रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार 10वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। आंदोलन को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखने के लिए छात्रों ने नेताओं की एंट्री पर ही रोक लगा दी है। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और रोजगार से जुड़े मुद्दों के लिए है।
दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर हुए छात्र आंदोलनों की तर्ज पर रांची में भी छात्रों ने अपने आंदोलन को संगठित तरीके से आगे बढ़ाया है। छात्र स्टेडियम में लगातार जुट रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। आंदोलन के 10 दिन पूरे होने के बाद अब सरकार की ओर से बातचीत की पहल की उम्मीद बढ़ गई है।
छात्रों के आंदोलन को CJP यानी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी/संगठन का समर्थन मिलने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों ने नेताओं के सीधे हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखने की कोशिश की है। उनका कहना है कि आंदोलन की दिशा और मुद्दे छात्र खुद तय करेंगे।
जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहे प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नेताओं की एंट्री को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों के नेता अगर मंच पर आकर आंदोलन का नेतृत्व करने लगेंगे तो छात्रों की मूल मांगें पीछे छूट सकती हैं। इसलिए किसी भी राजनीतिक नेता को आंदोलन स्थल में प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया गया है।
छात्रों का यह रुख आंदोलन को लेकर उनकी रणनीति को भी दर्शाता है। वे चाहते हैं कि सरकार सीधे छात्रों से बातचीत करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। छात्रों के मुताबिक, उनका उद्देश्य किसी पार्टी के समर्थन या विरोध से ज्यादा अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
10 दिनों से जारी प्रदर्शन के कारण जयपाल सिंह स्टेडियम में लगातार छात्रों की मौजूदगी बनी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों और संस्थानों से जुड़े युवा यहां पहुंचकर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्र अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हैं और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील करते हैं।
आंदोलन को समर्थन मिलने के बाद छात्रों का उत्साह भी बढ़ा है। CJP की ओर से समर्थन मिलने को छात्र अपने मुद्दों की व्यापक स्वीकार्यता के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि आंदोलन की कमान छात्र अपने हाथ में ही रखना चाहते हैं।
अब इस पूरे मामले में सबसे अहम घटनाक्रम सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित बातचीत को माना जा रहा है। हेमंत सरकार अब आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत करने की तैयारी में है। इससे लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन का समाधान निकलने की उम्मीद जगी है।











