चंपत राय बेदाग उनका भोलापन मुसीबत बना गोविंद देव गिरि बोले सब पर विश्वास करके गलती की महासचिव बनने के बाद पहला इंटरव्यू

राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि ने चंपत राय को बेदाग बताया। बोले- उनका सब पर विश्वास करना और काम अपने ऊपर लेना मुसीबत बना।
चंपत राय बेदाग उनका भोलापन मुसीबत बना गोविंद देव गिरि बोले सब पर विश्वास करके गलती की महासचिव बनने के बाद पहला इंटरव्यू
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अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्था में हुए बड़े बदलाव के बाद नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने चंपत राय को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने चंपत राय को व्यक्तिगत रूप से बेदाग और निष्कलंक बताते हुए कहा कि उनके सामने जो समस्याएं आईं, उनका कारण किसी तरह का चारित्रिक दोष नहीं बल्कि उनका स्वभाव था। गोविंद देव गिरि के मुताबिक चंपत राय लोगों पर बहुत अधिक विश्वास करते थे, कई जिम्मेदारियां अपने ऊपर ले लेते थे और इसी वजह से कार्यप्रणाली में ऐसी कमियां पैदा हुईं, जिनका असर बाद में दिखाई दिया।

गोविंद देव गिरि का यह बयान उस समय आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट में पिछले कुछ समय से लगातार बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए हैं। जुलाई 2026 में चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया था कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद दोनों ट्रस्ट के आधिकारिक सदस्य भी नहीं रहे। इसके बाद महासचिव पद पर नई व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हुई और सितंबर में स्वामी गोविंद देव गिरि को नियमित महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

गोविंद देव गिरि पहले ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें महासचिव बनाया गया है, जबकि दिल्ली के कारोबारी और समाजसेवी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। ट्रस्ट ने इसके साथ ही संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव किए हैं और पहली बार पूर्णकालिक CEO के तौर पर रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को जिम्मेदारी दी गई है।

गोविंद देव गिरि ने चंपत राय के काम करने के तरीके का बचाव करते हुए कहा कि उनके अंतःकरण की शुद्धता को लेकर उन्हें कोई संदेह नहीं है। उनका कहना था कि चंपत राय का स्वभाव ऐसा रहा कि वे अनेक लोगों पर भरोसा करते थे और कई कामों की जिम्मेदारी खुद उठा लेते थे। इसी भरोसे और काम करने की शैली के कारण व्यवस्थागत कमियां पैदा हुईं। उनके अनुसार इन कमियों को चंपत राय के चरित्र से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

यह टिप्पणी राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी विवाद की पृष्ठभूमि में खास महत्व रखती है। जुलाई में दिए गए एक विस्तृत इंटरव्यू में गोविंद देव गिरि से चढ़ावा चोरी प्रकरण, ट्रस्ट की जिम्मेदारी और चंपत राय की भूमिका को लेकर कई तीखे सवाल पूछे गए थे। उस बातचीत में उन्होंने माना था कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट की ओर से ऐसी गलतियां हुईं, जिन्हें टाला जा सकता था। उन्होंने इसे एक गंभीर भूल बताते हुए यह भी कहा था कि संकट से निकलने के लिए व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

इंटरव्यू के दौरान उनसे यह भी सवाल किया गया कि यदि चंपत राय इतने बेदाग थे तो फिर उनके कार्यकाल में इतनी बड़ी समस्या क्यों सामने आई। इस पर गोविंद देव गिरि ने मूल समस्या को उनके स्वभाव से जोड़ते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का बहुत अधिक लोगों पर विश्वास करना और हर काम को अपने स्तर पर संभालने की कोशिश करना कई बार प्रशासनिक कमजोरी बन सकता है। उनके मुताबिक चंपत राय की नीयत पर सवाल उठाना उचित नहीं है, लेकिन व्यवस्था चलाने के लिए केवल व्यक्तिगत विश्वास पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मजबूत सिस्टम और निगरानी की भी जरूरत होती है।

गोविंद देव गिरि का यह नजरिया इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब वे खुद ट्रस्ट के महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लंबे समय तक कोषाध्यक्ष के रूप में ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद उन्हें संगठन की रोजमर्रा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में केंद्रीय भूमिका मिली है। नए महासचिव के सामने एक तरफ राम मंदिर से जुड़े निर्माण और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ हाल के विवादों के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करना भी अहम माना जा रहा है।

राम मंदिर ट्रस्ट की नई व्यवस्था में CEO की नियुक्ति भी इसी बदलाव का हिस्सा है। रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने के बाद प्रशासनिक कामकाज को अधिक पेशेवर तरीके से संचालित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। ट्रस्ट की हालिया बैठक में मंदिर निर्माण की प्रगति और आने वाले कार्यों की भी समीक्षा की गई।

