पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और सुरक्षा एजेंसियों से निगरानी की अपील की। उन्होंने कांग्रेस पर SIR को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी समन्वय पर भी निशाना साधा।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने TMC प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे को लेकर आरोप लगाया कि वह INDIA गठबंधन की बैठक की आड़ में “दिमागी नक्सल” कहे जाने वाले तत्वों के साथ रणनीति बनाने जा रही हैं। अधिकारी ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) से बनर्जी की गतिविधियों पर नजर रखने की अपील भी की। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अधिकारी ने कांग्रेस पर भी Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कथित दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में चुनावी परिस्थितियों के अनुसार SIR को लेकर अलग रुख अपनाती है। कांग्रेस की ओर से SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग आपत्तियां पहले से सामने आती रही हैं।
ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे पर सुवेंदु का हमला
सुवेंदु अधिकारी की यह टिप्पणी उस समय आई जब ममता बनर्जी और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी दिल्ली के लिए रवाना हुए। दोनों विपक्षी दलों की बैठक में शामिल होने वाले थे। यह बैठक INDIA गठबंधन के घटक दलों की ओर से 30 सितंबर को आयोजित की गई थी।
ममता बनर्जी ने दिल्ली रवाना होने से पहले कहा था कि बैठक में राष्ट्रीय मुद्दों, चुनावी अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के SIR को लेकर भी संयुक्त रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
इसके जवाब में अधिकारी ने कहा कि INDIA गठबंधन को लेकर की जा रही गतिविधियां राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक हो चुकी हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे को “दिमागी नक्सल” के साथ कथित “प्लानिंग सेशन” बताया।
यह अधिकारी का राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है कि ममता बनर्जी या TMC ने नक्सली गतिविधियों का समर्थन किया हो।
दिल्ली पुलिस और IB से निगरानी की अपील
सुवेंदु अधिकारी ने अपने बयान में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय खुफिया ब्यूरो से ममता बनर्जी की गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि बनर्जी ऐसे लोगों से संपर्क कर सकती हैं जिन्हें वह “देश विरोधी” तत्व मानते हैं।
अधिकारी ने “आजादी” के नारों का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत में देश-विरोधी गतिविधियों के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से यह देखने की अपील की कि दिल्ली में ममता बनर्जी किन लोगों से मुलाकात करती हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये दावे सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में ममता बनर्जी की ओर से ऐसे किसी प्रतिबंधित या नक्सली संगठन के साथ बैठक करने की पुष्टि नहीं है।
INDIA गठबंधन की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा?
ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा विपक्षी दलों के बीच चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर समन्वय की पृष्ठभूमि में हुआ। INDIA गठबंधन के नेता SIR की प्रक्रिया और उससे जुड़े कथित अनियमितताओं पर चर्चा करने वाले थे।
रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भी रणनीति तैयार कर रहे हैं। बैठक में संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया से संबंधित प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना बताई गई थी।
इस राजनीतिक घटनाक्रम में TMC, कांग्रेस और वाम दलों के बीच चुनाव से जुड़े मुद्दों पर समन्वय भी महत्वपूर्ण है। ममता बनर्जी और CPI(M) के नेताओं के बीच हाल के दिनों में SIR तथा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संपर्क की खबरें सामने आई हैं।
कांग्रेस पर SIR को लेकर दोहरे रवैये का आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर SIR को लेकर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उन राज्यों में SIR की प्रक्रिया की सराहना करती है, जहां उसे इससे राजनीतिक लाभ दिखाई देता है, जबकि दूसरे राज्यों में चुनावी परिणाम उसके पक्ष में नहीं आने पर वही प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ जाती है।
अधिकारी ने इसे कांग्रेस की “राजनीति की सुविधा” बताया और आरोप लगाया कि पार्टी चुनावी परिणाम के आधार पर संस्थागत चुनावी प्रक्रिया के बारे में अपना रुख बदलती है।
SIR को लेकर क्या है राजनीतिक विवाद?
Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। हाल के महीनों में यह प्रक्रिया राजनीतिक विवाद का विषय बनी हुई है। विपक्षी दलों ने इसके तहत मतदाता सूची में संभावित बदलाव और मतदाताओं के नामों से जुड़े सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में बदलावों को लेकर अधिक पारदर्शिता और जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संस्थागत पक्ष ने SIR को मतदाता सूची की समीक्षा और शुद्धिकरण की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया है।
इसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं।
कांग्रेस के रुख पर अधिकारी की आपत्ति
सुवेंदु अधिकारी ने अपने बयान में कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी प्रक्रिया के प्रति एक समान रुख नहीं अपनाती। उन्होंने विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस नेताओं के SIR से जुड़े कथित सकारात्मक रुख का उल्लेख किया।
उनका आरोप था कि जब चुनावी प्रक्रिया से पार्टी को फायदा मिलता है तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार किया जाता है, लेकिन जब चुनावी परिणाम विपरीत हों तो उसी व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते हैं।
यह सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक व्याख्या है। कांग्रेस ने SIR को लेकर अपनी आपत्तियों में मतदाता सूची की पारदर्शिता, बदलावों की जानकारी और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से संबंधित मुद्दे उठाए हैं।
TMC और वाम दलों के बीच बढ़ा समन्वय
ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू TMC और वाम दलों के बीच हालिया संपर्क भी है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में दोनों पक्ष लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय की कोशिशें सामने आई हैं।
CPI(M) महासचिव एमए बेबी ने ममता बनर्जी से संपर्क किया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच चुनावी मुद्दों पर बातचीत की खबरें सामने आईं।
सुवेंदु अधिकारी ने इसी व्यापक विपक्षी समन्वय को निशाना बनाते हुए ममता बनर्जी पर टिप्पणी की है। उन्होंने TMC और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की गतिविधियों को लेकर अपने राजनीतिक आरोप दोहराए हैं।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ा टकराव
पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति के बीच SIR, चुनाव आयोग और मतदाता सूची का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विवाद बन गया है। इसी पृष्ठभूमि में सुवेंदु अधिकारी और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी तेज हुई है।
अधिकारी ने जहां ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों से निगरानी की अपील की, वहीं कांग्रेस पर SIR को लेकर कथित दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर संयुक्त राजनीतिक रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 30 सितंबर की दिल्ली बैठक इसी व्यापक राजनीतिक समन्वय का हिस्सा है।
मौजूदा विवाद में सुवेंदु अधिकारी के “दिमागी नक्सल” संबंधी आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं हुई है। वहीं SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित हैं।










