पश्चिम एशिया संकट के बीच RBI ने 12 अरब डॉलर का सोना बेचा? रिपोर्ट ने बढ़ाई चर्चा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच RBI द्वारा 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचने की रिपोर्ट ने आर्थिक और वित्तीय हलकों में चर्चा तेज कर दी है। क्या है इस दावे की

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, Reserve Bank of India ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने और रुपये पर दबाव कम करने के उद्देश्य से अपने स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) का कुछ हिस्सा बेचा है।

बिजनेस न्यूज़: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत के विदेशी मुद्रा प्रबंधन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और भारतीय रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अपने स्वर्ण भंडार का एक हिस्सा बेचा है।

हालांकि केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट ने वित्तीय बाजारों और आर्थिक विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और वैश्विक निवेशक जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?

एक आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, मई के अंतिम सप्ताह तक के दो सप्ताह के दौरान RBI ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा हो सकता है। रिपोर्ट का आधार केंद्रीय बैंक के उपलब्ध भंडार आंकड़ों का अध्ययन है, जिसमें स्वर्ण भंडार के मूल्य में गिरावट और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में वृद्धि दर्ज की गई।विश्लेषकों का कहना है कि इसी अवधि में RBI ने विदेशी मुद्रा संपत्तियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की। 

इससे यह अनुमान लगाया गया कि केंद्रीय बैंक ने अपने कुल भंडार की संरचना में बदलाव करते हुए अधिक तरल और तुरंत उपयोग योग्य विदेशी मुद्रा संपत्तियों को प्राथमिकता दी हो सकती है। हालांकि यह केवल एक विश्लेषणात्मक निष्कर्ष है और इसे तब तक तथ्य नहीं माना जा सकता जब तक RBI स्वयं इसकी पुष्टि न करे।

भारत पर क्यों बढ़ रहा है आर्थिक दबाव?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे चालू खाते के संतुलन, विदेशी मुद्रा भंडार और भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण केंद्रीय बैंक और सरकार दोनों वैश्विक घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए रखते हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में किया गया दावा सही साबित होता है, तो इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक लचीला और उपयोगी बनाना हो सकता है। स्वर्ण भंडार किसी देश की वित्तीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां अंतरराष्ट्रीय भुगतान, आयात वित्तपोषण और मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के लिए अधिक सीधे तौर पर उपयोगी होती हैं। 

इसलिए कुछ परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक अपने भंडार के विभिन्न घटकों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, डॉलर कमजोर होता है या विदेशी निवेश प्रवाह बढ़ता है, तो RBI भविष्य में विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत करने के अवसर तलाश सकता है।

स्वर्ण भंडार को लेकर बढ़ी सतर्कता

हाल के वर्षों में कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपने स्वर्ण भंडार के प्रबंधन की रणनीति में बदलाव किया है। मार्च 2025 तक RBI के पास 880 मीट्रिक टन से अधिक सोना मौजूद था, जिसका बड़ा हिस्सा भारत के भीतर सुरक्षित रखा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में आए बदलावों ने कई देशों को अपने रणनीतिक भंडारों के स्थान और संरचना पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। इसी कारण कई केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार को घरेलू नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रुपये की स्थिरता बनाए रखना RBI की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दर नीति, विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने जैसे विभिन्न उपायों का उपयोग कर सकता है।

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