परमाणु वार्ता से पहले ईरान का कड़ा रुख, अमेरिका को दी खुली चेतावनी

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को सख्त संदेश दिया। ओमान में परमाणु वार्ता से पहले ईरान ने ताकत की भाषा खारिज की।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को चेतावनी दी है। ओमान में परमाणु वार्ता से पहले उन्होंने साफ कहा कि ईरान दबाव या धमकी की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।

Iran-US Tension: ईरान और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी साफ दिखाई देने लगी है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान ताकत की भाषा बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान का सम्मान करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर बातचीत का दूसरा चरण ओमान में होने जा रहा है।

बयान का समय क्यों अहम

पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे दौर में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य हलचल तेज है। अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है, जबकि ईरान अपने परमाणु अधिकारों को लेकर किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है। ओमान में प्रस्तावित वार्ता को तनाव कम करने का मौका माना जा रहा था, लेकिन इस बयान ने साफ कर दिया है कि ईरान झुकने के मूड में नहीं है।

परमाणु अधिकारों पर ईरान का रुख

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का पूरा अधिकार रखता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान की परमाणु नीति अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में है। उनका कहना है कि अगर सम्मान से बात होगी तो जवाब भी सम्मान से मिलेगा, लेकिन धमकी और दबाव की भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी।

बातचीत को लेकर संकेत

पेजेश्कियन ने ओमान में पहले चरण की वार्ता को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्रशासन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह की शर्तों या दबाव को मानने का सवाल ही नहीं उठता। इससे यह साफ होता है कि ईरान कूटनीति के दरवाजे बंद नहीं कर रहा, लेकिन अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ना चाहता है।

अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर

इस बयान के साथ ही अमेरिका की सैन्य गतिविधियां भी चर्चा में हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और देश के भीतर हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी के तहत खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना की तैनाती तेज की गई है। इसे ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती तैनाती

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने माना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपना सैन्य बेड़ा मजबूत कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। अमेरिका ने जनवरी के अंत में USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर को अरब सागर में तैनात किया था। इसके अलावा कई अन्य युद्धपोत और विमान भी क्षेत्र में सक्रिय हैं।

रिपोर्ट में क्या सामने आया

रिपोर्ट के अनुसार सैटेलाइट इमेज में यह देखा गया कि दर्जनभर F-15 फाइटर जेट, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10C थंडरबोल्ट II विमान जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही USS डेल्बर्ट डी ब्लैक डिस्ट्रॉयर स्वेज नहर से लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। MQ-4C ट्राइटन ड्रोन भी खाड़ी क्षेत्र में निगरानी कर रहा है।

ईरान की खुली चेतावनी

अमेरिकी सैन्य तैनाती के बावजूद ईरान ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि ईरान युद्ध की धमकी से डरने वाला नहीं है। उन्होंने तेहरान फोरम में कहा कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पर जोर देता रहेगा, भले ही उस पर युद्ध थोपा जाए। यह बयान दर्शाता है कि ईरान इस मुद्दे को अपनी संप्रभुता से जोड़कर देख रहा है।

विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा

इसी बीच अमेरिका ने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई की आलोचना की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में तीन सुधारवादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को सजा सुनाई गई है। अमेरिका इसे मानवाधिकार (Human Rights) का उल्लंघन बता रहा है, जबकि ईरान इसे आंतरिक मामला मानता है।

क्या युद्ध की आशंका बढ़ी

इन तमाम घटनाक्रमों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की स्थिति बन सकती है। फिलहाल दोनों देश सीधे युद्ध की ओर बढ़ते नहीं दिख रहे, लेकिन बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां माहौल को लगातार तनावपूर्ण बना रही हैं। ओमान में होने वाली परमाणु वार्ता इस दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है।

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