केंद्र सरकार अगले साल तक देश के हर कोने में 4G कनेक्टिविटी पहुंचाने की तैयारी में है। रिमोट और बॉर्डर इलाकों में टावर तेजी से लगाए जा रहे हैं। इस बीच संचार साथी ऐप को लेकर सरकार ने प्रीलोडिंग का फैसला वापस ले लिया है।
4G Network Expansion In India: केंद्र सरकार देशभर में 4G कनेक्टिविटी के लक्ष्य को अगले साल तक पूरा करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में बताया कि अब तक 25,000 मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं और बाकी 12,000 टावर अगले साल तक इंस्टॉल किए जाएंगे। यह योजना खासतौर पर रिमोट और बॉर्डर इलाकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है ताकि वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
अगले साल तक पूरे देश में पहुंचेगी 4G कनेक्टिविटी
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश के हर कोने तक 4G कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य अगले साल तक पूरा कर लिया जाएगा। खासतौर पर रिमोट और बॉर्डर इलाकों पर फोकस किया जा रहा है, जहां लंबे समय से नेटवर्क की समस्या बनी हुई थी। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि इस साल अब तक करीब 25,000 मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं।
सरकार का कहना है कि बाकी बचे करीब 12,000 टावर अगले साल तक इंस्टॉल कर दिए जाएंगे। इसके बाद दूरदराज़ गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और सीमा से सटे इलाकों में भी निर्बाध 4G नेटवर्क उपलब्ध हो सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी।
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रिमोट और बॉर्डर इलाकों पर सरकार का खास फोकस
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती इलाकों में नेटवर्क की गंभीर समस्याएं लंबे समय से बनी हुई थीं। इन्हें दूर करने के लिए वहां बड़ी संख्या में नए टावर लगाए जा रहे हैं। पहले स्टेट लेवल पर परमिशन में देरी और ग्राउंड सर्वे में समय लगने के कारण काम धीमा हो गया था।
अब इन बाधाओं को दूर कर प्रोजेक्ट को पूरी रफ्तार से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन टावरों के चालू होते ही सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को पढ़ाई, हेल्थकेयर और रोजमर्रा के डिजिटल कामों में बड़ी राहत मिलेगी।
संचार साथी ऐप पर सरकार का यू-टर्न
संचार साथी ऐप को लेकर उठे विवाद के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसे स्मार्टफोन में प्रीलोड करने के फैसले को वापस ले लिया है। विपक्ष की ओर से आशंका जताई गई थी कि इस ऐप के जरिए निगरानी की जा सकती है।
इस पर सफाई देते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह ऐप पूरी तरह सुरक्षित है और इसका मकसद सिर्फ खोए हुए मोबाइल ढूंढने और फ्रॉड रोकने में मदद करना है। अब यह ऐप अनिवार्य नहीं रहेगा और यूजर अपनी इच्छा से इसे ऑफिशियल ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकेंगे।








