रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच अब बिहार समेत चार राज्यों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को इस मामले से जुड़े संभावित आर्थिक कनेक्शन की जांच के तहत दिल्ली, बिहार, झारखंड और कर्नाटक में एक साथ कई ठिकानों पर तलाशी ली। एजेंसी की कार्रवाई का फोकस कथित संदिग्ध लेनदेन, धन के स्रोत और हमले से जुड़े संभावित आर्थिक संबंधों की पड़ताल पर है।
यह मामला जून 2026 में रांची के निवारणपुर इलाके में स्थित RSS कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक 16 और 17 जून की दरम्यानी रात कार्यालय को निशाना बनाकर पेट्रोल बम फेंके गए थे। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की थी, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे चलकर इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। अब ED भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इस मामले की पड़ताल कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को ED की टीमें दिल्ली, बिहार, झारखंड और कर्नाटक में संबंधित परिसरों तक पहुंचीं। तलाशी का मकसद ऐसे दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय जानकारी जुटाना है, जिनसे हमले के पीछे मौजूद संभावित नेटवर्क और उसके आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को समझा जा सके। हालांकि एजेंसी की ओर से तलाशी के दौरान बरामदगी को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बिहार में मिले किसी दस्तावेज या लेनदेन का हमले से अंतिम रूप से संबंध स्थापित हो चुका है।
रांची के चुटिया थाना क्षेत्र के निवारणपुर में स्थित RSS कार्यालय पर जून की रात हुए हमले के बाद से ही जांच एजेंसियां मामले के अलग-अलग पहलुओं को खंगाल रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हमलावरों ने पेट्रोल से भरी बोतलें कार्यालय की ओर फेंकी थीं। एक पेट्रोल बम इमारत की छत पर गिरा और आग लगी, जबकि दूसरा प्रवेश द्वार के पास गिरा था। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं थी।
घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और जांच आगे बढ़ाई गई। बाद में NIA ने भी मामले को अपने हाथ में लेकर अलग-अलग स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। 10 सितंबर को पटना में NIA की तलाशी की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद जांच में बिहार से जुड़े संभावित संपर्कों को लेकर भी चर्चा तेज हुई।
अब ED की कार्रवाई ने जांच के आर्थिक पहलू को भी सामने ला दिया है। ED की ओर से की गई तलाशी को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संदर्भ में देखा जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमले से जुड़े लोगों तक किसी तरह का पैसा पहुंचा था या नहीं, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुए थे या नहीं और यदि कोई आर्थिक नेटवर्क मौजूद था तो उसका दायरा किन राज्यों तक फैला हुआ था। जांच पूरी होने से पहले इन संभावित कड़ियों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बिहार इस जांच में इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि NIA की पिछली कार्रवाई के दौरान पटना में भी कई ठिकानों की तलाशी ली गई थी। इसके बाद जांच एजेंसियों ने बिहार से जुड़े संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाने पर जोर दिया। ED की ताजा कार्रवाई में भी बिहार को शामिल किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि एजेंसियां मामले की जांच को केवल रांची तक सीमित नहीं रख रही हैं, बल्कि दूसरे राज्यों में मौजूद संभावित आर्थिक और संपर्क संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं।
इस पूरे मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी स्थान पर ED या NIA की तलाशी होना अपने आप में वहां मौजूद किसी व्यक्ति या संस्था को अपराध का दोषी साबित नहीं करता। जांच एजेंसियां संभावित साक्ष्य और लेनदेन की कड़ियां तलाशने के लिए तलाशी लेती हैं। किसी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच के निष्कर्ष और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
रांची में हुए हमले की जांच के दौरान एजेंसियां हमले की योजना, उसमें शामिल लोगों, उनके आपसी संपर्क और संभावित वित्तीय सहायता जैसे पहलुओं को अलग-अलग स्तर पर देख रही हैं। ED का फोकस खास तौर पर वित्तीय लेनदेन पर है। यदि जांच में किसी संदिग्ध भुगतान, फंड ट्रांसफर या दूसरे वित्तीय माध्यम का पता चलता है, तो एजेंसी उसके स्रोत और लाभार्थियों की जानकारी खंगाल सकती है।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि मामले में NIA की जांच पहले से जारी थी और कई राज्यों में कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में ED की ताजा तलाशी को जांच के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है। चार राज्यों में एक साथ कार्रवाई होने से यह संकेत मिलता है कि एजेंसियां मामले से जुड़े संभावित नेटवर्क की जानकारी अलग-अलग स्थानों से जुटाने का प्रयास कर रही हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रांची के RSS कार्यालय पर हुए हमले का कोई प्रत्यक्ष वित्तीय कनेक्शन बिहार से जुड़ता है। ED की तलाशी इसी तरह के संभावित संबंधों की जांच का हिस्सा बताई गई है। हालांकि अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसमें यह स्थापित हो कि बिहार में किसी व्यक्ति या ठिकाने से मिले साक्ष्य सीधे हमले की साजिश या उसके वित्तपोषण से जुड़े हैं।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद एजेंसियां यह तय कर सकती हैं कि किन लोगों से पूछताछ की जरूरत है और किन लेनदेन को संदिग्ध माना जाना चाहिए। यदि वित्तीय लेनदेन की कोई कड़ी सामने आती है तो जांच उसका स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पता लगाने की कोशिश कर सकती है।
रांची के निवारणपुर स्थित RSS कार्यालय पर जून में हुए पेट्रोल बम हमले से शुरू हुई जांच अब कई राज्यों तक पहुंच चुकी है। पहले स्थानीय पुलिस, फिर NIA और अब ED की कार्रवाई से इस मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ा है। गुरुवार की चार राज्यों में हुई तलाशी के बाद बिहार से जुड़े संभावित तारों को लेकर भी जांच तेज हुई है। फिलहाल एजेंसियों की ओर से जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि हमले और बिहार में तलाशी लिए गए ठिकानों के बीच वास्तविक संबंध कितना मजबूत है।










