रांची विश्वविद्यालय के खेल विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ईस्ट जोन कबड्डी प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों और टीम से जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण अब विश्वविद्यालय प्रशासन तारीख बीत जाने के बाद ट्रायल कराने की तैयारी में जुटा है। बताया जा रहा है कि ईस्ट जोन कबड्डी प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय की ओर से खिलाड़ियों के नाम निर्धारित समय-सीमा के भीतर भेजे जाने थे, लेकिन नाम भेजने की अंतिम तारीख 29 सितंबर बीत जाने के बाद अब ट्रायल कराया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टीम के खिलाड़ियों का चयन ही समय पर नहीं हुआ तो विश्वविद्यालय की टीम प्रतियोगिता में किस तरह और किस प्रक्रिया के तहत शामिल होगी।
रांची विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों के लिए ईस्ट जोन स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता में हिस्सा लेना महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाले ऐसे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ आगे विश्वविद्यालय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर मिलता है। लेकिन इस बार टीम चयन की प्रक्रिया में हुई देरी ने खिलाड़ियों की तैयारी और उनके अवसर दोनों को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर दी है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विश्वविद्यालय की ओर से ईस्ट जोन प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों के नाम भेजने की समय-सीमा पहले से तय थी। 29 सितंबर तक नाम भेजे जाने थे। इसके बावजूद ट्रायल की प्रक्रिया समय रहते पूरी नहीं की गई। अब तारीख निकल जाने के बाद खिलाड़ियों को बुलाकर ट्रायल कराने की तैयारी है। इससे खिलाड़ियों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन सकती है कि आखिर चयन के बाद विश्वविद्यालय की टीम किस समय प्रतियोगिता में पहुंचेगी और क्या समय पर नामांकन या टीम की प्रविष्टि की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी।
रांची विश्वविद्यालय ने सत्र 2026-27 के लिए अपना खेल कैलेंडर भी जारी किया है। इसमें कई खेलों के अंतर महाविद्यालय टूर्नामेंट और विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल की तिथियां निर्धारित की गई हैं। हाल में जारी कैलेंडर के अनुसार विश्वविद्यालय की खेल गतिविधियों की शुरुआत अक्टूबर से होनी है और कबड्डी भी शुरुआती प्रतियोगिताओं में शामिल है। कैलेंडर में कबड्डी को लेकर अलग-अलग स्तर पर प्रतियोगिता और चयन प्रक्रिया की तिथियां दी गई हैं।
ऐसे में ईस्ट जोन कबड्डी टीम के लिए समय पर ट्रायल नहीं होना खेल विभाग की तैयारी पर सवाल खड़ा करता है। खिलाड़ियों का चयन केवल मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसके बाद टीम की प्रविष्टि, खिलाड़ियों के दस्तावेज, विश्वविद्यालय की अनुमति, यात्रा की व्यवस्था और प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचने की तैयारी भी करनी होती है। यदि इनमें से किसी प्रक्रिया में देरी होती है तो उसका सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ सकता है।
खिलाड़ियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से यदि ट्रायल पहले करा लिया जाता तो उन्हें प्रतियोगिता के लिए तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सकता था। कबड्डी जैसे खेल में टीम के खिलाड़ियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी होता है। रेडर, डिफेंडर और ऑलराउंडर खिलाड़ियों की भूमिका अलग-अलग होती है और प्रतियोगिता से पहले टीम को साथ में अभ्यास करने का मौका मिलना जरूरी माना जाता है। अचानक ट्रायल कर टीम बनाने से खिलाड़ियों को आपसी तालमेल विकसित करने के लिए कम समय मिल सकता है।
विश्वविद्यालय के खेल विभाग की जिम्मेदारी केवल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराने तक सीमित नहीं होती। खिलाड़ियों को समय पर सूचना देना, चयन ट्रायल की घोषणा करना, टीम का गठन करना, आवश्यक दस्तावेज तैयार करना और संबंधित प्रतियोगिता के आयोजकों को समय पर टीम की जानकारी भेजना भी खेल प्रशासन की प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में यदि नाम भेजने की तारीख निकलने के बाद ट्रायल कराया जा रहा है तो यह पूरी प्रक्रिया की समयबद्धता को लेकर सवाल खड़े करता है।
रांची विश्वविद्यालय के खेल कैलेंडर में 2026-27 सत्र के दौरान 12 अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिताओं और 14 खेलों के चयन ट्रायल को शामिल किया गया है। कबड्डी से प्रतियोगिताओं की शुरुआत निर्धारित की गई है। इससे स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय के पास खेल गतिविधियों के लिए पहले से कैलेंडर मौजूद था। ऐसे में खिलाड़ियों के चयन और टीम गठन को लेकर तैयारी पहले से किए जाने की उम्मीद थी।
