पाकिस्तान में CPEC परियोजना से कोई ठोस लाभ नहीं मिला। मंत्री अहसान इकबाल ने कहा कि पिछली सरकार और इमरान खान की नीतियों के कारण चीन का निवेश सही तरीके से लागू नहीं हो सका और अवसर गंवाए गए।
Pakistan News: पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री अहसान इकबाल ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना से कोई ठोस लाभ नहीं उठा सका। चीन ने करीब एक दशक पहले CPEC की शुरुआत की थी और इसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिति के लिए गेम-चेंजर माना गया था।
CPEC का उद्देश्य चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ना था। इसके तहत सड़कों, रेलमार्गों, ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक जोन का निर्माण शामिल था। परियोजना की कुल लागत लगभग 60 अरब डॉलर आंकी गई थी और इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का प्रमुख हिस्सा माना गया।
पाकिस्तान में CPEC का आरंभ
CPEC की शुरुआत के समय पाकिस्तान ने इसे लेकर बहुत उत्साही प्रचार किया था। पूर्व सरकारों ने इसे पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक ताकत बढ़ाने वाला कदम बताया। मीडिया और सरकारी प्रचार में इसे बड़े पैमाने पर जनता के सामने पेश किया गया। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरने वाले इस कॉरिडोर को लेकर भी खूब बयानबाजी हुई।
शुरुआती समय में उम्मीद यह थी कि CPEC पाकिस्तान के लिए रोजगार, निवेश, ऊर्जा उत्पादन और विदेशी मुद्रा में इजाफा करेगा। इसके साथ ही ग्वादर पोर्ट के जरिए पाकिस्तान रणनीतिक रूप से चीन और मध्य एशिया से जुड़कर आर्थिक लाभ उठा सकेगा।
पाकिस्तान के मंत्री ने दिया बड़ा बयान
हालांकि, अब पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने साफ किया है कि पाकिस्तान ने CPEC से कोई लाभ नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने चीन के निवेश को गलत संदर्भ में पेश किया, जिससे चीनी निवेशकों का विश्वास डगमगा गया और उन्हें परियोजना छोड़नी पड़ी।

मंत्री इकबाल ने कहा, "हमने खेल बदलने की क्षमता रखने वाले CPEC का लाभ नहीं उठाया। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ने कई मौके गंवाए और इस महत्त्वपूर्ण परियोजना का सही उपयोग नहीं कर सका।" उन्होंने यह भी माना कि CPEC को सही तरीके से लागू किया गया होता तो यह पाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता था।
इमरान खान पर आरोप
अहसान इकबाल ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को भी इस विफलता का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इमरान खान की नीतियों और विरोधी रुख के कारण चीन का निवेश पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर हुआ। मंत्री ने कहा कि चीन ने मुश्किल समय में पाकिस्तान की मदद की, लेकिन विरोधियों ने इसे बदनाम करने का प्रयास किया।
इस बयान के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। विपक्ष और समर्थक दोनों ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रख रहे हैं। जबकि कुछ इसे पिछली सरकार की गलती मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे इमरान खान की नीतियों की विफलता कह रहे हैं।
CPEC का महत्त्व
CPEC चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक प्रमुख हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन के शिनजियांग क्षेत्र को ग्वादर पोर्ट के जरिए पाकिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ना था। परियोजना के तहत सड़कें, रेलवे, ऊर्जा उत्पादन केंद्र और औद्योगिक जोन विकसित किए जाने थे।
CPEC और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
मंत्री अहसान इकबाल ने साफ किया कि पाकिस्तान ने इस परियोजना के जरिए आर्थिक सुधार और निवेश के मौके खो दिए। उन्होंने कहा कि CPEC को सही ढंग से लागू किया जाता तो पाकिस्तान को ऊर्जा संकट और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिल सकती थी।
इसके अलावा, CPEC के तहत चीन के निवेश से पाकिस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन इन संभावनाओं का लाभ पाकिस्तान को नहीं मिल पाया।









