बीते वर्ष 6-7 मई की रात भारतीय सेना के Operation Sindoor के दौरान पाकिस्तान के कई चीन निर्मित लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों को निशाना बनाया गया था। इन्हीं में चीन में बनी अत्याधुनिक PL-15E missile भी शामिल थी, जिसका एक हिस्सा पंजाब के होशियारपुर जिले में गिरा था।
India Decoded China Missile: भारत और चीन के बीच बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच चीन की अत्याधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली PL-15E मिसाइल एक बार फिर चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय रक्षा विशेषज्ञों और इंजीनियरों ने इस चीनी मिसाइल के महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ हुए सैन्य अभियान के दौरान बरामद PL-15E मिसाइल के मलबे से भारत को चीन की मिसाइल तकनीक से जुड़ी अहम जानकारी मिली है।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसी तकनीकी जानकारी वास्तव में हासिल हुई है, तो इससे भारत की एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
क्या है PL-15E मिसाइल?
PL-15E Missile चीन द्वारा विकसित एक आधुनिक ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल है। इसे चीन के उन्नत लड़ाकू विमानों जैसे J-10 और JF-17 के लिए तैयार किया गया है। यह मिसाइल लंबी दूरी से दुश्मन के विमानों को निशाना बनाने में सक्षम मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी मारक क्षमता 100 से 150 किलोमीटर तक हो सकती है और यह मैक-5 से अधिक की गति से उड़ान भर सकती है। इसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे लक्ष्य की सटीक पहचान और ट्रैकिंग में मदद करता है।
भारत को कैसे मिली मिसाइल?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव के दौरान पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र में PL-15E मिसाइल के कुछ हिस्से बरामद किए गए थे। बताया जाता है कि इनमें से एक मिसाइल अपेक्षाकृत सुरक्षित अवस्था में मिली थी। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी आधुनिक मिसाइल के मलबे का अध्ययन सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे विरोधी देश की तकनीकी क्षमता, रडार सिस्टम, गाइडेंस तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपायों के बारे में अहम जानकारी प्राप्त हो सकती है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारतीय विशेषज्ञों ने मिसाइल की ट्रैकिंग प्रणाली, रडार सिग्नेचर और इलेक्ट्रॉनिक गाइडेंस तकनीक का अध्ययन किया है। माना जा रहा है कि इससे भारत को भविष्य में ऐसी मिसाइलों के खिलाफ बेहतर रक्षा रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम आधुनिक हवाई युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। यदि किसी मिसाइल की संचार और लक्ष्य पहचान प्रणाली को समझ लिया जाए, तो उसके खिलाफ प्रभावी ‘काउंटर मेजर्स’ विकसित करना आसान हो जाता है।

तेजस और सुखोई विमानों को मिल सकता है फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL Tejas और अपग्रेड हो रहे सुखोई-30MKI विमानों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम लगा रहा है। माना जा रहा है कि PL-15E से जुड़ी तकनीकी जानकारी इन सिस्टम्स को और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है। भारत पहले से ही फ्रांस निर्मित Dassault Rafale लड़ाकू विमानों में आधुनिक रक्षा तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स को मजबूत करना भारत की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि Defence Research and Development Organisation (DRDO) अपने स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल कार्यक्रम Astra Mk-2 में उन्नत तकनीकों को शामिल करने पर काम कर रहा है। Astra Missile भारत की स्वदेशी BVR मिसाइल है, जिसका नया संस्करण 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की मिसाइल तकनीक का अध्ययन भारतीय रक्षा अनुसंधान को नई दिशा दे सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देश भी PL-15E मिसाइल की तकनीक को समझने में रुचि रखते हैं। खासतौर पर इसकी AESA रडार तकनीक, मोटर डिजाइन और जैमिंग-रोधी क्षमता को लेकर रक्षा विशेषज्ञों की दिलचस्पी बनी हुई है।








