पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल का मार्शल लॉ आदेश फेल, अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

सियोल कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को मार्शल लॉ लागू करने और संवैधानिक संकट पैदा करने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को अदालत ने मार्शल लॉ लागू कर देश में संवैधानिक संकट पैदा करने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उनकी अल्पकालिक सत्ता हथियाने की कोशिश विफल रही।

World News: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को अदालत ने बड़ा झटका दिया है। सियोल की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने उन्हें ‘मार्शल लॉ’ लागू करने और देश को संवैधानिक संकट में डालने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। 65 वर्षीय यून पर अप्रैल 2024 से ही विभिन्न आपराधिक आरोपों में मुकदमा चल रहा था, जो उनकी अल्पकालिक मार्शल लॉ घोषणा से जुड़े थे। अदालत ने सबसे गंभीर आरोप, “विद्रोह का सरगना होने” पर फैसला सुनाया।

मुख्य जज जी क्वी-येओन ने कहा कि यून ने कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया और हिंसक तरीकों का सहारा लेकर राष्ट्रीय सभा को निष्क्रिय करने और लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर करने की कोशिश की। अभियोजन पक्ष ने यून पर मौत की सजा की मांग भी की थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया।

क्यों लगाया गया था मार्शल लॉ

यून सुक येओल ने 3 दिसंबर 2024 की रात अचानक मार्शल लॉ लागू किया। उनका कहना था कि यह आवश्यक है ताकि विपक्ष-प्रधान राष्ट्रीय सभा में मौजूद “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” को रोका जा सके। उन्होंने संसद को “अपराधियों का अड्डा” बताया और आरोप लगाया कि संसदीय बहुमत का इस्तेमाल उनकी सरकार को रोकने के लिए किया जा रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल का मार्शल लॉ आदेश फेल, अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

यून के आदेश के तहत सभी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई और समाचार मीडिया को सैन्य नियंत्रण में ले लिया गया। सशस्त्र सैनिकों ने राष्ट्रीय सभा और राष्ट्रीय चुनाव आयोग पर छापा मारा। अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया कि यून ने अपने राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया।

जनता ने किया विरोध

यून का मार्शल लॉ शासन जनता के गुस्से के कारण जल्दी ही असफल हो गया। जैसे ही उनकी घोषणा टीवी पर दिखी, नागरिक राष्ट्रीय सभा की ओर दौड़े और सैनिकों का सामना किया। सांसदों ने आधी रात में इकट्ठा होकर यून के आदेश को निरस्त किया। छह घंटे के भीतर यून को अपना आदेश वापस लेना पड़ा।

यून की यह सत्ता हथियाने की कोशिश दक्षिण कोरिया के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़े संकटों में से एक मानी जा रही है। इस घटना ने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की अहमियत को फिर साबित किया।

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