ओडिशा सरकार जल्द ही सभी रजिस्ट्रेशन कार्यालयों में AI आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम लागू करेगी। इससे दलालों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और भूमि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य भ्रष्टाचार खत्म करना और व्यवस्था को डिजिटल बनाना है।
भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार राज्य के सभी रजिस्ट्री (Registration) कार्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम लागू करने जा रही है। इस नई तकनीक से लैस निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और बिचौलियों (middlemen) की गतिविधियों पर रोक लगाना है।
यह सिस्टम उन्नत सीसीटीवी कैमरों और AI तकनीक से लैस होगा, जिससे कार्यालयों की गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में हुआ फैसला
राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने लोक सेवा भवन में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन (IGR) के अंतर्गत प्रस्तावित निगरानी प्रणाली की रूपरेखा, संचालन और रखरखाव पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में एकीकृत निगरानी प्रणाली जल्द लागू की जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
बिचौलियों पर सख्त निगरानी के लिए AI तकनीक
सरकार का कहना है कि रजिस्ट्री कार्यालयों में भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह अनधिकृत बिचौलियों की मौजूदगी है, जो बिना किसी आधिकारिक उद्देश्य के कार्यालयों में आते-जाते रहते हैं।
मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि AI आधारित प्रणाली ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने में सक्षम होगी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है तो उस पर उचित कार्रवाई और दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

भूमि पंजीकरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने का लक्ष्य
सरकार का मुख्य उद्देश्य भूमि लेनदेन और पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह से बिचौलियों के प्रभाव से मुक्त करना है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जाएगा।
यह कदम राज्य में डिजिटल गवर्नेंस और ई-गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूरे राजस्व विभाग में विस्तार की योजना
सरकारी योजना के अनुसार यह स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम केवल रजिस्ट्री कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे धीरे-धीरे तहसील और राजस्व निरीक्षक (RI) कार्यालयों तक भी विस्तारित किया जाएगा।
इस प्रणाली के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति, कार्य समय और फील्ड विजिट की भी निगरानी की जा सकेगी।
राज्य मुख्यालय से होगी केंद्रीकृत निगरानी
इस पूरे सिस्टम की निगरानी राज्य मुख्यालय स्तर पर की जाएगी। इसका संचालन राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अतिरिक्त मुख्य सचिव की देखरेख में किया जाएगा।
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरे राज्य में एक समान निगरानी मानक लागू हो और किसी भी स्तर पर अनियमितता की संभावना कम हो।
डिजिटल निगरानी से प्रशासनिक सुधार की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सर्विलांस सिस्टम प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं भी मिलेंगी।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तरह की तकनीक के सफल क्रियान्वयन के लिए डेटा सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण होगी।












