जन्माष्टमी पर कान्हा की झांकियों में दिखा सेना का शौर्य: पहलगाम हमले से सर्जिकल स्ट्राइक तक का प्रदर्शन, प्रयागराज में मंदिर और थाने सजे

प्रयागराज में जन्माष्टमी पर मंदिरों और थानों को आकर्षक झांकियों से सजाया गया। कहीं कृष्ण लीलाएं तो कहीं पहलगाम हमले से सर्जिकल स्ट्राइक तक सेना का शौर्य दिखा।
जन्माष्टमी पर कान्हा की झांकियों में दिखा सेना का शौर्य: पहलगाम हमले से सर्जिकल स्ट्राइक तक का प्रदर्शन, प्रयागराज में मंदिर और थाने सजे
Photo Credit / Attribution: Google

प्रयागराज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार भक्ति के साथ देशभक्ति के रंग में भी नजर आया। संगम नगरी के मंदिरों, पुलिस थानों और विभिन्न धार्मिक स्थलों पर कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर विशेष सजावट की गई। कहीं भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को झांकियों के माध्यम से दिखाया गया तो कहीं देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के साहस और पराक्रम को जन्माष्टमी की झांकी का हिस्सा बनाया गया। पहलगाम आतंकी हमले से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और सेना के शौर्य से जुड़े प्रसंगों को झांकियों में स्थान दिया गया, जिससे धार्मिक आयोजन के बीच श्रद्धालुओं को देशभक्ति का संदेश भी देखने को मिला।

प्रयागराज में जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की तैयारियों के साथ मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया। कई स्थानों पर कान्हा की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा, गोकुल और वृंदावन के प्रसंगों पर आधारित झांकियां तैयार की गईं। वहीं कुछ झांकियों में आधुनिक समय की घटनाओं को भी शामिल किया गया, जिनमें सेना के जवानों के साहस और आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई को दर्शाने का प्रयास किया गया।

जन्माष्टमी की इन झांकियों में भगवान श्रीकृष्ण के साथ देश के वीर जवानों को दिखाना लोगों के लिए खास आकर्षण रहा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में पैदा हुए आक्रोश और उसके बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अभियानों को भी देश की सैन्य क्षमता और जवानों के पराक्रम के प्रतीक के तौर पर दिखाया गया। हालांकि झांकियों में प्रदर्शित घटनाएं आयोजन की थीम का हिस्सा हैं और उनका उद्देश्य श्रद्धालुओं के बीच देशभक्ति की भावना को सामने रखना है।

प्रयागराज में धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों को झांकियों में शामिल करने की परंपरा पहले भी देखने को मिलती रही है। इस बार जन्माष्टमी पर सेना के शौर्य को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया। श्रीकृष्ण के जीवन में धर्म और अधर्म के संघर्ष का प्रसंग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी भाव को आधार बनाकर आयोजकों ने देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के साहस को झांकी का हिस्सा बनाया।

शहर के कई मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर परिसर में फूलों से सजावट के साथ आकर्षक झांकियां तैयार की गईं। श्रद्धालुओं के लिए भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ। रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष आरती, अभिषेक और प्रसाद वितरण की तैयारियां की गईं।

इस्कॉन मंदिर में भी जन्माष्टमी के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। यहां ब्रज की संस्कृति और कृष्ण लीलाओं को झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दिखाने की योजना बनाई गई थी। मंदिर में वृंदावन के प्रमुख मंदिरों की झांकियों के साथ कृष्ण लीलाओं पर आधारित प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। जन्म के समय मध्यरात्रि में विशेष अभिषेक की तैयारी की गई थी। मंदिर प्रबंधन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पंडाल, पार्किंग, प्रवेश और निकास की व्यवस्था की थी।

प्रयागराज में पुलिस थानों और पुलिस से जुड़े परिसरों में भी जन्माष्टमी का माहौल दिखाई दिया। धार्मिक पर्व के मौके पर पुलिसकर्मियों ने थानों को सजाया और भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां तैयार कीं। पुलिसकर्मी ड्यूटी के साथ जन्माष्टमी के आयोजन में भी शामिल हुए। कई जगहों पर मंदिरनुमा सजावट, भगवान कृष्ण की मूर्ति और धार्मिक प्रसंगों को प्रदर्शित किया गया।

