्त सब्जी किट उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया है, ताकि वे पानी उतरने के बाद दोबारा खेती शुरू कर सकें।

नाव, मछली पकड़ने के सामान और पशुधन के लिए भी मदद

बाढ़ का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में मछुआरों की नाव और मछली पकड़ने के जाल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकार ने ऐसे लोगों को भी सहायता देने की घोषणा की है। बाढ़ में पशुधन को हुए नुकसान के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी राहत का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने क्षतिग्रस्त हैंडलूम उपकरणों को दोबारा खरीदने के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।

बाढ़ प्रभावित परिवारों के घरेलू सामान को हुए नुकसान को भी राहत पैकेज में शामिल किया गया है। क्षतिग्रस्त बर्तनों, कपड़ों और घरेलू उपयोग के चावल के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ उनके सामान्य जीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है।

जाजपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल

बाढ़ से प्रभावित जिलों में जाजपुर की स्थिति बेहद गंभीर बताई गई है। जिले के 10 ब्लॉक और 270 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 2.8 लाख लोग इससे प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए 77,680 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

जाजपुर में प्रभावित लोगों के लिए 203 राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए लोगों को भोजन, रहने की जगह और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रही हैं।

भद्रक में भी लाखों लोग प्रभावित

भद्रक जिले में भी बाढ़ का व्यापक असर देखा गया है। यहां चार ब्लॉक और 149 गांव प्रभावित हुए हैं। करीब 2.59 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन ने एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

भद्रक में प्रभावित आबादी के लिए 90 राहत केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में विस्थापित लोगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

बालासोर, क्योंझर और अन्य जिलों में भी असर

बाढ़ का असर जाजपुर और भद्रक के अलावा बालासोर, क्योंझर, मयूरभंज और केंद्रापड़ा जिलों में भी पड़ा है। इन इलाकों में कई गांवों और निचले क्षेत्रों में पानी भरने के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ राहत सामग्री की आपूर्ति पर भी ध्यान केंद्रित किया है। बाढ़ के कारण सड़क संपर्क और स्थानीय परिवहन प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

राहत और बचाव अभियान में NDRF और ODRAF की तैनाती

राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन बलों को तैनात किया है। छह प्रभावित जिलों में 45 ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स यानी ODRAF टीमों और आठ NDRF टीमों को लगाया गया है।

इसके अलावा अग्निशमन सेवा के जवान भी बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। टीमों को प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने, सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार का फोकस राहत के साथ पुनर्वास पर

ओडिशा सरकार के सामने अब तत्काल राहत के साथ-साथ बाढ़ के बाद पुनर्वास और नुकसान का आकलन करने की चुनौती भी है। फसल, पशुधन, नाव, मछली पकड़ने के जाल, घरेलू सामान और छोटे व्यवसायों को हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित लोगों को सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने और राहत कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से घोषित 1,000 करोड़ रुपये का पैकेज बाढ़ प्रभावित आबादी को तत्काल आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोबारा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान जारी रखना है। राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में नुकसान के विस्तृत आकलन के आधार पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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