प्रयागराज के हंडिया थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व प्रधान पवन यादव की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की वजह शुरुआती पूछताछ में व्यक्तिगत रंजिश सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में लल्ला यादव, बृजेश यादव और निहाल अली को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार तीनों आरोपी एक बाइक पर सवार होकर वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। पुलिस का दावा है कि हमले में इस्तेमाल बाइक के साथ दो तमंचे भी बरामद किए गए हैं।
पवन यादव समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए थे और उन्हें पार्टी का जिला सचिव तथा पूर्व प्रधान बताया गया है। मंगलवार शाम हंडिया क्षेत्र में उन पर बाइक सवार हमलावरों ने गोली चलाई थी। गोली लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की गई। हत्या की खबर फैलते ही परिवार और समर्थकों में शोक की स्थिति बन गई तथा अस्पताल और मोर्चरी के आसपास सपा नेताओं और परिचितों की भीड़ जुट गई।
पुलिस के अनुसार, वारदात की योजना में तीन लोग शामिल थे। जांच में सामने आया कि निहाल अली बाइक चला रहा था, बृजेश यादव उसके बीच में बैठा था और लल्ला यादव सबसे पीछे था। पुलिस का दावा है कि इसी दौरान लल्ला यादव ने पवन यादव पर गोली चलाई। वारदात के बाद तीनों आरोपी बाइक से मौके से फरार हो गए। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर संदिग्धों की पहचान करने की दिशा में जांच आगे बढ़ाई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात में इस्तेमाल किए गए दो तमंचे और कारतूस करीब 20 हजार रुपये में खरीदे थे। जांच में पुलिस ने इन हथियारों की बरामदगी का दावा किया है। इसके अलावा वह बाइक भी पुलिस के कब्जे में ली गई है, जिसका इस्तेमाल आरोपी घटनास्थल तक पहुंचने और वारदात के बाद भागने में कर रहे थे। हथियारों और बाइक की बरामदगी को जांच में महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार हत्या के पीछे किसी राजनीतिक विवाद के बजाय व्यक्तिगत रंजिश की बात सामने आई है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और हत्या की पूरी पृष्ठभूमि को लेकर पुलिस अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। किसी भी हत्या के मामले में पुलिस आरोपियों के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल और कॉल डिटेल तथा हथियारों की बरामदगी जैसे पहलुओं को जांच में शामिल कर सकती है। इस मामले में भी पुलिस इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
घटना के समय पवन यादव क्षेत्र में मौजूद थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह कुछ लोगों से मिलकर वापस लौट रहे थे, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उन पर फायरिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक गोली उनकी पीठ में लगी और वह घायल होकर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। बाद में उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। पुलिस के पास जांच के लिए पवन यादव का मोबाइल फोन भी था और उनकी कॉल डिटेल की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। हत्या से पहले उनकी किन लोगों से बातचीत हुई थी, किसी व्यक्ति से विवाद या रंजिश थी या नहीं और घटना से पहले आरोपी किस तरह उनके संपर्क या गतिविधियों पर नजर रख रहे थे, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा सकती है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद इस हत्याकांड में तीन संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए वारदात की पूरी योजना, हथियारों की खरीद और हत्या के पीछे के विवाद से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि हथियार किससे खरीदे गए और आरोपियों ने हत्या के लिए पवन यादव को किस तरह निशाना बनाया।
इस मामले में 20 हजार रुपये में दो तमंचे और कारतूस खरीदने की बात भी जांच का अहम हिस्सा है। यदि पुलिस की बरामदगी और पूछताछ से यह जानकारी पुष्ट होती है, तो हथियारों की खरीद का स्रोत भी जांच में शामिल किया जा सकता है। पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि आरोपियों ने घटना से पहले कितने समय तक इसकी तैयारी की और क्या उन्होंने पवन यादव की गतिविधियों की पहले से जानकारी जुटाई थी।
हत्या के बाद इलाके में तनाव और चिंता का माहौल बना। पवन यादव स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े थे और पूर्व प्रधान भी रहे थे। उनकी हत्या की खबर सामने आने के बाद समर्थकों और परिचितों की भीड़ अस्पताल तथा मोर्चरी के आसपास पहुंची। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए जांच और कानून-व्यवस्था दोनों पर ध्यान दिया। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद मामले में आगे की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह व्यक्तिगत रंजिश बताई गई है। हालांकि किसी भी आपराधिक मामले में शुरुआती पूछताछ से सामने आया कारण अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता। जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ सकते हैं। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और अन्य कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।
पवन यादव की हत्या के बाद समाजवादी पार्टी से जुड़े स्थानीय लोगों के बीच भी घटना को लेकर प्रतिक्रिया देखने को मिली। चूंकि मृतक पार्टी के जिला सचिव और पूर्व प्रधान बताए गए हैं, इसलिए उनकी हत्या का राजनीतिक संदर्भ भी चर्चा में आया है। हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच में व्यक्तिगत रंजिश को वजह बताया गया है। इसलिए फिलहाल राजनीतिक कारण को हत्या का आधार मानना उचित नहीं होगा, जब तक जांच से ऐसा कोई तथ्य सामने न आए।
मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि घटना के दौरान आसपास कौन-कौन लोग मौजूद थे और हमलावर किस रास्ते से आए तथा किस दिशा में भागे। सीसीटीवी फुटेज से बाइक और आरोपियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा सकती है। पुलिस द्वारा बाइक बरामद किए जाने के बाद उसके मालिकाना हक और इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है।
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। पूछताछ में यदि आरोपियों द्वारा हत्या की योजना, हथियार खरीदने और घटना के बाद भागने से संबंधित जानकारी दी गई है तो उसकी पुष्टि अन्य साक्ष्यों से की जाएगी। पुलिस की जांच का उद्देश्य केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं बल्कि हत्या की पूरी साजिश और उसके पीछे की वजह को कानूनी साक्ष्यों के साथ स्थापित करना भी होगा।
फिलहाल प्रयागराज के हंडिया में सपा नेता पवन यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने और घटना में इस्तेमाल बाइक तथा दो तमंचे बरामद करने की बात कही है। पुलिस के मुताबिक हत्या व्यक्तिगत रंजिश के कारण हुई और हथियारों की खरीद के लिए करीब 20 हजार रुपये खर्च किए गए थे। अब जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों ने हत्या की योजना कब बनाई, हथियार कहां से हासिल किए और पवन यादव को निशाना बनाने के पीछे पूरा विवाद क्या था।











