धी समाज का दावा- चंपत राय को दी थी 200 किलो चांदी:राम मंदिर में लगनी थीं शिलाएं, रसीद नहीं मिली काकभुशुंडि’ को लेकर भी उठे सवाल

धी समाज ने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए 200 किलो चांदी चंपत राय को सौंपी थी, लेकिन आज तक रसीद नहीं मिली। चांदी की शिलाओं और काकभुशुंडि को लेकर सवाल उठे
धी समाज का दावा- चंपत राय को दी थी 200 किलो चांदी:राम मंदिर में लगनी थीं शिलाएं, रसीद नहीं मिली काकभुशुंडि’ को लेकर भी उठे सवाल
Photo Credit / Attribution: Google

राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान के मामले में एक नया विवाद सामने आया है। सिंधी (धी) समाज के प्रतिनिधियों और उद्योगपति डॉ. राजू वी. मनवानी ने दावा किया है कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 200 किलो चांदी दान स्वरूप सौंपी थी, लेकिन उन्हें आज तक इसकी कोई आधिकारिक रसीद नहीं मिली। उनका कहना है कि यह चांदी विशेष रूप से मंदिर में उपयोग के लिए दी गई थी और इसे चंपत राय को सौंपा गया था।

समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार वर्ष 2020 में एक-एक किलो वजन वाली 200 चांदी की ईंटें अयोध्या ले जाई गई थीं। उनका उद्देश्य था कि इन चांदी की शिलाओं का उपयोग राम मंदिर परिसर में किया जाए। दान देने के समय उन्हें बताया गया था कि बाद में इसकी प्रक्रिया और उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई आधिकारिक रसीद या विस्तृत सूचना नहीं मिली।

दानदाताओं का कहना है कि मौजूदा कीमतों के हिसाब से इस चांदी का मूल्य कई करोड़ रुपये बैठता है। ऐसे में वे यह जानना चाहते हैं कि चांदी का उपयोग कहां और किस रूप में किया गया। उनका आरोप है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट को स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

इसी विवाद के बीच ‘काकभुशुंडि’ को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। कुछ दावों में कहा गया कि चांदी से निर्मित काकभुशुंडि प्रतिमा और अन्य सामग्री का कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया। हालांकि बाद में सामने आई रिपोर्टों में कहा गया कि चांदी की काकभुशुंडि प्रतिमा सुरक्षित है और उसकी नियमित पूजा भी की जा रही है। वहीं 200 किलो चांदी को छोटे-छोटे सिल्वर ब्रिक्स के रूप में सुरक्षित रखे जाने तथा बैंक लॉकर में संरक्षित होने की जानकारी भी दी गई।

राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं के बीच इस दावे ने मामले को और सुर्खियों में ला दिया है। दानदाताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि यह जानना है कि श्रद्धा से दी गई सामग्री का उपयोग किस प्रकार किया गया।

वहीं दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण के दौरान प्राप्त दान और सामग्री का रिकॉर्ड रखा जाता है तथा कई वस्तुओं को सुरक्षा कारणों से संरक्षित भी किया गया है। हालांकि 200 किलो चांदी और उसकी रसीद को लेकर उठे सवालों पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

मामला सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोग पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि जांच और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा। फिलहाल 200 किलो चांदी, उसकी रसीद और उसके उपयोग को लेकर उठे सवालों ने राम मंदिर से जुड़े इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

 

Leave a comment