अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। गृह विभाग ने रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद आवश्यक कार्रवाई के लिए इसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उपलब्ध करा दिया है
नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ कोई आपराधिक भूमिका नहीं पाई गई है। ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी अंतिम रिपोर्ट में आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं हुई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत ने जुलाई में उत्तर प्रदेश सरकार की SIT से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। SIT ने अदालत के समक्ष रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की थी।
कैसे शुरू हुई राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच?
मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया था। ट्रस्ट के अनुरोध के बाद 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT बनाई गई थी। IG रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार को टीम का सदस्य बनाया गया था।
जांच टीम ने मंदिर में चढ़ावे की गिनती, रकम के रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और कर्मचारियों सहित कई लोगों के बयानों की जांच की। जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी पूछताछ की गई थी। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से SIT की पूछताछ की खबरें भी सामने आई थीं।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
SIT की शुरुआती जांच के बाद 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई थी। शिकायत ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की ओर से दर्ज कराई गई थी। मामले में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया था।
इनके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत भी कार्रवाई की थी। शुरुआती रिपोर्ट के बाद कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य कानूनी कदम उठाए गए थे।
चंपत राय और अनिल मिश्रा पर क्यों उठे थे सवाल?

मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। जांच के दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा से पूछताछ की गई थी। जून के अंत में दोनों ने ट्रस्ट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। उस समय यह भी चर्चा थी कि जांच का दायरा ट्रस्ट के शीर्ष स्तर तक पहुंच सकता है।
जुलाई में सामने आई कुछ रिपोर्टों में SIT की जांच के आधार पर चंपत राय पर प्रबंधन और निगरानी में लापरवाही के सवाल उठने की बात कही गई थी। इसलिए अब अंतिम रिपोर्ट में उनके खिलाफ कोई आपराधिक आरोप नहीं होने की खबर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही है सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा मामले ने कानूनी स्तर पर भी अहम रूप ले लिया है। कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र और निगरानी में जांच की मांग को लेकर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई हैं। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की SIT से जांच की प्रगति संबंधी रिपोर्ट मांगी और केंद्र, राज्य सरकार तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद SIT ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश की थी। बाद में अदालत ने जांच में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने और जांच को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
अंतिम रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
SIT की अंतिम रिपोर्ट अब शासन को सौंपे जाने के बाद गृह विभाग ने उसका परीक्षण किया है। रिपोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ रिपोर्ट में कोई आपराधिक आरोप तय नहीं किया गया है।