कबड्डी खिलाड़ियों के लिए विश्वविद्यालय स्तर की टीम में चयन एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। कॉलेज स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों में से बेहतर प्रदर्शन करने वालों को विश्वविद्यालय टीम में जगह मिलती है। इसके बाद टीम को दूसरे विश्वविद्यालयों की टीमों के साथ मुकाबला करने का मौका मिलता है। ईस्ट जोन प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों की टीमें हिस्सा लेती हैं, इसलिए यहां प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर भी बनते हैं।
वर्तमान स्थिति में सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि 29 सितंबर की समय-सीमा बीत चुकी है। यदि संबंधित आयोजक संस्था ने टीम की प्रविष्टि के लिए निर्धारित तारीख को अंतिम माना है, तो अब विश्वविद्यालय को यह स्पष्ट करना होगा कि देर से चयनित टीम की एंट्री किस प्रकार स्वीकार की जाएगी। यदि विशेष अनुमति की जरूरत पड़ती है तो उसकी जिम्मेदारी भी खेल विभाग को ही उठानी होगी।
ट्रायल में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कई खिलाड़ी अलग-अलग कॉलेजों में अभ्यास कर रहे होंगे और उन्हें अंतिम समय पर ट्रायल की जानकारी मिलने पर अपनी तैयारी और यात्रा की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। खिलाड़ियों को यह भी उम्मीद रहती है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो और उन्हें पर्याप्त समय पहले सूचना दी जाए।
कबड्डी के खेल में केवल व्यक्तिगत फिटनेस ही नहीं, बल्कि मैच की रणनीति और टीम संयोजन भी महत्वपूर्ण होता है। किसी खिलाड़ी की रेडिंग क्षमता, बोनस लेने की क्षमता, टैकलिंग, चेन डिफेंस, एंटी रेड रणनीति और दबाव की स्थिति में निर्णय लेने की क्षमता का आकलन ट्रायल के दौरान किया जाता है। इसके बाद चुने गए खिलाड़ियों को एक साथ अभ्यास कराकर टीम तैयार की जाती है। इसलिए ट्रायल और प्रतियोगिता के बीच पर्याप्त समय मिलना जरूरी माना जाता है।
रांची विश्वविद्यालय के खेल विभाग की ओर से अब ट्रायल कराया जा रहा है तो खिलाड़ियों की निगाह चयन प्रक्रिया पर रहेगी। उम्मीद की जाएगी कि ट्रायल में सभी योग्य खिलाड़ियों को समान अवसर मिले और चयन प्रदर्शन के आधार पर हो। साथ ही चयन के बाद विश्वविद्यालय की टीम को प्रतियोगिता में भेजने की प्रक्रिया को भी तेजी से पूरा किया जाए, ताकि प्रशासनिक देरी का नुकसान खिलाड़ियों को न उठाना पड़े।
विश्वविद्यालय के खेल कैलेंडर से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में कई खेल प्रतियोगिताएं और चयन ट्रायल आयोजित होने हैं। अक्टूबर से जनवरी तक अलग-अलग कॉलेजों में प्रतियोगिताएं प्रस्तावित हैं। ऐसे में ईस्ट जोन कबड्डी की प्रक्रिया में सामने आई देरी से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्य खेलों के लिए भी चयन और टीम गठन की प्रक्रिया समय पर पूरी की जाएगी।
खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों में मजबूत खेल व्यवस्था की जरूरत होती है। कॉलेजों में खिलाड़ियों को अभ्यास की सुविधा देने के साथ-साथ प्रतियोगिताओं की जानकारी समय पर देना और चयन प्रक्रिया को निर्धारित समय के अनुसार पूरा करना भी उतना ही जरूरी है। विश्वविद्यालय की टीम जब किसी बाहरी प्रतियोगिता में हिस्सा लेती है तो वह केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि संबंधित विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व भी करती है। इसलिए टीम चयन और प्रतियोगिता से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया में किसी तरह की देरी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है।
इस पूरे मामले में अब विश्वविद्यालय प्रशासन और खेल विभाग की अगली भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ट्रायल के बाद कितने खिलाड़ियों का चयन होता है, टीम की अंतिम सूची कब तैयार होती है और ईस्ट जोन प्रतियोगिता के आयोजकों के पास नाम किस तरह भेजे जाते हैं, इस पर खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों की नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि निर्धारित तारीख निकल जाने के बाद होने वाले ट्रायल के कारण विश्वविद्यालय की टीम की प्रविष्टि पर कोई प्रशासनिक अड़चन आती है या नहीं।
रांची विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों को लेकर इस सत्र का कैलेंडर पहले ही जारी हो चुका है और उसमें कबड्डी सहित कई खेलों की प्रतियोगिताएं तथा चयन ट्रायल शामिल हैं। इसलिए खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों की अपेक्षा यही होगी कि आगे होने वाली सभी खेल गतिविधियों में समय-सारिणी का पालन किया जाए और खिलाड़ियों को अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।