थानों में सजाई गई झांकियों का एक अलग संदेश भी रहा। पुलिस और सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा करना है। ऐसे में सेना के शौर्य और देश की सुरक्षा से जुड़े प्रसंगों को झांकियों में दिखाकर जवानों के प्रति सम्मान की भावना सामने रखी गई। पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद की सैन्य कार्रवाई को झांकी में शामिल करना इसी भाव से जुड़ा नजर आया।

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और वृंदावन से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में जन्माष्टमी धार्मिक उत्सव के साथ सांस्कृतिक आयोजन का भी अवसर होती है। प्रयागराज में भी इस पर्व पर ब्रज संस्कृति की झलक देखने को मिली। मंदिरों में राधा-कृष्ण के स्वरूप, गोपियों और ग्वाल-बालों से जुड़े प्रसंगों को सजावट के माध्यम से दिखाया गया। बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार कर कार्यक्रमों में शामिल किया गया।

शहर में जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में भी काफी चहल-पहल रही। कान्हा की पोशाक, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, झूले और सजावट की सामग्री की बिक्री बढ़ी। घरों में भी लोगों ने बाल गोपाल के लिए विशेष झूले सजाए। कई परिवारों ने घर में ही छोटी झांकी तैयार की और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की।

प्रयागराज के इस्कॉन मंदिर में इस बार जन्माष्टमी को ब्रज के अनुभव के रूप में मनाने की तैयारी की गई थी। मंदिर में सात प्रमुख ब्रज मंदिरों की झांकियां, कृष्ण लीलाओं की प्रस्तुतियां और विशेष सजावट की योजना बनाई गई थी। भगवान के लिए अलग-अलग दिनों में विशेष श्रृंगार और 108 प्रकार के भोग की तैयारी भी बताई गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए।

जन्माष्टमी के बीच सेना के शौर्य वाली झांकियों ने धार्मिक आयोजन को एक अलग संदेश दिया। झांकी में जवानों की भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और देश की सुरक्षा को प्रमुखता से दिखाया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रसंगों के साथ इन प्रस्तुतियों को भी देखा। बच्चों और युवाओं के लिए ऐसी झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, क्योंकि इनमें धार्मिक कथा के साथ देश की समकालीन घटनाओं को भी दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया।

प्रयागराज में देशभक्ति और सैन्य शौर्य से जुड़े आयोजन पहले भी बड़े स्तर पर होते रहे हैं। मई 2026 में यहां ‘सांस्कृतिक शौर्य संगम’ कार्यक्रम में सेना के बैंड और शास्त्रीय कलाकारों की प्रस्तुतियां हुई थीं। इस आयोजन में सैन्य अनुशासन, संस्कृति और राष्ट्रप्रेम को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया था।

इसी तरह प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम-2026 के दौरान भी सेना की आधुनिक तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और सैन्य क्षमता को प्रदर्शित किया गया था। इससे संगम नगरी में सेना और देशभक्ति से जुड़े आयोजनों की पृष्ठभूमि भी सामने आती है।

जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में भक्ति और पुलिस परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था साथ-साथ चलती रही। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रमुख मंदिरों और आयोजन स्थलों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रवेश और निकास के इंतजाम किए गए।

कान्हा के जन्मोत्सव में सेना के शौर्य को शामिल करने का उद्देश्य धार्मिक पर्व को देशभक्ति के भाव से जोड़ना रहा। भगवान श्रीकृष्ण की कथा में अन्याय और अधर्म के खिलाफ संघर्ष का संदेश प्रमुख है। आयोजकों ने इसी भाव को आधुनिक भारत की सुरक्षा व्यवस्था और जवानों के साहस से जोड़कर झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

इस बार प्रयागराज की जन्माष्टमी इसलिए भी खास नजर आई कि शहर के मंदिरों में जहां राधा-कृष्ण की भक्ति, भजन और कीर्तन का माहौल रहा, वहीं कई झांकियों में देश की सुरक्षा और जवानों के पराक्रम की तस्वीर दिखाई दी। पहलगाम हमले से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक के प्रसंगों को प्रदर्शित कर लोगों के बीच राष्ट्रप्रेम का संदेश देने की कोशिश की गई।

कुल मिलाकर संगम नगरी में इस बार जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव तक सीमित नहीं रही। मंदिरों की भव्य सजावट, कृष्ण लीलाओं की झांकियां, भजन-कीर्तन और मध्यरात्रि के अभिषेक के साथ सेना के शौर्य और देशभक्ति को भी उत्सव का हिस्सा बनाया गया। प्रयागराज के मंदिरों और थानों में सजी इन झांकियों ने धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रप्रेम और जवानों के प्रति सम्मान का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया।

Leave a comment