पंजाब के करीब 3.5 लाख स्थायी कर्मचारी और लगभग 4 लाख पेंशनर्स पिछले तीन वर्षों से महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का इंतजार कर रहे हैं। लंबित डीए और डीआर के भुगतान का मुद्दा अब सड़क से लेकर हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है।
Punjab DA-DR Dispute: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। लंबित भुगतान का मामला कर्मचारी संगठनों के विरोध-प्रदर्शन से होते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों और पेंशनर्स को लंबे समय से DA और DR की लंबित किस्तों का भुगतान नहीं हुआ है। वहीं, सरकार वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए भुगतान को लेकर अपना पक्ष अदालत में रख रही है। इस विवाद का असर राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ सकता है।
आइए पांच प्रमुख बिंदुओं में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है।
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1. आखिर DA-DR को लेकर विवाद क्या है?
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक पंजाब के नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के मामले में केंद्रीय कर्मचारियों और कुछ अन्य सरकारी अधिकारियों की तुलना में कम दर मिल रही है। दावेदारों का कहना है कि राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों को अधिक DA मिल रहा है, जबकि अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए दर कम है। कर्मचारी संगठन इसे असमानता मानते हैं और लंबित किस्तों के भुगतान की मांग कर रहे हैं।
उनके अनुसार, पंजाब सरकार की मौजूदा सरकार के कार्यकाल में केवल एक लंबित DA किस्त जारी की गई है। कर्मचारियों का दावा है कि जनवरी 2023 के बाद की कई किस्तें लंबित हैं और इसी वजह से बकाया DA का अंतर बढ़ता गया।
2. 8 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने क्या कहा?
विवाद में महत्वपूर्ण मोड़ 8 अप्रैल 2026 को आया। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को लंबित DA/DR से संबंधित भुगतान करने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश के मुताबिक निर्धारित समयसीमा के भीतर बकाया भुगतान किया जाना था। कर्मचारियों का कहना था कि इससे बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिल सकती है।
राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने इस आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी। हालांकि, सरकार की वित्तीय स्थिति से जुड़े तर्कों के बावजूद अपील को राहत नहीं मिली।
3. 3 अगस्त को डिवीजन बेंच का फैसला
मामले में अगला अहम घटनाक्रम 3 अगस्त 2026 को हुआ। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने लंबित भुगतान को लेकर समयसीमा तय की और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। आदेश में यह भी कहा गया कि यदि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू हो सकता है।
4. समयसीमा खत्म होने के बाद क्या हुआ?
सरकार की ओर से निर्धारित भुगतान अवधि समाप्त होने के बाद भी कर्मचारियों को बकाया DA/DR का भुगतान नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने अदालत का रुख किया और आदेश के अनुपालन की मांग की। वहीं, वित्त विभाग की ओर से विभागों को जारी निर्देशों को लेकर भी विवाद पैदा हुआ। कर्मचारियों ने इसे हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बाधा के रूप में देखा और अवमानना कार्रवाई की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने अतिरिक्त समय की मांग की। अब अदालत में आगे की सुनवाई निर्धारित है, जिससे विवाद के कानूनी पक्ष पर अगली दिशा स्पष्ट होगी।
5. क्या फिर हो सकती है कर्मचारियों की हड़ताल?
DA-DR विवाद का असर अब सड़क पर भी दिखाई दे रहा है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाया है। संगठनों ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए समयसीमा दी है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ जारी नोटिस वापस नहीं लिए गए और भुगतान को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे सामूहिक अवकाश और विरोध-प्रदर्शन जैसे कदम उठा सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार का रुख है कि बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती।










