पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव: रिपोर्ट में दावा- UAE ने भी ईरान पर किए गुप्त हमले, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

रिपोर्ट मे दावा- UAE ने ईरान की ऑयल रिफाइनरी पर गुप्त हमला किया था। ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को बेईमान बताया, तेल बाजार में तनाव, पश्चिम एशिया में चिंता गहरा गई।

रिपोर्ट के मुताबिक UAE ने ईरान की लावान ऑयल रिफाइनरी पर गुप्त हमला किया। इस बीच ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को बेईमान बताते हुए वार्ता पर सवाल उठाए। बढ़ते तनाव से तेल बाजार और पश्चिम एशिया में चिंता गहरा गई है।

यूएई/ईरान/अमेरिका: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने क्षेत्रीय संघर्ष को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हालिया संघर्ष के दौरान ईरान पर गुप्त सैन्य हमले किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में ईरान के लावान द्वीप स्थित एक महत्वपूर्ण ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिससे वहां बड़े पैमाने पर आग लग गई और तेल उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहा। हालांकि UAE ने इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक संकेतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

लावान द्वीप हमला और तेल उत्पादन पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, हमला अप्रैल की शुरुआत में हुआ था। उसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा कर रहे थे। ईरान ने उस समय सार्वजनिक रूप से कहा था कि उसकी रिफाइनरी “दुश्मन के हमले” में क्षतिग्रस्त हुई है।

लावान द्वीप ईरान के तेल निर्यात नेटवर्क का एक अहम हिस्सा माना जाता है। वहां की रिफाइनरी पर हमला होने से ईरान के ऊर्जा उत्पादन और निर्यात क्षमता पर प्रभाव पड़ा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता को और बढ़ाया।

हमले के बाद ईरान ने कथित तौर पर UAE और कुवैत की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया।

UAE ने सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की

संयुक्त अरब अमीरात ने अब तक इन हमलों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि UAE विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश को “किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार” है, जिसमें जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका इस कथित कार्रवाई से नाराज नहीं था, क्योंकि उस समय तक युद्धविराम पूरी तरह प्रभावी नहीं हुआ था। अमेरिकी प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी देशों की बढ़ती सैन्य भूमिका को वॉशिंगटन की अप्रत्यक्ष सहमति प्राप्त हो सकती है।

ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को बताया “बेईमान”

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की नेतृत्व प्रणाली पर तीखा हमला बोला है। ट्रम्प ने कहा कि ईरानी नेता लगातार अपनी स्थिति बदलते हैं और बातचीत को जानबूझकर लंबा खींचते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन दस्तावेजों को साझा करने में कुछ मिनट लगने चाहिए, उन्हें ईरान कई दिनों तक रोककर रखता है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका अब “आधा-अधूरा समझौता” नहीं बल्कि “पूर्ण समाधान” चाहता है।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियों को लेकर गंभीर मतभेद बने हुए हैं।

ट्रम्प ने ठुकराया ईरान का नया प्रस्ताव

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसे ट्रम्प प्रशासन ने अस्वीकार्य बताया। अमेरिका की मांग है कि ईरान अगले 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने 60% तक समृद्ध यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपे।

ईरान ने इन शर्तों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया है। इसके कारण दोनों देशों के बीच शांति वार्ता लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है।

तेल बाजार में उथल-पुथल, कीमतें बढ़ीं

अमेरिका-ईरान तनाव और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में संघर्ष बढ़ता है तो वैश्विक तेल सप्लाई बाधित हो सकती है। दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल निर्यात इसी जलमार्ग से गुजरते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करते हैं, तो उसका “तुरंत जवाब” दिया जाएगा। इसके बाद कई देशों ने अपनी समुद्री सुरक्षा बढ़ा दी है।

कुछ अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अस्थायी रूप से अपने मार्ग बदले हैं, जबकि बीमा लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज

इसी दौरान लेबनान सीमा पर इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष तेज हो गया है। हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैनिकों पर हमले का दावा किया है।

दूसरी ओर, इजराइली सेना ने कहा कि उसने हिजबुल्लाह का एक ड्रोन मार गिराया है और सीमा पर एक सैनिक की मौत हुई है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो पश्चिम एशिया कई मोर्चों पर अस्थिर हो सकता है।

UAE की बदलती रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, UAE अब ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता और अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहा है। युद्ध के दौरान ईरान ने कथित तौर पर UAE पर 2800 से अधिक मिसाइल और ड्रोन दागे, जिससे वहां की एयर ट्रैफिक, पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर प्रभावित हुए।

कई कंपनियों ने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कीं और कुछ क्षेत्रों में अस्थायी छंटनी भी की गई। इसके बाद UAE ने अमेरिका के साथ अपना सैन्य सहयोग और मजबूत कर लिया।

क्षेत्रीय राजनीति में नया मोड़

विश्लेषकों का मानना है कि यदि UAE की कथित सैन्य भागीदारी की पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। अब तक खाड़ी देश प्रत्यक्ष संघर्ष से बचने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाएं संकेत देती हैं कि क्षेत्रीय गठबंधन तेजी से बदल रहे हैं।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल सैन्य मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

Leave a comment