प्रयागराज में करोड़ों की जमीन की आकृति बदली अभिलेखागार में रखे बंदोबस्ती भूचित्र से छेड़छाड़

प्रयागराज में करोड़ों की जमीन की आकृति बदलने के आरोप में अभिलेखागार के बंदोबस्ती भूचित्र से छेड़छाड़ की जांच शुरू हुई है। SIT गठित की गई है।
प्रयागराज में करोड़ों की जमीन की आकृति बदली अभिलेखागार में रखे बंदोबस्ती भूचित्र से छेड़छाड़
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प्रयागराज में करोड़ों रुपए कीमत की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि अभिलेखागार में सुरक्षित बंदोबस्ती भूचित्र यानी पुराने भूमि नक्शे की आकृति में बदलाव किया गया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है।

बताया जा रहा है कि मामला ऐसी जमीन से जुड़ा है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपए में बताई जा रही है। जमीन के पुराने अभिलेख और भूचित्र में बदलाव किए जाने की आशंका के बाद अधिकारियों के स्तर पर जांच शुरू कराई गई। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अभिलेख में किस स्तर पर बदलाव हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

अभिलेखागार में रखे बंदोबस्ती भूचित्र को महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड माना जाता है। इसी तरह के पुराने नक्शों और दस्तावेजों के आधार पर जमीन की स्थिति, सीमाएं और अन्य राजस्व संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। ऐसे दस्तावेज में किसी भी तरह की अनधिकृत छेड़छाड़ गंभीर मामला मानी जाती है।

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सुरक्षित अभिलेखागार में रखे दस्तावेज तक किसकी पहुंच थी। यदि भूचित्र में वास्तव में बदलाव किया गया है तो जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि दस्तावेज कब और किस परिस्थिति में निकाला गया तथा उसके साथ किसने छेड़छाड़ की।

SIT को मामले से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने के साथ-साथ अभिलेखागार की व्यवस्था और दस्तावेजों की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल करनी होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित छेड़छाड़ के लिए किस स्तर पर दस्तावेज तक पहुंच बनाई गई।

जांच टीम जमीन से संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड का भी मिलान कर सकती है। बंदोबस्ती भूचित्र की मौजूदा स्थिति की तुलना पुराने दस्तावेजों, अन्य अभिलेखों और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड से की जाएगी। यदि अलग-अलग रिकॉर्ड में अंतर मिलता है तो उसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

करोड़ों रुपए की जमीन होने के कारण इस मामले में जमीन के स्वामित्व और सीमांकन से जुड़े विवाद की संभावना भी महत्वपूर्ण है। भूचित्र की आकृति में बदलाव होने से जमीन की सीमा या उसका क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कथित छेड़छाड़ से किसी पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई या नहीं, यह भी जांच का हिस्सा होगा।

SIT यह भी पता लगाएगी कि जमीन से जुड़े किसी पुराने विवाद, मुकदमे या प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान इस नक्शे का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। अगर किसी मामले में भूचित्र को आधार बनाकर कोई दावा किया गया है तो उस दावे की भी जांच की जा सकती है।

अभिलेखों में छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच पूरी होने से पहले तय नहीं की जा सकती। SIT साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर ही जिम्मेदारी निर्धारित करेगी।

जांच टीम अभिलेखागार में दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा कर सकती है। पुराने और महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है और दस्तावेजों तक पहुंच का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है, इसकी भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

मामले में यह भी देखा जाएगा कि कथित बदलाव मूल दस्तावेज में हुआ या उसकी किसी प्रति अथवा डिजिटल रिकॉर्ड में। इसके लिए दस्तावेज की तकनीकी जांच कराई जा सकती है। कागज, स्याही, लिखावट और अन्य बदलावों की विशेषज्ञ जांच से भी महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

प्रशासन की ओर से SIT गठित किए जाने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। टीम जमीन के दस्तावेजों से लेकर अभिलेखागार की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका तक की जांच कर सकती है।

अगर जांच में यह साबित होता है कि सरकारी अभिलेख में जानबूझकर बदलाव किया गया था, तो मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो उसकी स्थिति भी रिपोर्ट के जरिए स्पष्ट होगी।

इस पूरे मामले ने सरकारी भूमि रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। जमीन की कीमत बढ़ने के साथ पुराने राजस्व रिकॉर्ड का महत्व भी बढ़ गया है। ऐसे में महत्वपूर्ण दस्तावेजों में किसी भी तरह की अनधिकृत छेड़छाड़ प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती है।

प्रयागराज में सामने आए इस मामले में अब SIT की रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के दौरान यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बंदोबस्ती भूचित्र में वास्तव में बदलाव हुआ था या नहीं, बदलाव किस स्तर पर हुआ और यदि छेड़छाड़ हुई तो इसके पीछे उद्देश्य क्या था।

फिलहाल SIT ने मामले की जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है। करोड़ों की जमीन से जुड़े बंदोबस्ती भूचित्र में कथित बदलाव की जांच के साथ-साथ अभिलेखागार तक पहुंच रखने वाले लोगों और दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था की भी पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले में जिम्मेदार लोगों और कथित छेड़छाड़ की पूरी तस्वीर सामने आएगी।

 

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