NEET पेपर लीक मामले को लेकर संसद में जारी गतिरोध के चलते मानसून सत्र 2026 के पहले चार दिनों तक दोनों सदनों में कोई महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो सका। लगातार हंगामा, नारेबाजी और बार-बार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद अब संसद की कार्रवाई 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र में अब तक दोनों सदनों में सुचारू रूप से कामकाज नहीं हो पाया है। विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है, जबकि सरकार बिना किसी पूर्व शर्त के NEET मुद्दे पर चर्चा कराने की बात कह रही है। इस बीच CJP के आंदोलन ने भी राजनीतिक विवाद को संसद से बाहर सड़कों तक पहुंचा दिया है।
24 जुलाई को भी विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। दूसरी ओर, NDA सांसदों ने भी विपक्ष के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन किया। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही अब 27 जुलाई तक स्थगित कर दी गई है।
चार दिनों से नहीं हो सका सामान्य कामकाज
मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी। NEET-UG पेपर लीक का मुद्दा पहले ही दिन विपक्ष के विरोध का केंद्र बन गया। विपक्षी सांसदों ने मामले पर तत्काल चर्चा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। 21 जुलाई को विपक्ष ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर चर्चा की मांग की। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी स्थगन प्रस्ताव पेश किया। हालांकि, हंगामे के चलते कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
22 जुलाई को भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना NEET मामले पर चर्चा स्वीकार नहीं की जाएगी। 23 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से बिना शर्त चर्चा में शामिल होने की अपील की, लेकिन गतिरोध समाप्त नहीं हुआ। 24 जुलाई को भी प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस तरह मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में विधायी कामकाज पर राजनीतिक टकराव का गहरा असर दिखाई दिया।
राहुल गांधी की तीन 'नॉन-नेगोशिएबल' मांगें
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कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से NEET मामले को लेकर कई मांगें उठाई जा रही हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को 'नॉन-नेगोशिएबल' बताया है।
- पहली मांग—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: राहुल गांधी का कहना है कि NEET और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पद से इस्तीफा देना चाहिए।
- दूसरी मांग—प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की जांच: विपक्ष ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने मांग की है कि छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय हो।
- तीसरी मांग—प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें: राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर समाधान के बिना संसद में चर्चा का रास्ता आसान नहीं होगा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराया है।
CJP की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?
इस पूरे विवाद में CJP का आंदोलन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संगठन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है। इसके अलावा संगठन NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है। CJP की एक अन्य प्रमुख मांग शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की है।
संगठन का कहना है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। 24 जुलाई से CJP ने देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का भी ऐलान किया है। इससे यह मुद्दा अब केवल संसद तक सीमित नहीं रह गया है।
सरकार का क्या है रुख?
सरकार का कहना है कि वह NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को बिना पूर्व शर्त के सदन में चर्चा करनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन चलाने में सहयोग की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए पेपर लीक जैसे मामलों की तेज सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की बात कही है। हालांकि, विपक्ष और CJP इसे पर्याप्त कदम नहीं मान रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं।
27 जुलाई के बाद क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 27 जुलाई को संसद की कार्यवाही शुरू होने के बाद गतिरोध खत्म होगा या नहीं। अगर विपक्ष अपनी मांगों पर कायम रहता है और CJP का आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में भी तेज होता है, तो संसद में टकराव और बढ़ सकता है। दूसरी संभावना यह है कि सरकार मुआवजे, FIR और परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर कुछ ठोस कदम उठाकर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करे। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग विपक्ष और CJP के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।










