राजस्थान सरकार ने स्कूली शिक्षा को आसान बनाने के लिए लोकल लैंग्वेज को बढ़ावा देने की पहल की है। सर्वे के आधार पर 11 भाषाओं में नई शिक्षण सामग्री तैयार की गई है, जिससे बच्चों की समझ, भागीदारी और सीखने की गति बेहतर होने की उम्मीद है।
राजस्थान लोकल लैंग्वेज शिक्षा पहल: राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाने के लिए बहुभाषी शिक्षा परियोजना शुरू की है, जिसमें आरएससीईआरटी, यूनिसेफ और अन्य संस्थाओं का सहयोग लिया गया है। इस पहल के तहत 60 हजार से अधिक स्कूलों के सर्वे के आधार पर 11 स्थानीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री तैयार की गई है। इसका उद्देश्य उन छात्रों की मदद करना है, जिनकी घर और स्कूल की भाषा अलग है, ताकि उनकी समझ और सीखने की क्षमता में सुधार हो सके।
लोकल लैंग्वेज से आसान होगी पढ़ाई
राज्य सरकार का यह कदम उन बच्चों के लिए खास अहम है, जिनकी घर की भाषा और स्कूल की भाषा अलग होती है। अक्सर यही अंतर बच्चों के सीखने की गति को प्रभावित करता है। नई पहल के तहत अब बच्चे अपनी रोजमर्रा की भाषा में ही शब्दों और अवधारणाओं को समझ सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चों को उनकी मातृभाषा या स्थानीय बोली में पढ़ाया जाता है, तो उनकी समझ बेहतर होती है और वे कक्षा में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इसी सोच के साथ अब पाठ्यपुस्तकों में स्थानीय शब्दों को शामिल किया जा रहा है, जिससे शिक्षा का स्तर और प्रभाव दोनों बेहतर होने की उम्मीद है।
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सर्वे से मिली दिशा, हजारों स्कूल जुड़े
इस परियोजना को लागू करने से पहले आरएससीईआरटी ने राज्यभर में व्यापक भाषाई सर्वेक्षण कराया। दो चरणों में हुए इस सर्वे में 60 हजार से अधिक स्कूलों और करीब 6 लाख से ज्यादा छात्रों को शामिल किया गया।
पहले चरण में 8 जिलों के 20,298 प्राथमिक स्कूलों के 2.43 लाख से अधिक बच्चों और शिक्षकों का डेटा जुटाया गया, जिसमें 31 से अधिक बोलियों की पहचान हुई। वागड़ी और मेवाड़ी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाएं सामने आईं। दूसरे चरण में 24 जिलों के 41,686 स्कूलों के 3.66 लाख से अधिक छात्रों को शामिल किया गया, जिससे यह समझने में मदद मिली कि भाषा का अंतर सीखने पर कितना असर डालता है।
11 भाषाओं में तैयार हुई नई सामग्री
सर्वेक्षण के आधार पर डूंगरपुर और सिरोही जिलों में इस परियोजना की शुरुआत की गई, जहां भाषाई विविधता सबसे अधिक पाई गई। शुरुआत में 200 स्कूलों में कक्षा 1 और 2 के छात्रों को स्थानीय भाषा में पढ़ाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
अब शिक्षा विभाग ने 11 प्रमुख स्थानीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री तैयार की है। इसमें कार्यपुस्तिकाएं, कहानी की किताबें, चित्र चार्ट, कविता पोस्टर, पहेलियां, खेल और बालगीत शामिल हैं। इस पहल को यूनिसेफ, रूम टू रीड और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन का सहयोग भी मिल रहा है। विभाग की योजना है कि पहले 11 जिलों में इसे लागू किया जाए और फिर पूरे राजस्थान में विस्तार किया जाए।










