ओडिशा की नई स्कूल पाठ्यपुस्तकों में कथित त्रुटियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की, जबकि कांग्रेस ने कार्रवाई नहीं होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
भुवनेश्वर:ओडिशा में सरकारी स्कूलों की नई पाठ्यपुस्तकों में सामने आई कथित त्रुटियों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने राज्य के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस बीच कांग्रेस ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी बंद और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में पाई गई त्रुटियों को गंभीरता से लिया जा रहा है और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया जारी है।
नवीन पटनायक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग
सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान नवीन पटनायक ने कहा कि राज्य के कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आई हैं। उनका कहना था कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय स्तर पर परीक्षा संबंधी विवाद के बाद नैतिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है, तो राज्य सरकार को भी इसी सिद्धांत का पालन करना चाहिए। बीजद पिछले कई सप्ताह से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है और अब इस मुद्दे को और मजबूती से उठाया जाएगा।
पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों पर बढ़ा विवाद
विवाद का केंद्र राज्य के सरकारी विद्यालयों में वितरित नई पाठ्यपुस्तकें हैं। विपक्ष का आरोप है कि इन पुस्तकों में भाषा, तथ्यों, वर्तनी और विषयवस्तु से जुड़ी अनेक त्रुटियां हैं, जिनका सीधा असर छात्रों की शिक्षा पर पड़ सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की पुस्तकों में यदि तथ्यात्मक या भाषाई गलतियां रह जाती हैं, तो इसका प्रभाव छात्रों की बुनियादी समझ पर पड़ सकता है। इसी कारण इस मुद्दे ने राज्य में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है।
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस राज्यव्यापी ओडिशा बंद का आह्वान करेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पार्टी शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करेगी और इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय मामले को हल्के में ले रही है।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को बताया राजनीतिक
राज्य सरकार की ओर से खनन, वाणिज्य एवं परिवहन मंत्री बिभूति भूषण जेना ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इस्तीफे की मांग पूरी तरह राजनीतिक है और इसका उद्देश्य केवल सरकार को घेरना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का हर मुद्दे पर इस्तीफा मांगना उसकी पुरानी रणनीति रही है। उनके अनुसार सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पाठ्यपुस्तकों में यदि कहीं त्रुटियां हैं तो उन्हें ठीक करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर राजनीति तेज
इस विवाद ने ओडिशा की राजनीति में शिक्षा को एक प्रमुख चुनावी और सार्वजनिक मुद्दा बना दिया है। विपक्ष का कहना है कि यदि पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता पर पर्याप्त निगरानी रखी जाती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि किसी भी बड़े प्रकाशन कार्य में कुछ तकनीकी त्रुटियां संभव हैं और उन्हें समय पर सुधार लिया जाएगा। सरकार का यह भी कहना है कि इस आधार पर मंत्री का इस्तीफा मांगना उचित नहीं है।
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों की खबर सामने आने के बाद अभिभावकों और शिक्षकों में भी चिंता बढ़ी है। कई लोगों का मानना है कि शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों की गुणवत्ता सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिए क्योंकि यही विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा का आधार बनती हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि किताबों में त्रुटियां रहती हैं तो उन्हें कक्षा में अलग से सुधार समझाना पड़ता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन से पहले कई स्तरों पर समीक्षा और गुणवत्ता परीक्षण होना चाहिए। यदि किसी कारण से त्रुटियां रह जाती हैं, तो उन्हें तत्काल सुधार कर संशोधित संस्करण जारी करना आवश्यक है। उनके अनुसार शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्रों को सही और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो।
आगे क्या हो सकता है?
यदि विपक्ष अपने आंदोलन की घोषणा पर कायम रहता है, तो आने वाले दिनों में ओडिशा में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है। सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह पाठ्यपुस्तकों से जुड़े विवाद का शीघ्र समाधान निकाले और छात्रों तथा अभिभावकों का विश्वास बनाए रखे। फिलहाल राज्य में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित सुधारात्मक कदम इस विवाद की दिशा तय करेंगे।











