पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और इसके आधार पर राशन कार्ड लाभार्थियों के नाम काटे जाने के आरोपों से जुड़ा मामला अब न्यायिक स्तर पर आगे बढ़ गया है।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) और राशन कार्ड लाभार्थियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति दे दी है। याचिका में आशंका जताई गई थी कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले राशन लाभ से भी वंचित किया जा सकता है।
मामला सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और मतदाता सत्यापन प्रक्रिया के बीच संभावित संबंध को लेकर उठी चिंताओं से जुड़ा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन याचिकाकर्ता को पहले संबंधित उच्च न्यायालय में जाने का सुझाव दिया।
क्या है विवाद?
याचिका में दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। याचिकाकर्ता की आशंका है कि ऐसे लोगों के राशन कार्ड भी प्रभावित हो सकते हैं और उनका नाम लाभार्थी सूची से हटाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो बड़ी संख्या में नागरिक सरकारी खाद्यान्न वितरण प्रणाली से बाहर हो सकते हैं। यही चिंता लेकर याचिकाकर्ता ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
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मामले की सुनवाई जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटने के बाद राशन लाभ प्रभावित होने की आशंका है, जिससे हजारों परिवारों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि इस विषय पर पहले संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय से संपर्क किया जाना चाहिए।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने और कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की अनुमति मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान की और मामले का निपटारा कर दिया।
पहले भी हाईकोर्ट जाने की सलाह
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग पहले भी की गई थी। उस समय भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय का रुख करने की सलाह दी थी। बुधवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने उसी सलाह का पालन करते हुए अपनी याचिका वापस लेने का निर्णय लिया। अब इस पूरे विवाद पर आगे की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में होने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही राशन कार्ड लाभार्थियों के सत्यापन से संबंधित कदम उठा चुकी है। ऐसे में यह बहस और महत्वपूर्ण हो गई है कि मतदाता सूची और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों के बीच किसी प्रकार का प्रशासनिक संबंध स्थापित किया जा सकता है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि राशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचना सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है।
वहीं, मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का नियमित हिस्सा माना जाता है। ऐसे में दोनों प्रक्रियाओं के बीच किसी भी संभावित प्रभाव को लेकर कानूनी स्पष्टता आवश्यक है।











