पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर ग्रामीण रोजगार योजना में बदलाव के बाद रोजगार घटने का आरोप लगाया। उन्होंने जुलाई-अगस्त में पिछले साल की तुलना में 9.56 करोड़ कम Person-Days का दावा किया।
चंडीगढ़: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जुलाई-अगस्त 2026 में करीब 20.21 करोड़ Person-Days रोजगार दर्ज हुए, जबकि इसी अवधि में 2025 में यह आंकड़ा 29.77 करोड़ था। केंद्र की नई व्यवस्था VB-G RAM G ने MGNREGA की जगह ली है और रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई है।
चीमा ने रोजगार घटने के आंकड़ों पर उठाए सवाल
पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने ग्रामीण रोजगार योजना में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि MGNREGA की जगह लागू की गई नई व्यवस्था के तहत रोजगार पैदा करने वाले कुछ प्रावधानों में बदलाव हुआ है।

चीमा ने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जुलाई-अगस्त 2025 में MGNREGA के तहत करीब 29.77 करोड़ Person-Days रोजगार दर्ज किए गए थे। इसके मुकाबले जुलाई-अगस्त 2026 में नई व्यवस्था के तहत यह आंकड़ा करीब 20.21 करोड़ Person-Days रहा। यानी करीब 9.56 करोड़ Person-Days की कमी दर्ज हुई।
यह आंकड़ा करीब 28.51 प्रतिशत की गिरावट के बराबर है। यह तुलना संबंधित वर्षों के जुलाई-अगस्त की अवधि की है।
MGNREGA की जगह लागू हुआ VB-G RAM G
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से MGNREGA की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G व्यवस्था लागू की है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है।
PRS के अनुसार, नई व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग का ढांचा भी बदला है। VB-G RAM G के लिए 2026-27 में ₹95,692 करोड़ का आवंटन किया गया है। वहीं MGNREGS के लिए अलग से ₹30,000 करोड़ का प्रावधान दर्ज है।
केंद्र सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था केवल रोजगार गारंटी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका से जुड़े कार्यों, जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन पर भी जोर देती है। सरकार के मुताबिक ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार मांगने का वैधानिक अधिकार और निर्धारित समय में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान भी व्यवस्था का हिस्सा है।
रोजगार में गिरावट को लेकर अलग-अलग दावे
चीमा ने रोजगार के आंकड़ों में आई कमी को गरीब और ग्रामीण मजदूरों के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मजदूरों पर इसके प्रभाव का दावा किया। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसकी व्यापकता और प्रभाव का स्वतंत्र आकलन अलग विषय है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से नई व्यवस्था को 125 दिनों की बढ़ी हुई रोजगार गारंटी और ग्रामीण विकास से जोड़ने वाला ढांचा बताया गया है। ग्रामीण रोजगार मांग-आधारित होने के कारण अलग-अलग अवधि में Person-Days की संख्या रोजगार की मांग और योजना के क्रियान्वयन जैसे कारकों से भी प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी रोजगार के आंकड़ों में राज्यों और वित्तीय वर्षों के बीच अंतर को मांग और योजना के कार्यान्वयन से जोड़कर समझाया है।
इस तरह मौजूदा विवाद मुख्य रूप से दो पहलुओं पर केंद्रित है—एक ओर जुलाई-अगस्त के रोजगार आंकड़ों में दर्ज गिरावट, और दूसरी ओर नई VB-G RAM G व्यवस्था के तहत बढ़ाई गई वैधानिक रोजगार गारंटी और बदला हुआ क्रियान्वयन ढांचा।










