प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर धाम में लोकार्पण से पहले ही महत्वाकांक्षी राम वनगमन पथ की सड़क के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। निर्माणाधीन फोरलेन के एक हिस्से में जगह-जगह धंसाव और दरारें दिखाई दी हैं। उपलब्ध ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक करीब 500 मीटर के हिस्से में दोनों लेन पर 118 स्थानों पर सड़क धंसी या क्षतिग्रस्त मिली। कुछ जगहों पर दरारें काफी चौड़ी हैं और सड़क का हिस्सा करीब एक फीट तक नीचे बैठा हुआ बताया गया है। वहीं, अलग रिपोर्टों में करीब 100 मीटर के दायरे में चार प्रमुख स्थानों पर दरार और धंसाव की पुष्टि की गई है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राम वनगमन पथ को धार्मिक पर्यटन और बेहतर सड़क संपर्क की बड़ी परियोजना के तौर पर विकसित किया जा रहा है। अयोध्या से चित्रकूट तक प्रस्तावित यह मार्ग उन स्थानों को जोड़ता है, जिनका संबंध भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं से है। परियोजना के तहत चार लेन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। प्रयागराज के नवाबगंज क्षेत्र में स्थित श्रृंगवेरपुर धाम इस मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मौके की स्थिति को लेकर सामने आई रिपोर्टों में बताया गया है कि चित्रकूट की ओर जाने वाली लेन में करीब 500 मीटर के हिस्से में कई जगह सड़क नीचे बैठी हुई दिखाई दी। इसके बाद पुल से वापस आने वाली दूसरी लेन में भी इसी तरह की समस्या नजर आई। बड़े गड्ढों और धंसे हिस्सों की गिनती करने पर दोनों लेन को मिलाकर 118 स्थानों का आंकड़ा सामने आया। कुछ जगहों पर सड़क लगभग एक फीट तक नीचे बैठी हुई बताई गई है। सड़क पर एक से डेढ़ फीट तक चौड़ी दरारें दिखाई देने का भी उल्लेख किया गया है।
सबसे ज्यादा चिंता पुल के एप्रोच हिस्से को लेकर बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पुल की तरफ जाने वाली एप्रोच सड़क का एक हिस्सा नीचे की ओर झुका हुआ दिखाई दिया। ग्राउंड रिपोर्ट में इसे करीब 30 डिग्री तक झुका हुआ बताया गया है। पुल के नीचे से देखने पर एप्रोच की दीवारों के बाहर की ओर उभरने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सड़क की मजबूती और निर्माण के दौरान किए गए मिट्टी के भराव व दबाव की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की बात कही गई है। जागरण और अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक एनएच के अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह ने सड़क के क्षतिग्रस्त होने के पीछे बारिश को वजह बताया है और इसे जल्द दुरुस्त कराने की बात कही है। संबंधित ठेकेदार से सड़क धंसने के कारणों को लेकर जवाब भी मांगा गया है।
हालांकि, बारिश को कारण बताए जाने के बाद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग की जा रही है कि केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने के बजाय सड़क के नीचे की संरचना, मिट्टी के भराव, जल निकासी और इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच कराई जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण पूरा होने और सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ने के बाद ऐसी समस्या सामने आती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। अभी सड़क निर्माणाधीन है, इसलिए समस्या सामने आने के बाद इसकी तकनीकी जांच और सुधार का मौका मौजूद है।
राम वनगमन पथ परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4,400 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसका उद्देश्य अयोध्या, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, श्रृंगवेरपुर और चित्रकूट जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ना है। इतनी बड़ी लागत और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्व रखने वाली परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल इसलिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि आगे चलकर इस मार्ग पर सामान्य यातायात के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ने की उम्मीद है।
इस परियोजना के निर्माण में पीएनसी इंफ्राटेक का नाम सामने आया है। ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यही कंपनी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के निर्माण से भी जुड़ी रही है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे को लेकर हाल के दिनों में भी बारिश के बाद पानी के रिसाव और संरचना पर असर पड़ने संबंधी रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि दोनों परियोजनाओं की परिस्थितियां अलग हैं और राम वनगमन पथ की मौजूदा समस्या के कारणों का अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
राम वनगमन पथ के क्षतिग्रस्त होने की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब परियोजना के लोकार्पण की तैयारियों की चर्चा चल रही है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार आने वाले महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसके लोकार्पण की तैयारी की जा रही थी। ऐसे में उद्घाटन से पहले सड़क के धंसने और दरारें आने से निर्माण एजेंसी तथा विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
श्रृंगवेरपुर धाम धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान इसी क्षेत्र से होकर आगे बढ़े थे। इसी धार्मिक महत्व को देखते हुए राम वनगमन पथ परियोजना को केवल एक सामान्य सड़क परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके बनने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय कारोबार को फायदा होने और अयोध्या-चित्रकूट के बीच यात्रा आसान होने की उम्मीद है। इसलिए सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सामने आई समस्या पर जल्द और गंभीरता से ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है।
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क आखिर इतनी कम अवधि में क्यों धंसने लगी। यदि बारिश इसका प्रमुख कारण है तो यह भी जांच का विषय होगा कि सड़क की जल निकासी व्यवस्था और नीचे की मिट्टी को बारिश के पानी से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं। वहीं यदि मिट्टी के भराव या उसकी कम्पैक्शन में कोई कमी रही है तो तकनीकी जांच से इसकी जानकारी सामने आ सकती है। सड़क की ऊपरी परत की मरम्मत से समस्या कुछ समय के लिए दूर हो सकती है, लेकिन यदि नीचे की संरचना कमजोर है तो भविष्य में दोबारा धंसाव का खतरा बना रह सकता है।
फिलहाल प्रशासन और निर्माण एजेंसी की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही ठेकेदार से जवाब मांगा गया है। सड़क पर यातायात को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्टों में क्षतिग्रस्त हिस्से पर आवाजाही रोकने की जानकारी दी गई है। ऐसे में मरम्मत पूरी होने और सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक लोगों को इस हिस्से में सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
राम वनगमन पथ की मौजूदा स्थिति ने परियोजना की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। 100 मीटर के दायरे में चार प्रमुख स्थानों पर धंसाव की रिपोर्ट हो या 500 मीटर में दोनों लेन पर 118 स्थानों पर क्षति का ग्राउंड आकलन, दोनों ही स्थिति में यह स्पष्ट है कि सड़क के इस हिस्से में निर्माण से जुड़ी समस्या गंभीरता से जांचे जाने की जरूरत है। बारिश को शुरुआती कारण बताया गया है, लेकिन अंतिम वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब निगाह इस बात पर है कि विभाग क्षतिग्रस्त हिस्से की केवल मरम्मत कराता है या सड़क की पूरी संरचना की तकनीकी जांच भी कराई जाती है। करोड़ों रुपये की इस परियोजना के लंबे समय तक टिकाऊ रहने के लिए सड़क के नीचे की संरचना, जल निकासी, मिट्टी की मजबूती और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच महत्वपूर्ण होगी। क्योंकि राम वनगमन पथ का उद्देश्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि अयोध्या से चित्रकूट तक धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों को स्थायी रूप से बेहतर कनेक्टिविटी देना है। निर्माण पूरा होने से पहले सामने आई यह समस्या विभाग और निर्माण एजेंसी के लिए गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बड़ी परीक्षा बन गई है