गोविंद देव गिरि ने पहले ही संकेत दिया था कि आने वाले समय में ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर और बदलाव हो सकते हैं। उन्होंने बताया था कि डिप्टी CEO की भी नियुक्ति की जाएगी और ट्रस्ट के लिए उपयुक्त प्रवक्ता की तलाश जारी है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में धार्मिक नेतृत्व के साथ पेशेवर प्रशासनिक ढांचे को भी अधिक महत्व दिया जाएगा।

चंपत राय को लेकर गोविंद देव गिरि का बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में उनके कार्यकाल को लेकर अलग-अलग तरह के सवाल उठाए जाते रहे हैं। गोविंद देव गिरि ने हालांकि उनके व्यक्तिगत चरित्र और नीयत को लेकर किसी तरह की शंका से इनकार किया है। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी प्रशासनिक चूक को सीधे व्यक्ति की नीयत या चरित्र से जोड़ना सही नहीं है। उनके अनुसार चंपत राय का लोगों पर भरोसा करना उनकी ताकत भी था, लेकिन परिस्थितियों में यही स्वभाव कमजोरी साबित हुआ।

राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में चंपत राय लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं। ट्रस्ट की स्थापना के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम कार्यों में भी उनका योगदान रहा। अब उनके ट्रस्ट से बाहर होने के बाद स्वामी गोविंद देव गिरि के सामने उस व्यवस्था को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है, जिसमें निर्माण कार्य के साथ श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और मंदिर की प्रशासनिक आवश्यकताएं लगातार बढ़ रही हैं।

सितंबर में हुई ट्रस्ट की बैठक में नेतृत्व परिवर्तन को औपचारिक रूप दिया गया। स्वामी गोविंद देव गिरि को नया महासचिव और महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही नए ट्रस्टियों को भी जिम्मेदारियां दी गईं। यह बदलाव ऐसे दौर में हुआ है जब राम मंदिर का काम निर्माण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर संचालन, श्रद्धालु प्रबंधन, सुरक्षा, दान व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय की दिशा में प्रवेश कर रहा है।

नए महासचिव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि राम मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में व्यक्तिगत भरोसे के साथ संस्थागत निगरानी को भी मजबूत किया जाए। चढ़ावा चोरी जैसे विवादों ने यह सवाल खड़ा किया है कि इतनी बड़ी धार्मिक संस्था के संचालन में जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, रिकॉर्ड की निगरानी और समय पर शिकायतों पर कार्रवाई कितनी जरूरी है। गोविंद देव गिरि के पुराने इंटरव्यू में भी ट्रस्ट की ओर से हुई भूलों को स्वीकार करने की बात सामने आई थी।

इस पूरे प्रकरण में गोविंद देव गिरि की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि उन्होंने चंपत राय को बेदाग बताते हुए उनकी कार्यशैली की कमियों को अलग विषय माना। यानी उनके मुताबिक चंपत राय की नीयत पर सवाल नहीं है, लेकिन किसी भी संस्था को केवल व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, जिम्मेदारियों का विभाजन और निगरानी की व्यवस्था जरूरी है।

राम मंदिर ट्रस्ट के नेतृत्व में यह बदलाव आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। एक ओर धार्मिक और आध्यात्मिक नेतृत्व की निरंतरता बनी हुई है, वहीं CEO और संभावित डिप्टी CEO जैसी नियुक्तियों के जरिए प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश दिखाई दे रही है। ऐसे में गोविंद देव गिरि की भूमिका केवल महासचिव के तौर पर नहीं, बल्कि पुराने अनुभव और नई प्रशासनिक व्यवस्था के बीच समन्वय बनाने वाले व्यक्ति के रूप में भी महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल गोविंद देव गिरि का चंपत राय के पक्ष में दिया गया बयान इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने रखता है। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि चंपत राय की नीयत और चरित्र को लेकर उनके मन में कोई संदेह नहीं है। वे उनकी सबसे बड़ी कमजोरी के तौर पर लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने और अनेक जिम्मेदारियां खुद संभालने की प्रवृत्ति को देखते हैं। अब जब खुद गोविंद देव गिरि ट्रस्ट के महासचिव बन चुके हैं, तो उनके सामने यही चुनौती है कि उस अनुभव से सीख लेते हुए राम मंदिर की विशाल होती व्यवस्था को ऐसी संस्थागत प्रणाली दी जाए, जिसमें भरोसे के साथ जवाबदेही और पारदर्शिता भी उतनी ही मजबूत हो।

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