RSS Tricolour Controversy: प्रियांक खरगे ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर उठाए सवाल, पूछा- संघ ने भगवा ध्वज को क्यों दी प्राथमिकता?

RSS Tricolour Controversy: प्रियांक खरगे ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर RSS पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि संघ ने लंबे समय तक भगवा ध्वज को प्राथमिकता

भाजपा के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नागपुर स्थित मुख्यालय से करनी चाहिए।

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय राजनीति में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रवाद को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कर्नाटक सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने भारतीय जनता पार्टी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को देशभर में तिरंगा अभियान चलाने से पहले इसकी शुरुआत नागपुर स्थित RSS मुख्यालय से करनी चाहिए।

खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संघ के इतिहास और उसके संगठनात्मक ध्वज को लेकर कई सवाल उठाए। उनके बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

प्रियांक खरगे ने क्या कहा?

प्रियांक खरगे ने दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक RSS के नागपुर मुख्यालय पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से नहीं फहराया गया। उन्होंने भाजपा के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पार्टी राष्ट्रीय ध्वज को लेकर देशव्यापी जनभागीदारी चाहती है, तो उसे पहले अपनी वैचारिक जड़ों वाले संगठन के मुख्यालय से इसकी शुरुआत करनी चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि RSS के कार्यक्रमों और मार्च में स्वयंसेवकों के हाथों में भारतीय तिरंगा कितनी बार दिखाई देता है। साथ ही उन्होंने पूछा कि संघ ने अपने संगठनात्मक प्रतीक के तौर पर भगवा ध्वज को क्यों प्रमुखता दी। खरगे ने अपने बयान को राष्ट्रवाद और देशभक्ति की राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए भाजपा पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि दूसरों को देशभक्ति का प्रमाण देने से पहले भाजपा को अपने वैचारिक संगठन के इतिहास पर भी बात करनी चाहिए।

RSS और तिरंगे का पुराना विवाद क्या है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय तिरंगे के संबंध को लेकर विवाद कई दशकों पुराना है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, RSS के नागपुर मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 को फहराया गया था। इसके बाद लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय ध्वज 26 जनवरी 2002 को दोबारा फहराया गया। इस इतिहास की पुष्टि भारतीय मीडिया में प्रकाशित कई रिपोर्टों और उपलब्ध दस्तावेजों से होती है।

इसी अवधि को लेकर RSS की भूमिका पर लंबे समय से राजनीतिक विवाद चलता रहा है। आलोचक सवाल उठाते रहे हैं कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज को अपनाए जाने के बाद संघ ने अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों में भगवा ध्वज को प्राथमिकता क्यों दी। RSS की शाखाओं में भगवा ध्वज को संगठन के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय तिरंगा भारत गणराज्य का राष्ट्रीय ध्वज है, जबकि भगवा ध्वज RSS की संगठनात्मक परंपरा और विचारधारा से जुड़ा हुआ है।

2002 में फिर क्यों फहराया गया तिरंगा?

नागपुर स्थित RSS परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का मुद्दा 2001 में उस समय भी सुर्खियों में आया था, जब तीन कार्यकर्ताओं ने RSS के परिसर में कथित तौर पर तिरंगा फहराया था। इसके बाद मामला कानूनी विवाद में पहुंचा। अगले वर्ष, 26 जनवरी 2002 को RSS मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। RSS समर्थकों की ओर से लंबे समय से यह तर्क दिया जाता रहा है कि 2002 से पहले राष्ट्रीय ध्वज के इस्तेमाल को लेकर लागू नियमों के कारण निजी संगठनों के लिए इसे नियमित रूप से फहराना आसान नहीं था। हालांकि, इस दलील और संघ के व्यवहार को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस जारी रही है।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान क्या है?

‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है। 2026 में भी अभियान को स्वतंत्रता दिवस समारोहों के हिस्से के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकारी और सार्वजनिक आयोजनों के जरिए लोगों से तिरंगे के साथ भागीदारी की अपील की जा रही है।

इस अभियान को लेकर भाजपा नेताओं और समर्थकों की ओर से देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस सहित विपक्षी दल समय-समय पर भाजपा और RSS के राष्ट्रवाद के दावों तथा उनके ऐतिहासिक रुख को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

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