संसद में विधेयक पारित करने के तरीके पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, बिना बहस बिल पास कराने का लगाया आरोप

शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद में विधेयक पारित करने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बिल बिना पर्याप्त

संसद के मानसून सत्र में बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयक पारित किए जाने के आरोपों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में विधायी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पर्याप्त चर्चा के बिना जल्दबाजी में पारित कराया गया। उन्होंने सार्वजनिक परीक्षा सुधार, ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े प्रावधान और जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक सहित कई कानूनों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने दावा किया कि कुछ विधेयक विपक्ष के विरोध, हंगामे और वॉकआउट के बीच पारित किए गए, जिससे सांसदों को विस्तृत चर्चा और सुझाव रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया में बहस और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है।

सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर उठाए सवाल

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इसे पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी रोकने के उद्देश्य से पेश किया है। इस कानून में परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है, जिसमें दोषियों को लंबी सजा और संस्थागत अपराधों पर भारी जुर्माने की व्यवस्था शामिल है।

हालांकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि विपक्ष की चिंता यह है कि कानून केवल अपराध करने वालों पर कार्रवाई तक सीमित है, जबकि परीक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं में केवल आरोपियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसके अलावा, प्रभावित छात्रों के लिए मुआवजे और दोबारा परीक्षा जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए।

‘वंदे मातरम्’ विधेयक को लेकर वैचारिक बहस

प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े संशोधन विधेयक, 2026 पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, इस संशोधन के जरिए ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कानूनी प्रावधानों को मजबूत किया गया है और इसके अपमान या जानबूझकर बाधा डालने पर सजा का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर संवैधानिक और वैचारिक सवाल उठाए हैं। कुछ दलों का तर्क है कि देशभक्ति से जुड़े विषयों को आपराधिक कानूनों के माध्यम से लागू करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

विपक्ष ने धार्मिक स्वतंत्रता, भाषाई विविधता और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। वहीं, सरकार का पक्ष रहा है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और सम्मान से जुड़े विषयों की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।

संसद में विधेयक पारित करने के तरीके पर प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, बिना बहस बिल पास कराने का लगाया आरोप

जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पर भी आपत्ति

प्रियंका चतुर्वेदी ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के तहत निर्धारित समय सीमा के बाद जन्म या मृत्यु पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को अधिक जटिल बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि पहले जहां स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा सकती थी, वहीं नए नियमों के तहत कुछ मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी से आदेश लेना आवश्यक हो सकता है।

उन्होंने आशंका जताई कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों, गरीब परिवारों और कम संसाधनों वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना भी उन्होंने व्यक्त की।

संसद में आगे भी जारी रह सकता है टकराव

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि संसद के मौजूदा सत्र में आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन और परिसीमन जैसे विषयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और विधायी पारदर्शिता को लेकर अपनी आवाज उठाता रहेगा।

संसद में विधेयकों को पारित करने की प्रक्रिया लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। जहां सरकार कानूनों को तेज गति से लागू करने को प्रशासनिक जरूरत बताती है, वहीं विपक्ष का कहना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा लोकतंत्र की मूल भावना का हिस्सा है। मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक, राष्ट्रीय प्रतीक, प्रशासनिक सुधार और परिसीमन जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार और विपक्ष इन मुद्दों पर संसद के भीतर किस तरह आगे बढ़ते हैं।

Leave a comment