यूपी में बारिश-बाढ़ का कहर: बाराबंकी में 1100 साल पुराने मंदिर पर सरयू की मार, उन्नाव में सड़कों पर चलीं नावें

बाराबंकी में सरयू की तेज कटान से 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास धाम पर खतरा मंडरा रहा है। उन्नाव में जलभराव के बीच सड़कों पर नावें चलानी पड़ीं।
यूपी में बारिश-बाढ़ का कहर: बाराबंकी में 1100 साल पुराने मंदिर पर सरयू की मार, उन्नाव में सड़कों पर चलीं नावें
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उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में हालात मुश्किल कर दिए हैं। कहीं नदी के तेज बहाव से किनारे की जमीन लगातार कट रही है तो कहीं बाढ़ का पानी गांवों और सड़कों तक पहुंच गया है। बाराबंकी में सरयू नदी की तेज कटान ने करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास धाम को संकट में डाल दिया है। नदी का कटाव मंदिर परिसर के बेहद करीब पहुंच चुका है और आसपास की जमीन तेजी से सरयू में समा रही है। दूसरी ओर उन्नाव में गंगा के बढ़े जलस्तर और जलभराव के कारण कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है और लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ा है।

बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर गांव में सरयू नदी इस समय सबसे बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। नदी में तेज बहाव के साथ कटान बढ़ने से नदी का किनारा लगातार पीछे खिसक रहा है। इसी कटान की चपेट में करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास धाम का हिस्सा भी आने लगा है। स्थानीय लोगों के अनुसार धाम लंबे समय से इस इलाके का प्रमुख आस्था केंद्र रहा है और नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ इस बार कटान का रुख सीधे मंदिर की ओर हो गया है।

हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही दूरी पर मौजूद जमीन तेज धारा के साथ टूटकर नदी में गिर रही है। कई जगह किनारा इतना कमजोर हो गया है कि वहां खड़े मकान और दूसरी संरचनाएं भी खतरे में दिखाई दे रही हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो में कटान की रफ्तार और जमीन के अचानक खिसकने की तस्वीरें दिखाई गई हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय रिपोर्टों में मंदिर के आसपास की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है, हालांकि किसी भी वीडियो में दिखाई गई घटना के समय और सटीक अवधि की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।

इससे पहले सरयू की कटान ने हेतमापुर में करीब 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद और कई मकानों को भी अपनी चपेट में लिया था। रिपोर्टों के अनुसार रविवार को तेज कटान के कारण मस्जिद का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया और कई घर भी प्रभावित हुए। इससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान और निर्माण सामग्री निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर ले जाने में जुटे हैं।

स्थानीय प्रशासन और बाढ़ से जुड़े विभागों की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है। अधिकारियों की निगरानी में कटान को रोकने और मंदिर को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तेज बहाव के कारण नदी के किनारे काम करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकारियों की प्राथमिकता फिलहाल संवेदनशील हिस्सों की पहचान करने, लोगों को सुरक्षित रखने और कटान की दिशा पर लगातार नजर बनाए रखने की है।

सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटान का स्वरूप भी बदल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ समय पहले जलस्तर कम होने के बाद लोगों ने राहत महसूस की थी, लेकिन दोबारा पानी बढ़ने के साथ नदी ने किनारों पर कटान तेज कर दिया। यही वजह है कि नदी के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता फिर बढ़ गई है। कई परिवारों को आशंका है कि यदि कटान इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले समय में और मकान तथा सार्वजनिक ढांचे इसकी चपेट में आ सकते हैं।

हेतमापुर के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीणों को जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर रखने को कहा जा रहा है। जिन जगहों पर नदी का किनारा कमजोर हो चुका है, वहां लोगों की आवाजाही को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है। बाढ़ और कटान की स्थिति में सबसे बड़ा खतरा अचानक जमीन धंसने और किनारे के हिस्से के नदी में गिरने का रहता है, इसलिए संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

उधर, उन्नाव जिले में भी बारिश और गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। शुक्लागंज और गंगा किनारे के आसपास के इलाकों में पानी पहुंचने के बाद सड़क और गलियों का सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ। कुछ स्थानों पर पानी इतना बढ़ गया कि लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा।

उन्नाव में जलभराव का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं रहा। कई निचले इलाकों में घरों और रास्तों के आसपास पानी जमा होने से रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुईं। स्थानीय स्तर पर लोगों को पानी से होकर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन रास्तों पर सामान्य दिनों में पैदल और वाहनों की आवाजाही होती थी, वहां पानी भर जाने से नावों का इस्तेमाल किया गया।

उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ाया है। गंगा, सरयू, घाघरा और दूसरी नदियों के किनारे बसे इलाकों में प्रशासन को सतर्क रखा गया है। कुछ स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बनी है, जबकि कई क्षेत्रों में पानी घटने के बाद कटान तेज होने की समस्या सामने आई है।

बाराबंकी में सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल सरयू की कटान है। बाढ़ का पानी कई बार कुछ समय बाद कम हो जाता है, लेकिन तेज कटान के कारण नदी किनारे की जमीन स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि बाबा नारायण दास धाम को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है। मंदिर के आसपास नदी का कटाव लगातार जारी रहने पर धाम की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है।

करीब 1100 साल पुराने बताए जा रहे इस धाम को लेकर ग्रामीणों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में मंदिर को बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। अधिकारियों की मौजूदगी में कटान की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और नदी के रुख को देखते हुए बचाव कार्य की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

बाराबंकी और उन्नाव की तस्वीरें उत्तर प्रदेश में इस समय बारिश और बाढ़ के दो अलग-अलग असर दिखाती हैं। बाराबंकी में जहां नदी की तेज धारा जमीन और निर्माणों को काट रही है, वहीं उन्नाव में जलभराव के कारण सड़कें और गलियां पानी में डूबी दिखाई दे रही हैं। दोनों जगह प्रशासन के सामने लोगों की सुरक्षा, आवागमन और संवेदनशील क्षेत्रों को बचाने की चुनौती बनी हुई है।

मौसम और नदी के जलस्तर में आने वाले बदलाव पर अब लगातार निगरानी रखी जा रही है। नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि जलस्तर फिर बढ़ता है तो कटान और जलभराव दोनों की स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं जलस्तर कम होने की स्थिति में भी कटान का खतरा बना रह सकता है, जैसा कि बाराबंकी में देखने को मिल रहा है

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