पेरू राष्ट्रपति चुनाव 2026: अपराध, आर्थिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के बीच वोटिंग

पेरू में बढ़ते अपराध, उगाही और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति चुनाव चर्चा में सख्त कानून व्यवस्था का वादा, रॉबर्टो सांचेज़ और कीको फुजीमोरी मैदान में है

पेरू में बढ़ते अपराध, उगाही और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति चुनाव चर्चा में है। कीको फुजीमोरी सख्त कानून व्यवस्था का वादा कर रही हैं, जबकि रॉबर्टो सांचेज़ सामाजिक और आर्थिक सुधारों के एजेंडे के साथ चुनाव मैदान में हैं।

लीमा: दक्षिण अमेरिकी देश Peru में राष्ट्रपति चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब देश गंभीर सुरक्षा संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक असमानताओं से जूझ रहा है। रविवार को होने वाले चुनाव में मतदाता दो बिल्कुल अलग राजनीतिक विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवारों के बीच फैसला करेंगे।

एक ओर दक्षिणपंथी नेता Keiko Fujimori हैं, जो चौथी बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हैं। दूसरी ओर वामपंथी उम्मीदवार Roberto Sánchez हैं, जो राज्य की भूमिका बढ़ाने और आर्थिक नीतियों में व्यापक बदलाव का वादा कर रहे हैं।

हालांकि चुनावी बहस केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। इस बार सबसे बड़ा मुद्दा अपराध, हिंसा और संगठित गैंगों का बढ़ता प्रभाव बन गया है।

जबरन वसूली और गैंग हिंसा ने लोगों की जिंदगी बदली

राजधानी Lima के बाहरी इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए अपराध अब केवल खबरों का विषय नहीं बल्कि रोजमर्रा की हकीकत बन चुका है।

बस चालक टोño उन्हीं लोगों में शामिल हैं जिन्होंने अपराध का सीधा सामना किया है। उनकी कंपनी को एक आपराधिक गिरोह की ओर से धमकी मिली थी जिसमें बड़ी रकम की मांग की गई थी। चेतावनी में कहा गया था कि मांग पूरी नहीं होने पर ड्राइवरों को मार दिया जाएगा।

कुछ समय बाद उन पर सशस्त्र हमला हुआ। हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी जिससे उनके पैर और पेट में गंभीर चोटें आईं। कई महीनों तक इलाज के बाद वे फिर काम पर लौटे, लेकिन उनका कहना है कि भय अब भी उनके साथ बना हुआ है। उनका अनुभव पेरू में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों की गंभीरता को दर्शाता है।

हजारों उगाही के मामले, परिवहन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025 में पेरू में लगभग 30 हजार जबरन वसूली और धमकी के मामले दर्ज किए गए। इनमें बड़ी संख्या परिवहन कंपनियों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों से जुड़ी थी।

विशेष रूप से बस सेवाएं और सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र अपराधियों के निशाने पर हैं। कई क्षेत्रों में गैंग संचालक नियमित रूप से सुरक्षा के नाम पर पैसे मांगते हैं और इनकार करने पर हिंसा का सहारा लेते हैं।

पिछले वर्ष देशभर में 239 बस चालकों की हत्या दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि परिवहन उद्योग किस स्तर के खतरे का सामना कर रहा है।

चुनाव में कानून-व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा

बढ़ते अपराध ने चुनावी एजेंडा पूरी तरह बदल दिया है। मतदाता अब सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को आर्थिक मुद्दों से भी अधिक महत्व दे रहे हैं।

केइको फुजीमोरी ने अपने चुनाव अभियान का केंद्र अपराध विरोधी नीतियों को बनाया है। उन्होंने संगठित अपराध के खिलाफ कड़े कदम उठाने, जेल व्यवस्था को मजबूत करने और सेना को सुरक्षा अभियानों में अधिक भूमिका देने का वादा किया है।

उनका कहना है कि अपराधी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के बिना देश में स्थिरता संभव नहीं है।

फुजीमोरी परिवार की विरासत फिर चर्चा में

केइको फुजीमोरी के चुनाव अभियान में उनके पिता Alberto Fujimori की विरासत एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।

अल्बर्टो फुजीमोरी ने 1990 से 2000 तक पेरू का नेतृत्व किया था। उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने देश में आर्थिक स्थिरता लाई और आतंकवाद तथा अपराध पर नियंत्रण स्थापित किया।

पेरू राष्ट्रपति चुनाव 2026: अपराध, आर्थिक असमानता और राजनीतिक अस्थिरता के बीच वोटिंग

हालांकि आलोचकों का कहना है कि उनके शासनकाल में मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचा।

यही कारण है कि केइको फुजीमोरी का नाम पेरू में आज भी तीखी राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।

रॉबर्टो सांचेज़ का आर्थिक बदलाव का एजेंडा

दूसरी ओर रॉबर्टो सांचेज़ देश की आर्थिक संरचना में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव दे रहे हैं।

वे खनन अनुबंधों की समीक्षा, कुछ कॉर्पोरेट करों में वृद्धि, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के नियंत्रण को मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं।

सांचेज़ का तर्क है कि पेरू के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली विशाल आय का लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंच रहा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आर्थिक विकास का अपेक्षित फायदा नहीं मिला है।

उनका कहना है कि देश के खनिज संसाधनों से प्राप्त संपत्ति का अधिक न्यायसंगत वितरण होना चाहिए।

खनन उद्योग और विदेशी निवेश पर बहस

पेरू विश्व के प्रमुख तांबा उत्पादक देशों में से एक है। इसके अलावा सोना और अन्य खनिज भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

फुजीमोरी समर्थकों का मानना है कि मुक्त बाजार और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना आर्थिक विकास का सबसे प्रभावी रास्ता है। उनका कहना है कि निवेशकों का विश्वास बनाए रखना रोजगार और विकास के लिए जरूरी है।

वहीं सांचेज़ समर्थकों का तर्क है कि प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले लाभ का बड़ा हिस्सा विदेशी कंपनियों और सीमित वर्गों तक ही पहुंचता है, जबकि स्थानीय समुदाय गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझते रहते हैं।

राजनीतिक अस्थिरता बनी सबसे बड़ी चुनौती

पेरू की राजनीति पिछले एक दशक से लगातार अस्थिर रही है। देश ने पिछले दस वर्षों में आठ राष्ट्रपति देखे हैं। बार-बार होने वाले राजनीतिक संकटों और महाभियोग प्रक्रियाओं ने शासन व्यवस्था को कमजोर किया है।

सरकारों के लगातार बदलने से दीर्घकालिक नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि जनता में राजनीतिक व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ती जा रही है।

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