तमिलनाडु में NEET विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस ने AIADMK-BJP पर साधा निशाना

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष माणिक्कम टैगोर ने NEET को लेकर AIADMK और BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा ने राज्य के छात्रों पर दबाव बढ़ाया है।

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष माणिक्कम टैगोर ने NEET को लेकर AIADMK और BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा ने राज्य के छात्रों पर दबाव बढ़ाया है। उन्होंने पलानीस्वामी से BJP के सामने तमिलनाडु को NEET से छूट दिलाने की चुनौती दी।

चेन्नई: तमिलनाडु में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष माणिक्कम टैगोर ने AIADMK और BJP पर राज्य के छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि NEET को लेकर मौजूदा संकट की जिम्मेदारी से दोनों दल बच नहीं सकते।

माणिक्कम टैगोर ने पलानीस्वामी पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता माणिक्कम टैगोर ने AIADMK महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी तमिलनाडु में NEET लागू होने के इतिहास की जिम्मेदारी से बचने के लिए कांग्रेस पर आरोप लगा रही है। टैगोर ने सोशल मीडिया मंच X पर अपने बयान में कहा कि तमिलनाडु विधानसभा में मंत्री राजेश कुमार ने NEET से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की है।

टैगोर के मुताबिक, तमिलनाडु में NEET को लेकर मौजूदा स्थिति को समझने के लिए वर्ष 2017 के घटनाक्रम पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के जीवित रहने के दौरान राज्य में NEET लागू नहीं हुआ था। उनके अनुसार, जयललिता के निधन के बाद पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में राज्य में यह परीक्षा लागू हुई।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि AIADMK सरकार ने केंद्र की BJP नेतृत्व वाली सरकार के साथ तालमेल के कारण NEET को तमिलनाडु में जगह दी। उन्होंने कहा कि इसके बाद बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों के सामने मेडिकल शिक्षा की राह कठिन हुई, जो पारंपरिक राज्य-स्तरीय प्रवेश व्यवस्था पर निर्भर थे।

कांग्रेस ने AIADMK पर लगाया राजनीतिक जिम्मेदारी से बचने का आरोप

टैगोर ने कहा कि NEET पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने से AIADMK के कार्यकाल से जुड़े सवाल खत्म नहीं हो जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि AIADMK अब अपने राजनीतिक इतिहास से जुड़े इस मुद्दे को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर शिक्षा संबंधी नीतियों की वकालत करती रही है। उन्होंने NEET को लेकर तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही आपत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षा व्यवस्था को विद्यार्थियों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।

टैगोर ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जूते व्यक्ति के पैरों के अनुसार बनाए जाने चाहिए, न कि पैरों को जूते के आकार में ढालने की कोशिश की जानी चाहिए। उनके मुताबिक यही सिद्धांत शिक्षा और प्रवेश व्यवस्था पर भी लागू होता है।

BJP और NTA पर भी कांग्रेस का हमला

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने NEET के संचालन में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की BJP सरकार ने परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी NTA को देकर ऐसी व्यवस्था बनाई, जिसमें कोचिंग संस्थानों का प्रभाव बढ़ा है।

टैगोर ने NEET से संबंधित पेपर लीक, कथित भ्रष्टाचार और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त मानसिक तथा आर्थिक दबाव डाला है।

हालांकि, NEET और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए आरोपों पर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें रही हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के आरोपों को संबंधित पक्षों के रुख के साथ देखा जाना जरूरी है।

मेडिकल छात्रों की मौत का मुद्दा भी उठाया

टैगोर ने अपने बयान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर तमिलनाडु में लंबे समय से चल रहे विरोध का उल्लेख करते हुए छात्रा एस. अनिता समेत उन विद्यार्थियों की मौत का मुद्दा भी उठाया, जिनकी मौत के लिए NEET से जुड़ा दबाव जिम्मेदार होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि NEET व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ता है, क्योंकि महंगी कोचिंग और अतिरिक्त तैयारी की जरूरत उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि इन चिंताओं के बावजूद NEET व्यवस्था का बचाव किया जाता रहा है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए राज्यों की परिस्थितियों और उनकी मांगों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

राहुल गांधी के वादे का किया जिक्र

माणिक्कम टैगोर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस राजनीतिक आश्वासन का भी उल्लेख किया, जिसमें कांग्रेस की सरकार बनने पर NEET से छूट चाहने वाले राज्यों को राहत देने की बात कही गई है।

टैगोर ने AIADMK नेता पलानीस्वामी से सवाल किया कि क्या वह अपने BJP सहयोगी से तमिलनाडु को NEET से छूट देने की प्रतिबद्धता दिला सकते हैं। उन्होंने पलानीस्वामी से यह भी पूछा कि क्या AIADMK BJP के दबाव से अलग होकर राज्य के छात्रों के हित में स्पष्ट रुख अपना सकती है।

कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु में NEET को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। राज्य की राजनीति में मेडिकल प्रवेश परीक्षा लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रही है।

तमिलनाडु में NEET क्यों बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा?

NEET भारत में मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षा है। तमिलनाडु में इस परीक्षा का विरोध मुख्य रूप से इस आधार पर किया जाता रहा है कि राज्य की अपनी स्कूली शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों को राष्ट्रीय स्तर की एक समान प्रवेश परीक्षा से पूरी तरह नहीं आंका जा सकता।

विरोध करने वाले राजनीतिक दलों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को कोचिंग आधारित प्रतिस्पर्धा में नुकसान हो सकता है। वहीं NEET के समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय स्तर की एक समान परीक्षा मेडिकल प्रवेश में समान मानदंड और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करती है।

तमिलनाडु सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से समय-समय पर केंद्र से राज्य को NEET से छूट देने की मांग की जाती रही है। यही वजह है कि परीक्षा केवल शिक्षा का विषय नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा बन चुकी है।

AIADMK-BJP गठबंधन पर कांग्रेस का हमला

टैगोर ने अपने बयान में AIADMK और BJP के राजनीतिक गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने पलानीस्वामी को चुनौती देते हुए पूछा कि यदि AIADMK वास्तव में तमिलनाडु के विद्यार्थियों के हित में NEET का विरोध करती है, तो उसे केंद्र सरकार के सामने इस मुद्दे पर स्पष्ट और स्वतंत्र रुख अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के छात्रों के लिए NEET से जुड़े सवाल का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और ठोस फैसलों से होना चाहिए।

दूसरी ओर, NEET को लेकर AIADMK और BJP का रुख कांग्रेस के आरोपों से अलग रहा है। इसलिए टैगोर के बयान को तमिलनाडु में जारी व्यापक राजनीतिक बहस के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव

NEET को लेकर तमिलनाडु में कांग्रेस, DMK, AIADMK और BJP के बीच राजनीतिक खींचतान आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक ओर राज्य में परीक्षा से छूट की मांग उठती रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है।

माणिक्कम टैगोर के ताजा बयान ने इस बहस को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस ने जहां AIADMK और BJP पर छात्रों के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया है, वहीं NEET समर्थक पक्ष राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मेडिकल प्रवेश व्यवस्था को जरूरी मानता है। अब इस मुद्दे पर तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले दिनों में और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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