राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर भारत के चुनावों में ‘मैच फिक्सिंग’ की जिम्मेदारी दिए जाने का आरोप लगाया। यह बयान पूर्व केरल मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के भाजपा टिकट संबंधी दावे के बाद आया। भाजपा ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। 26 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के चुनावों में “मैच फिक्सिंग” की जिम्मेदारी सौंपी है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया और आयोग के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना तेज है।
राहुल गांधी की टिप्पणी एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया के रूप में सामने आई। पोस्ट में केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के उस दावे का उल्लेख था, जिसमें उन्होंने कहा है कि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने X पोस्ट में आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार जब सरकारी सेवा में थे, तब उनका इस्तेमाल भाजपा के लिए राजनीतिक भर्ती करने में किया गया और बाद में उन्हें चुनाव आयोग में “अंपायर” की भूमिका में लाया गया।
राहुल गांधी ने अपने बयान में “मैच फिक्सिंग” शब्द का इस्तेमाल करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है, न कि किसी न्यायिक या आधिकारिक जांच में स्थापित तथ्य। उपलब्ध रिपोर्टों में ज्ञानेश कुमार की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं हुई।
जिजी थॉमसन ने क्या दावा किया?
राहुल गांधी की टिप्पणी के पीछे जिस घटनाक्रम का उल्लेख किया जा रहा है, वह केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के एक हालिया दावे से जुड़ा है।
थॉमसन ने कहा कि 2016 में दिल्ली की यात्रा के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उनसे चुनावी राजनीति में उतरने के बारे में बात की थी। उनके मुताबिक, कुमार ने उन्हें 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ने का सुझाव दिया था। थॉमसन के अनुसार, उन्हें यह भी बताया गया था कि चुनाव जीतने पर वह केंद्र में मंत्री बन सकते हैं। थॉमसन ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
यह दावा थॉमसन का व्यक्तिगत बयान है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बातचीत का स्वतंत्र दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे आरोप या दावे के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना उचित है।
ज्ञानेश कुमार उस समय सरकारी सेवा में थे
रिपोर्टों के मुताबिक, जिस समय कथित बातचीत हुई, ज्ञानेश कुमार सरकारी सेवा में थे। वह 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं और जनवरी 2024 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने मार्च 2024 में निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला और फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने।
थॉमसन के आरोप को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उनके अनुसार बातचीत उस समय हुई थी जब दोनों सरकारी सेवा में थे। हालांकि, इस कथित बातचीत के संबंध में किसी आधिकारिक जांच या निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आई है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने आरोपों को बेबुनियाद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने चुनाव आयोग की 26 सितंबर की बैठक और उसके बाद जारी प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
इस तरह भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक और तथ्यहीन बताया, जबकि कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
विवाद के बीच चुनाव आयोग की अहम बैठक
CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने 26 सितंबर को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के मुख्यालय में बैठक की।
यह बैठक ऐसे समय हुई जब आयोग के भीतर SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई थी। बैठक के बाद चुनाव आयोग ने विस्तृत प्रेस नोट जारी किया और SIR से संबंधित कई मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया।

आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR से संबंधित उसका आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। हाल के दिनों में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा कि जिन लोगों को SIR के दौरान अनमैप्ड होने या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं, उनके मामले में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर आवश्यक दस्तावेज जुटा सकते हैं।
आयोग के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ERO या AERO कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी। विशेष परिस्थितियों में सुनवाई की जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन विकल्प को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है।
Form 6 और SIR पर भी आयोग का रुख
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले Form 6 से जुड़े विवाद पर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि Form 6 के साथ जुड़ी घोषणा और SIR से संबंधित प्रक्रिया के बारे में उसके फैसले आयोग की मंजूरी से लिए गए हैं।
आयोग ने अपने प्रेस नोट में यह भी कहा कि SIR से जुड़े उसके फैसलों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन प्राप्त है। विपक्षी दलों की ओर से हालांकि इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ECINet की भी होगी समीक्षा
चुनाव आयोग ने ECINet की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला भी किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस समीक्षा में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि ECINet प्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रही है या नहीं।
विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ा टकराव
ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का ताजा बयान उस समय आया है जब कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार राजनीतिक अभियान चला रहे हैं।
कांग्रेस ने SIR को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने ताजा बयान में कहा है कि तीन सदस्यीय आयोग द्वारा लिए गए SIR संबंधी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राजनीतिक आरोप, मीडिया रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्ष अलग-अलग श्रेणियां हैं। जिजी थॉमसन का बयान और राहुल गांधी की टिप्पणी सार्वजनिक दावे हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट उसका आधिकारिक पक्ष है।
आगे क्या होगा?
राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद और तेज होने की संभावना है। SIR को लेकर विपक्षी दल पहले ही संयुक्त रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।
इस बीच चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को सरल बनाने, ऑनलाइन सुनवाई के विकल्प को मजबूत करने और ECINet की समीक्षा जैसे कदमों की घोषणा की है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष इन स्पष्टीकरणों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से राहुल गांधी के व्यक्तिगत आरोपों पर कोई अलग जवाब दिया जाता है।











